समाजवादी पार्टी अपनी 25वीं जयंती के मौके को भले ही अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए इस्तेमाल करने में सफल रही हो, लेकिन मंच एक होने के बावजूद पार्टी के बड़े नेताओं के बीच अनबन साफ दिखाई दी. शिवपाल ने अपने भाषण की शुरुआत में मुख्यमंत्री अखिलेश पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘कितना मेरा अपमान कर लेना, कितनी ही बार मुझे बर्खास्त कर देना. मैं जानता हूं कि मैंने अच्छा काम किया है.’ मुख्यमंत्री अखिलेश ने पिछले महीने शिवपाल को अपनी सरकार से बर्खास्त कर दिया था. मुख्यमंत्री बनने की लालसा से खुद को दूर बताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को चीजें आसानी से मिल जाती हैं और कुछ लोगों को बलिदान देकर भी नहीं मिलती हैं.

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के लिए अपनी कुर्बानी देने की बात करते हुए शिवपाल ने घुसपैठियों पर पार्टी के भीतर माहौल खराब करने का आरोप लगाया. उधर, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी का कहना था, ‘कुछ लोग सब सुनेंगे, लेकिन पार्टी बिगड़ने के बाद.’ साथ में उन्होंने यह भी कहा कि किसी दूसरे को परीक्षा देने की जरूरत नहीं है, वे इसके लिए तैयार हैं. कार्यक्रम में तलवार मिलने पर अखिलेश ने कहा, ‘आपने मुझे तलवार भेंट की है. तलवार दोगे तो चलाएंगे ही.’ उनके इस बयान को शिवपाल और उनके करीबी प्रजापति पर तंज माना जा रहा है.

इससे पहले अखिलेश यादव की विकास रथ यात्रा के उद्घाटन के मौके पर सपा ने एकजुटता दिखाने की कोशिश की थी. मुलायम सिंह ने अखिलेश के रथ को हरी झंडी दिखाई थी तो शिवपाल यादव ने उन्हें सफलता की शुभकामना दी थी. लेकिन, रामगोपाल यादव से जुड़े सवाल पर अखिलेश ने कहा था कि वे आगे के कार्यक्रमों में शामिल होंगे. पिछले महीने सपा ने रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया था. वे अखिलेश यादव का समर्थन कर रहे थे.

लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में जनता दल (सेक्यूलर) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, राम जेठमलानी, राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद और जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव भी शामिल हुए. इसे सपा की ओर से बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की कोशिश माना जा रहा है. इसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल होने वाले थे, लेकिन वे नहीं आए.