एनडीटीवी समूह ने अपने हिंदी चैनल पर रोक लगाने के आदेश को अदालत में चुनौती दी है. मिंट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के इस आदेश की संवैधानिकता और आदेश से जुड़े कानून के प्रावधानों को चुनौती दी गई है. चार दिन पहले मंत्रालय ने एनडीटीवी इंडिया को नौ नवंबर को अगले 24 घंटे के लिए प्रसारण बंद रखने का आदेश दिया था.

आदेश के मुताबिक चैनल पर यह प्रतिबंध जनवरी में हुए पठानकोट एयरबेस आतंकी हमले के समय संवेदनशील सूचना प्रसारित करने की वजह से लगाया है. इससे पहले एक अंतरमंत्रालयी समिति का कहना था कि चैनल के चार जनवरी के प्रसारण में केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम-2015 का उल्लंघन हुआ है. समिति के मुताबिक चैनल से प्रसारित सूचना का इस्तेमाल करके आतंकी न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को नुकसान पहुंचा सकते थे.

केबल टीवी नेटवर्क नियम के मुताबिक सुरक्षाबलों के आतंकरोधी अभियानों का लाइव प्रसारण नहीं किया जा सकता. इसमें कहा गया है कि जब तक अभियान पूरा नहीं हो जाता, प्रसारणकर्ता अधिकृत अधिकारी से जारी सूचना ही प्रसारित करेंगे. यह संशोधन पिछले साल किया गया है. इसके आधार पर यह पहला फैसला है.

मंत्रालय के इस आदेश पर संपादकों और मीडिया विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया आई है. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इस आदेश को प्रेस की आजादी का प्रत्यक्ष उल्लंघन बताया है. उसने कहा है कि यह आपातकाल के दिनों की याद दिलाता है. इसे प्रेस की आजादी पर हमला करार देते हुए मुंबई प्रेस क्लब ने सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है. उधर एनडीटीवी इंडिया का कहना है कि उसका प्रसारण दूसरे चैनलों की तुलना में कहीं ज्यादा संतुलित था.