आज दीवाली है और मैं आप सबको इस अवसर पर बधाई देता हूं. यह हिंदू पंचांग का एक असाधारण दिन है. विक्रम संवत के अनुसार कल यानी गुरूवार से नया साल शुरू हो जाएगा. हम सबको यह समझना जरूरी है कि क्यों हर साल हम दीवाली के पर्व पर रोशनी करते हैं. राम-रावण के बीच हुए महासंग्राम में राम और रावण अच्छी और बुरी शक्तियों के प्रतीक हैं. राम ने रावण पर विजय प्राप्त की और उनकी इस विजय ने भारत में रामराज्य स्थापित किया.

लेकिन दुख की बात है कि आज भारत में रामराज्य नहीं है. तो हम दीवाली कैसे मना सकते हैं? इस जीत का पर्व वही लोग मना सकते हैं जिनके हृदय में राम बसे हुए हैं. क्योंकि केवल ईश्वर ही है जो हमारी आत्मा को प्रकाशित कर सकता है और यह प्रकाश ही असली प्रकाश है. आज जो भजन गाया गया उसमें कवि ईश्वर के दर्शन करना चाहता है. लोगों की भीड़ कृत्रिम रोशनी देखने जाती है लेकिन, आज हमें अपने दिलों में प्रेम की रोशनी की जरूरत है. हमें अपने दिलों में प्रेम की लौ जलानी होगी. तभी हम बधाई के पात्र हो सकेंगे.

आज हजारों लोग भीषण मुसीबत में हैं. क्या आप, आप सभी अपने दिल पर हाथ रखकर कह सकते हैं कि मुसीबत में बड़ा हर शख्स चाहे वह हिंदू हो, सिख या मुसलमान, आपका अपना भाई-बहन है? यही आपकी परीक्षा है. राम और रावण अच्छाई और बुराई के बीच चलने वाले सनातन संघर्ष के प्रतीक हैं. सच्चा प्रकाश भीतर से आता है. घायल कश्मीर को देखने के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू कितने दुखी हृदय के साथ वापस लौटे हैं! वे कल और आज दोपहर वर्किंग कमिटी की बैठक में शामिल नहीं हो सके. वे बारामुला से मेरे लिए कुछ फूल लेकर आए थे. कुदरत के इन उपहारों को देखकर मैं हमेशा खुश होता हूं. लेकिन आज लूट, आगजनी और खूनखराबे ने उस जमीन की खूबसूरती को बर्बाद कर दिया है. जवाहरलाल जम्मू भी गए थे. वहां भी सब ठीक नहीं है.

सरदार पटेल को श्री शामलदास गांधी और डेराभाई के अनुरोध पर जूनागढ़ जाना पड़ा जिन्होंने उनसे सलाह मांगी थी. जिन्ना और भुट्टो, दोनों नाराज हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि भारत सरकार ने उन्हें धोखा दिया है और वह जूनागढ़ पर संघ में शामिल होने के लिए दबाव बना रही है. यह हम सबका फर्ज है कि हम देश में शांति और भाईचारा स्थापित करने के लिए उनके दिलों से नफरत और शक दूर करें. अगर आप अपने भीतर ईश्वर की मौजूदगी महसूस नहीं करेंगे और अपने भीतर के छोटे-मोटे झगड़ों भुलाएंगे नहीं तो कश्मीर और जूनागढ़ में मिली सफलता व्यर्थ साबित होगी. दीवाली तब तक नहीं मनाई जा सकती जब तक आप उन सभी मुसलमानों को वापस को वापस नहीं लाते जो डर के मारे भागे हैं. पाकिस्तान भी वजूद में नहीं रह पाएगा अगर वह वहां से भागे हिंदुओं और सिखों के साथ भी ऐसा नहीं करता.

मैं आपसे वहीं कहूंगा जो मैं कल कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में कहने वाला हूं. गुरूवार से शुरू होने वाले नववर्ष में आप और सारा भारत प्रसन्न रहे. ईश्वर आपके हृदय को प्रकाशित करे ताकि आप न सिर्फ एक-दूसरे या भारत की बल्कि पूरे विश्व की सेवा कर सकें.