एनडीटीवी इंडिया का प्रसारण एक दिन के लिए रोकने का केंद्र सरकार का आदेश विवादों में घिरता जा रहा है. यह फैसला जिन तथ्यों पर आधारित है, उन पर सवाल उठने लगे हैं. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार चार जनवरी के प्रसारण में जिन दो आतंकियों से जुड़ी सूचना देने के लिए एनडीटीवी इंडिया पर सजा के तौर पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनके अस्तित्व के बारे में जांचकर्ता अभी तक किसी पुख्ता नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं.

इन आतंकियों को एक इमारत में छिपा बताया गया था जो जलकर खाक हो गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक इस इमारत से न तो दोनों आतंकियों के शव मिले थे और न ही हथियार व गोला-बारूद पाया गया था. पठानकोट एयरबेस आतंकी हमले में शामिल चार आतंकी शुरुआत में मारे गए थे. 16 मार्च 2016 को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद को बताया था कि इमारत की राख की फॉरेंसिक जांच से इमारत में दो आतंकवादियों के उसमें मौजूद होने की बात स्पष्ट हो गई है.

लेकिन द इंडियन एक्सप्रेस ने 21 मई की अपनी एक रिपोर्ट में फॉरेंसिक जांच पर सवाल उठाया था. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि जांच के नमूने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और इनमें मिलावट का भी संदेह है. यही नहीं, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हमले में शामिल आतंकियों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए जो नोटिस जारी किया था उसमें भी चार आतंकियों के फोटोग्राफ ही शामिल थे. एनआईए ने पठानकोट आतंकी हमले की जांच के लिए पाकिस्तान से आए जांचदल के साथ जो दस्तावेज साझा किए थे, उसमें चार आतंकियों का ही जिक्र था जो चार जनवरी से पहले मारे गए थे.

केबल टीवी नेटवर्क नियमन कानून की धारा-6(1)(पी) के तहत किसी आतंकी हमले का लाइव प्रसारण नहीं किया जा सकता. आतंकी हमला जारी रहने तक केवल आधिकारिक प्रवक्ता से मिली जानकारी ही दी जा सकती है. इस नियम का एनडीटीवी इंडिया ही नहीं, दूसरे न्यूज चैनलों ने भी पालन नहीं किया था जो आधिकारिक प्रवक्ता के इतर सूत्रों से मिली जानकारियों पर आधारित रिपोर्टें भी प्रसारित कर रहे थे. कई अन्य न्यूज चैनलों ने बेस के अंदर मौजूद साजो-सामान और अन्य सूचनाओं को अलग-अलग दिन प्रसारित किया था.

लेकिन ऐसा नहीं है कि ये कोई गोपनीय जानकारियां थीं. गूगल पर पठानकोट एयरबेस की हाई-रिज्योल्यूशन इमेज पहले से मौजूद है, जिसमें वह जगह साफ-साफ दिखाई देती है जहां एयरक्राफ्ट खड़े होते हैं. इंटरनेट पर पठानकोट एयरबेस से उड़ान भरने वाले एयरक्राफ्टों के बारे में कई लेख मौजूद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे में इस बात की संभावना बहुत कम रह जाती है कि आतंकी इन सूचनाओं के लिए किसी टीवी चैनल पर निर्भर रहे होंगे.