दिल्ली हाईकोर्ट ने दवा कंपनियों को राहत देते हुए ‘फिक्स्ड डोज कॉम्बीनेशन’ (एफडीसी) दवाओं पर प्रतिबंध लगाने वाली केंद्र की अधिसूचना को खारिज कर दिया है. यह अधिसूचना इसी साल मार्च में जारी की गई थी. एफडीसी दो या इससे अधिक दवाओं का एक निश्चित अनुपात में मेल होता है. कोरेक्स, विक्स एक्शन-500, सेरेडॉन और डी कोल्ड टोटल जैसी दवाएं इसी वर्ग में आती हैं. केंद्र सरकार ने ऐसी 344 दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की थी. दवा कंपनियों ने इसकी वैधता को चुनौती दे दी थी.

गुरुवार को आए फैसले में जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ ने एफडीसी दवाओं पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के कदम को बेतरतीब बताया. अपने आदेश में उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया का भी सही से पालन नहीं किया.

सुनवाई के दौरान सरकार ने दलील दी थी कि इन दवाओं पर प्रतिबंध जनहित में लगाया गया है क्योंकि ये सेहत के लिए सुरक्षित नहीं हैं और दुनिया के अन्य देशों में भी इन पर रोक है. इस पर अदालत ने कहा कि सरकार औषधि और प्रसाधन अधिनियम की धारा-26 (ए) की शक्तियों का इस्तेमाल तभी कर सकती है जब कोई उत्पाद उपभोक्ता के लिए जोखिम पैदा कर रहा हो. दवा कंपनियों ने अपनी याचिकाओं में सरकार द्वारा धारा-26 (ए) की शक्तियों के इस्तेमाल को चुनौती दी थी.

वैसे दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च में ही इस अधिसूचना पर रोक लगा दी थी. मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने दो जून को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. खबरों के अनुसार देश में इस समय 2000 से ज्यादा एफडीसी दवाएं इस्तेमाल हो रही हैं.