लंदन में पांच मई को होने वाले मेयर के चुनाव के लिए प्रचार अभियान जोरों पर है. उम्मीदवार मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला कंजर्वेटिव पार्टी के गोल्डस्मिथ और लेबर पार्टी के पाकिस्तानी मूल के उम्मीदवार सादिक खान के बीच माना जा रहा है. मीडिया में आईं खबरों के मुताबिक सादिक के पाकिस्तानी मूल के होने का फायदा गोल्डस्मिथ जमकर उठा रहे हैं. वे सादिक के साथ जुड़ी इस पहचान का इस्तेमाल ब्रिटिश-भारतीय मतदाताओं को लामबंद करने के लिए कर रहे हैं.

खबरों के मुताबिक स्मिथ चुनाव प्रचार में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का सहारा भी खूब ले रहे हैं. उन्होंने भारतीय मूल के मतदाताओं को रिझाने के लिए विशेष पर्चे छपवाए हैं. इनमें मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के हाथ मिलाते हुए एक तस्वीर है. इस पर्चे पर लिखे संदेश में कहा गया है, 'ब्रिटेन के नागरिक भारतीय समुदाय के साथ खड़े हैं.' हालांकि, कंजर्वेटिव उम्मीदवार के इस तरह के प्रचार को लेकर कुछ ब्रिटिश नागरिक उनका विरोध भी कर रहे हैं. इनका कहना है कि गोल्डस्मिथ अपने चुनावी संदेश में दीवाली, नवरात्रि और जन्माष्टमी का हवाला देकर सिर्फ हिंदुओं को ही लुभाने की कोशिश कर रहे हैं.

विदेश जाने की अनुमति मिलने के बाद मुशर्रफ पाकिस्तान से दुबई गए

पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को सरकार से विदेश जाने की अनुमति मिलने के एक दिन बाद ही वे दुबई चले गए हैं. इस यात्रा पर जाने से पहले मुशर्रफ ने कहा, 'मैं एक कमांडो हूं और अपने देश से प्रेम करता हूं. मैं कुछ महीनों में जरूर वापस आऊंगा.' मीडिया की खबरों के अनुसार, मुशर्रफ आज सुबह तड़के कराची हवाईअड्डे से दुबई के लिए रवाना हो गए. बता दें कि पाकिस्तान का राष्ट्रपति रहते हुए मुशर्रफ ने 2007 में देश का संविधान निलंबित कर दिया था और इस वजह से उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला चल रहा है. पाक सरकार ने 2014 में इसी मामले में उनके देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी थी. लेकिन बुधवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वह मुशर्रफ़ पर लगे यात्रा प्रतिबंध को हटा ले. मुशर्रफ़ के वकील का कहना था कि उनकी रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन होना जरूरी है जो पाकिस्तान में नहीं हो सकता. कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने विचार विमर्श कर मुशर्रफ को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी.

कैमरून ने बोको हरम के 89 लड़ाकों को मौत की सजा दी

कैमरून में नाइजीरिया के इस्लामिक संगठन बोको हरम के 89 सदस्यों को मौत की सज़ा सुनाई गई है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक इन आतंकियों पर उत्तरी कैमरून और नाइजीरियाई सीमा के पास कई हमलों को अंजाम देने के आरोप थे. पिछले कुछ सालों में बोको हरम से संबंध रखने के आरोप में कैमरून में 850 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, इन्हीं में ये 89 लोग भी शामिल थे. वहीं दूसरी तरफ मौत की सज़ा के ऐलान के बाद स्थानीय मानवाधिकार संस्था ने कैमरून में न्यायिक व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत बताई है. बता दें कि 2002 में बोको हरम की स्थापना की गई थी. इसके बाद से यह संगठन कैमरून और नाइजीरिया में हजारों लोगों की जानें ले चुका है. इसी वजह से कैमरून में 2014 में आतंकवाद विरोधी कानून पास किया गया था जिसमें मौत की सज़ा भी शामिल की गई थी. यह पहली बार है जब इस कानून के तहत आतंकियों को मौत की सज़ा दी गई है.