काले धन पर चोट करने के मकसद से की गई मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक एक नई वजह से चर्चा में आ गई है. 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करके सरकार ने 2000 रुपये के जो नए नोट जारी किए हैं उनमें एक जगह छपाई की गलती हो गई है.

यह गलती नोट के पिछले हिस्से में वहां पर हुई है जहां पर 15 भाषाओं में मुद्रा का मूल्य लिखा जाता है. इसमें एक जगह दोन हजार रुपये छपा है जो सही है क्योंकि मराठी भाषा में दो हजार रुपए को दोन हजार रुपये ही लिखा और बोला जाता है और इस भाषा की लिपि भी देवनागरी है. लेकिन इससे दो स्थान पहले जहां कोंकणी भाषा में दोनि हजार रुपया लिखा जाना था वहां दोनि की जगह दोन ही छप गया है.

सवाल उठ रहा है कि अब क्या होगा. दो-तीन दिनों तक मुश्किलें झेलने के बाद 2000 के जो नोट लोगों को मिले हैं, क्या वे नहीं चलेंगे, या उन्हें वापस लिया जाएगा?

वैसे नोट या सिक्कों में ऐसी गलती होने पर उन्हें अमान्य घोषित करने और वापस लेने का चलन रहा है. इसी साल जनवरी में आरबीआई ने 30 हजार करोड़ रुपए की कीमत के गलत नोट छापने की बात मानी थी. यह गड़बड़ी हजार रुपए के नोटों में हुई थी जो सिल्वर सिक्योरिटी थ्रेड के बगैर छाप दिए गए थे. 30 करोड़ में से 20 करोड़ तो रिजर्व बैंक के पास ही थे, लेकिन 10 करोड़ नोट बाजार में जारी किए जा चुके थे. गलती का पता चलने के बाद आरबीआई और वित्त मंत्रालय ने फैसला किया कि इन नोटों को जला दिया जाए. बाकी नोटों को वापस लेने के निर्देश जारी किए गए थे.

बताया जा रहा है कि 500 और 1000 के नोट बदलने और उनकी जगह 2000 के नोट आने की इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों का खर्च आया है जिसका बोझ आखिरकार जनता की जेब पर ही पड़ना है. अब ऐसे में 2000 रु का नया नोट रद्द करने दोबारा छपवाना पड़ा तो यह बोझ और बढ़ना ही है.