पहले झाग और फिर आग. भारत की आईटी राजधानी कहे जाने वाले बेंगलुरु की झीलों का हाल चिंताजनक है. ताजा मामला गुरुवार की शाम का है. शहर की सबसे बड़ी बेलंदूर झील में अचानक आग लग गई. देखते ही देखते उससे धुएं का विशाल गुबार उठने लगा. काफी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड इस आग पर काबू सकी.

पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं

इस झील में पहले भी इस तरह की आग लग चुकी है. इस बार फर्क यह रहा कि इसका दायरा बढ़ गया. अप्रैल 2015 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था. पहले तो बेंगलुरू की तीन बड़ी झीलों से बदबूदार झाग उठने लगा जो तेजी से फैलता हुआ यह पास की सड़कों और घरों में घुस गया. इसके कुछ ही दिन बाद बेलंदूर झील में तीन दिन के भीतर दो बार आग लगी. पहली बार यह घटना 16 मई को हुई और दूसरी बार 18 मई को. हालांकि तब यह आग जितने रहस्यमय तरीके से लगी थी वैसे ही बुझ भी गई.

बेलंदूर ऐसी पहली झील नहीं है जिसमें आग लगी हो. दुनिया में कई जगहों पर ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं. जानकारों के मुताबिक यह अक्सर प्रदूषण के चलते होता है. नदियों और झीलों में ऐसा तब होता है जब उन्हें कूड़ेदान की तरह इस्तेमाल किया जाए. 1969 में अमेरिका के ओहायो प्रांत की इरी झील में गिरने वाली क्यूयाहोगा नदी में भी आग लग गई थी. ऐसा इसकी सतह पर फैली तेल की परत के चलते हुआ था. हालांकि इससे एक साल पहले ही इसके किनारे बसे शहर क्लीवलैंड के प्रशासन ने इसे साफ करने का अभियान शुरू कर दिया था. अगले एक दशक में यह काम पूरा हो गया.

खबरों के मुताबिक करीब 900 एकड़ में फैली बेलंदूर झील में करीब 50 करोड़ लीटर सीवर का पानी रोज गिरता है. प्रदूषण बोर्ड का कहना है कि इस झील में जलीय जीवन पूरी तरह खत्म हो चुका है. शहर की ज्यादातर दूसरी झीलों का हाल इससे जुदा नहीं. विकास के साथ हो रहे विनाश का यह एक और उदाहरण है. 

Play

विशेषज्ञ बेलंदूर झील में लगी आग के कई कारण बताते हैं. उनके मुताबिक हो सकता है ऐसा गंदगी से पैदा होने वाली मीथेन गैस के चलते हुआ हो. कुछ का यह भी मानना है कि यह आग झील की सतह पर तेल और फॉस्फोरस के जमा होने से लगी है. कुछ समय पहले एक अखबार से बातचीत में भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर टीवी रामचंद्र का कहना था, ‘झील के आसपास स्थित उद्योगों से निकलने वाला कचरा इसमें जमा हो जाता है. झाग और आग की वजह यही प्रदूषण है.’ उनके मुताबिक झील का पानी डिटर्जेंट, यूरिन और गंदगी का मेल बन चुका है.

गंदगी के साथ-साथ इस झील को अतिक्रमण ने भी मारा है. इसके चलते बेलंदूर झील का क्षेत्र घट भी गया है. झील की जमीन पर अतिक्रमण के चलते हाल में ग्रीन ट्रिब्यूनल ने शहर के दो बिल्डरों पर करीब 132 करोड़ रुपये का जुर्माना भी ठोका था. ट्रिब्यूनल ने झील के बफर जोन का दायरा बढ़ाकर 75 फीट भी कर दिया था. हालांकि इस बफर जोन को खाली कराने की प्रक्रिया घोंघे की रफ्तार से चल रही है.

एक समय था जब बेंगलुरू को अपनी सुंदर झीलों के लिए जाना जाता था. एक-दूसरे से जुड़ी हुई ये झीलें ज्यादा बारिश होने पर अतिरिक्त पानी को सहेज लेती थीं. लेकिन दूसरे शहरों की तरह भारत की इस आईटी राजधानी में हुए अंधाधुंध विकास और भ्रष्टाचार ने पानी के इन स्रोतों को खत्म कर दिया है.