तुर्की में तख्तापलट के बाद चल कार्रवाई पर सरकार विरोधी नजरिया रखने वाले लोगों को दबाने का आरोप लग रहा है. तुर्की पुलिस ने शनिवार को वहां के सबसे प्रतिष्ठित अखबार जम्हूरियत के संपादक सहित नौ पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया. रॉयटर्स के मुताबिक इन पत्रकारों को सोमवार को हिरासत में लिया गया था लेकिन, शनिवार उन्हें ट्रायल के लिए औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया. जम्हूरियत को राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोऑन की आलोचना करने वाले कुछ अखबारों में गिना जाता है.

इन पत्रकारों पर तख्तापलट का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है. जांचकर्ताओं का कहना है कि अखबार पर कुर्द आतंकियों और अमेरिका में रहने वाले इस्लामिक धर्म गुरू फतेउल्लाह गुलेन के लिए अपराधों में शामिल होने का संदेह भी है. तुर्की सरकार गुलेन को तख्तापलट का साजिशकर्ता बता रही है. हालांकि, उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है.

तुर्की में 15 जुलाई की सैन्य तख्तापलट की कोशिश हुई थी, जो असफल कर दी गई थी. इसके बाद से अब तक 37,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं. एर्दोऑन सरकार की इस कार्रवाई को सरकार विरोधियों को दबाने की कोशिश बताया जा रहा है. तख्तापटल के बाद एर्दोऑन ने आपातकाल घोषित कर दिया था. इसके तहत कानून बनाने के लिए संसद की सहमति की जरूरत नहीं होती है.

यूरोपीय संघ के एक शीर्ष नेता ने पत्रकारों की गिरफ्तारी को अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ चेतावनी रेखा पार करने वाला कदम बताया है. तुर्की के पत्रकार संगठन ने बयान जारी कर कहा है कि जुलाई के बाद से 170 अखबारों, मैगजीनों, न्यूज चैनलों और समाचार एजेंसियों को बंद किया जा चुका है. इससे लगभग 2,500 पत्रकार बेरोजगार हो गए हैं.

बीबीसी के अनुसार जम्हूरियत अक्टूबर में ‘वैकल्पिक नोबल पुरस्कार’ जीतने वाले चार विजेताओं में शामिल रहा है. यह पुरस्कार निर्भीक खोजी पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की आजादी के प्रति समर्पण के लिए दिया जाता है. यह पिछले साल 'रिपोर्टर्स विथआउट बॉर्डर' की तरफ से फ्रीडम ऑफ प्रेस अवार्ड भी पा चुका है.