सोशल मीडिया में नेताओं के बयानों पर एकतरफा प्रतिक्रियाओं, हैशटैग और ट्रोल्स के दौर सामान्य बात हैं. किसी सीधी-सी बात पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां और गाली-गलौज अब रोज की बात हो चुकी है. लेकिन आज सोशल मीडिया पर जो हुआ वह ना तो सामान्य है ना ही रोजमर्रा का हिस्सा और इसके साथ ही यह एक खतरनाक चलन की तरफ भी इशारा करता है.

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर आज पिछले कई घंटों से हैशटैग ‘मुस्लिम नेता स्पीच’ ट्रेंड कर रहा है. इस हैशटैग के साथ एक वीडियो लिंक शेयर की जा रही है. दो मिनट 14 सेकंड के इस वीडियो में एक व्यक्ति हिंदुओं के खिलाफ कई बेहद भड़काऊ बातें कह रहा है. इसे उत्तर प्रदेश के किसी मुस्लिम नेता का बयान बताया और समझा जा रहा है.

पिछले दिनों देश में हुई सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाओं को भड़काने में सोशल मीडिया पर आए कुछ वीडियो या तस्वीरों की अहम भूमिका रही है. यह वीडियो भी कुछ-कुछ इसी श्रेणी का है लेकिन महत्वपूर्ण बात है कि यह किसी मुस्लिम नेता का नहीं बल्कि फिल्मी नेता का वीडियो है. दरअसल यह अगले हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्म 'शोरगुल' का एक दृश्य है.

यू-ट्यूब पर यह वीडियो दीपक जेना नाम के प्रोफाइल से अपलोड किया गया है. दीपक जेना के अकाउंट से अपलोड किया गया यह इकलौता वीडियो है

इस वीडियो के जरिए सोशल मीडिया की एक खतरनाक प्रवृत्ति को समझा जा सकता है. इसपर आ रही टिप्पणियां बताती हैं कि कैसे एक फर्जी वीडियो कुछ ही देर में कम से कम सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे लोगों के बीच सांप्रदायिक भावनाओं को भड़का सकता है. यह बात इसलिए और महत्वपूर्ण है कि पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों और खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की जा रही है. ऐसे वीडियो इस तनावपूर्ण माहौल को बढ़ाने के लिए खाद-पानी का काम कर सकते हैं.

ट्विटर पर इस वीडियो को शेयर करने वाले ज्यादातर लोगों के ट्वीट देखकर ऐसा लगता है कि उन्हें इस वीडियो की सच्चाई मालूम नहीं है. इसके साथ ही यह अंदेशा भी पैदा होता है कि कुछ लोग इसके जरिए अपना राजनीतिक या व्यक्तिगत हित साधने की कोशिश कर रहे हैं. वीडियो के वायरल होने और ऐसा सोचने की वजह इसमें ‘कैराना’ का जिक्र होना भी है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह कस्बा पिछले कुछ दिनों से मुस्लिमों के 'डर' से हिंदुओं के कथित पलायन के चलते चर्चा में है.

आज अचानक इस वीडियो को जितनी लोकप्रियता मिली है वह किसी के लिए भी आश्चर्य की बात हो सकती है. आज अगर कोई फ़िल्मी हस्ती भी अचानक नया अकाउंट बनाकर कोई बात कहती है तो चार लोग उसकी बात पर कमेंट या लाइक तब तक नहीं करते जब तक कि उन्हें किसी खबरिया चैनल से इस बात की जानकारी ना मिल जाए. ऐसे में कोई अनजाना नाम अचानक से किसी सोशल नेटवर्किंग साइट पर कोई कंटेंट पोस्ट करे और वह इतनी जल्दी वायरल हो जाए, यह काफी अजीबोगरीब है.

‘शोरगुल’ अगले हफ्ते की 24 तारीख को रिलीज़ होने जा रही है. इसके ट्रेलर से अंदाज लगता है कि उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में एक हिंदू और एक मुस्लिम नेता के बीच की राजनीतिक खींचतान दिखाई गई है

यू-ट्यूब पर यह वीडियो दीपक जेना नाम के प्रोफाइल से अपलोड किया गया है. दीपक जेना के अकाउंट से अपलोड किया गया यह इकलौता वीडियो है. इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक इस वीडियो के हजारों व्यूज हो चुके हैं. ऐसा लगता है कि दीपक जेना का प्रोफाइल बनाया ही इसी मकसद के लिए गया है.

जैसा कि सोशल मीडिया में चलन है, धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले वीडियो यहां तेजी से वायरल होते हैं और इसमें कमेंट्स की अहम भूमिका होती है. इस लिहाज से इस वीडियो के शुरुआती कुछ कमेंट प्रायोजित लगते हैं. हालांकि इसके अंत में कुछ कमेंट ऐसे भी हैं जो इस वीडियो के फिल्म का हिस्सा होने की बात कहते हैं.

‘शोरगुल’ अगले हफ्ते, 24 तारीख को रिलीज़ होने जा रही है. इसके ट्रेलर से पता चलता है कि यह फिल्म उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित है और वहां के एक हिंदू और एक मुस्लिम नेता के बीच की राजनीतिक खींचतान दिखाती है. नरेंद्र झा ने इस फिल्म में मुस्लिम नेता की भूमिका निभाई है. इस वीडियो में वे ही भड़काऊ भाषण देते नजर आ रहे हैं. वे इतने मंझे हुए कलाकार हैं कि उनके अभिनय को कुछ लोगों ने आज सोशल मीडिया पर सच समझ लिया. इस वीडियो में झा के कपड़े और तेवर देश के कुछ ऐसे मुसलमान नेताओं से मिलते-जुलते हैं जो अक्सर विवादित बयानों के चलते चर्चा में रहते हैं.

यू-ट्यूब पर जिस तरह से यह वीडियो जारी किया गया है वह दो संभावनाओं की ओर इशारा करता है. पहली संभावना के मुताबिक हो सकता है कि फिल्म के निर्माताओं ने प्रचार के लिए इस वीडियो को जारी किया हो. दूसरी सम्भावना कहती है कि सेंसर बोर्ड से जुड़े किसी व्यक्ति ने इसे यहां लीक किया है. इनमें से कोई भी संभावना सही हो सकती है लेकिन यह तय है कि इसे यू ट्यूब पर जारी करने की टाइमिंग बहुत सोची-समझी है क्योंकि आज ही कैराना में दो अलग-अलग पार्टियों के नेता रैली निकालने की तैयारी में थे. जाहिर है कि ऐसे में किसी 'मुस्लिम नेता' का कैराना से जुड़ा कोई भड़काऊ बयान वाला वीडियो आएगा तो वह वायरल होगा ही.

इस वीडियो को यू ट्यूब पर जारी करने की टाइमिंग बहुत सोची-समझी है क्योंकि आज ही कैराना में दो अलग-अलग पार्टियों के नेता रैली निकालने की तैयारी में थे

यदि हम सोशल मीडिया पर इस वीडियो के जारी होने की पहली संभावना की बात करें और इसे एक पब्लिसिटी स्टंट मान लें तो यह निश्चित रूप से बड़ी खतरनाक प्रवृत्ति है. इसमें कोई दोराय नहीं कि इस वीडियो के चलते फिल्म को पब्लिसिटी मिल जाएगी लेकिन इसका बेहद खतरनाक परिणाम देखने को मिल सकता है.

इस वीडियो के दाईं ओर ‘फॉर सेंसर प्रीव्यू’ लिखा दिखाई दे रहा है. इस आधार पर एक संभावना है कि यह वीडियो फिल्म की उस कॉपी का हिस्सा है जो सेंसर बोर्ड को भेजी गई थी. यह घटना एक बार फिर सेंसर बोर्ड को कटघरे में खड़ी करती है. ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर हुए विवाद और उसके इंटरनेट पर लीक होने के बाद सेंसर बोर्ड की छवि को काफी धक्का लगा है. लोगों में एक धारणा बन चुकी है कि बोर्ड में बैठे लोग दक्षिणपंथी हैं. ऐसे में इस संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है कि इन्हीं लोगों में से किसी ने इस वीडियो को लीक किया हो. सेंसर बोर्ड के भीतर आपसी-खींचतान और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश भी इसकी वजह हो सकती है.

इस वीडियो के सोशल मीडिया पर जारी होने की चाहे जो भी वजह हो लेकिन इसपर आ रही प्रतिक्रियाओं को देखते हुए साफ कहा जा सकता है कि यहां जानबूझकर या अनजाने में ही इसे सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए एक औजार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. कुछ मिलाकर किसी फ़िल्मी दृश्य का सोशल मीडिया पर इस तरह का इस्तेमाल एक खतरनाक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है और यहीं आकर सोशल मीडिया एंटी-सोशल दिखने लगता है.

Play