मदर इंडिया, अंदाज़ और हमराज जैसी कई फिल्में हैं जिन्हें भारतीय नारी की महानता दिखाने के लिए जाना जाता है. लेकिन इन फिल्मों ने भारतीय नारियों के लिए और मुश्किलें पैदा कीं. कहीं न कहीं वे यह संदेश भी देती थीं कि स्त्रियों का सिर्फ इंसान होना अयोग्यता है, बल्कि उनकी न्यूनतम योग्यता देवी बने रहना है. सो वे सहती रहें और त्याग करती रहें. जाहिर है ऐसे में उनके लिए ‘एंग्री’ होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था. एंग्री होना सिर्फ यंग मैन के हिस्से आता था. व्यवस्था और समाज सुधारने के लिए हमारे हीरो को गुस्सा आने में भी 40 साल लगे.

लेकिन अमिताभ बच्चन को गुस्सा आने से करीब 40 साल पहले ही किसी ने सिर्फ हंटर लेकर असामाजिक तत्वों को तत्काल सजा देना शुरू कर दिया था. यह हंटर भी हंटरवाले के पास नहीं हंटरवाली के पास था और ये हंटरवाली थीं मेरी एन एवांस जिन्हें दुनिया नाडिया के नाम से जानती है.

मेरी एवांस का जन्म 1908 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में हुआ. ब्रिटिश सैनिक पिता हर्बर्ट और ग्रीक मां मार्गरेट की बेटी मेरी अपने पिता के भारत तबादले की वजह से 1913 में मुंबई पहुंचीं. पेशावर में रहते हुए उन्होंने घुड़सवारी सीखी. बाद में उन्होंने बैले नृत्य सीखा और एक लंबे समय तक सर्कस में काम भी किया. मेरी ने सारे देश की यात्रा की और इस वजह से उन्हें यहां की भाषा और संस्कृति को समझने में सहूलियत हुयी.

डांस और सर्कस दो ऐसी विशेष योग्यताएं थी जो फ़िल्मी परदे पर हंटरवाली बनने में मेरी के काम आने वाली थीं.यह 1933 में हुआ जब जेबीएच और होमी वाडिया ने उन्हें अपनी फिल्म ‘देश दीपक’ में मौका दिया. कहते हैं कि जब जेबीएच वाडिया ने मेरी को फिल्म में लेने से पहले उनसे पूछा कि वे फिल्म में क्या करना चाहेंगी तो उनका कहना था, ‘आई विल ट्राई एवरिथिंग वन्स’. फ़िल्मी परदे पर एक नयी जिंदगी शुरू करने से पहले एक ज्योतिषी की सलाह पर उन्होंने अपना नाम नाडिया रख लिया.

डांस और सर्कस दो ऐसी विशेष योग्यताएं थी जो फ़िल्मी परदे पर हंटरवाली बनने में मेरी के काम आने वाली थीं. यह 1933 में हुआ

इसके बाद 1935 में फिल्म हंटरवाली आई जिसमें नायिका मास्क लगाकर और अपने घोड़े -जिसका नाम पंजाब का बेटा था- पर बैठकर हंटर के साथ इंसाफ करने के लिए निकल पड़ी थी. ये वो दौर था जब फ़िल्मी परदे पर नायिका सिर्फ गाने के लिए होती थी और इसलिए भी कि नायक को किसी से प्यार हो सके. इसी दौर में नाडिया ने तकरीबन 50 फिल्मों में काम किया जिसमें एक तरफ उसने ज़मींदारों के खिलाफ लड़ाई की तो दूसरी ओर औरतों की शिक्षा और आज़ादी की बात की. यह बात 1940 में आई फिल्म डायमंड क्वीन के एक डायलॉग ‘अगर हमें देश की आज़ादी चाहिए तो पहले देश की महिलाओं को आज़ाद करना होगा’ से समझी जा सकती है.

नाडिया की फिल्में मध्य एशिया के देशों में भी गईं और इस तरह वे विदेशों में पहचानी जाने वाली भारत की पहली फिल्म कलाकार बनीं. नाडिया उन्हें कई फिल्मों में निर्देशित करने वाले होमी वाडिया से शादी करना चाहती थी. लेकिन कट्टर पारसी परिवार से ताल्लुक रखने वाले होमी की मां को यह रिश्ता मंजूर नहीं था. होमी और नाडिया दोनों ने 1961 तक इंतजार किया और मां के देहांत के बाद शादी की. 1968 में नाडिया ने अपनी आखिरी फिल्म खिलाड़ी में काम किया. नौ जनवरी 1996 में 88 साल की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा.

नाडिया ने उस दौर में हंटर से इंसाफ किया जब फ़िल्मी परदे पर नायिका सिर्फ गाने के लिए होती थी और इसलिए भी कि नायक को किसी से प्यार हो सके

मशहूर फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल ने ने एक बार कहा था कि नाडिया न होतीं तो अमिताभ बच्चन भी न होते. शायद सलीम-जावेद की प्रेरणा में नाडिया का भी स्थान हो. लेकिन नाडिया ने अमिताभ बच्चन के उलट सड़क पर फैसला करने में अंततः क़ानून का ही सहारा लिया. उसने किसी की हत्या नहीं की.

आज तक विदेशी अभिनेत्रियों को देसी फिल्मों में पैर जमाने के लिए अपनी विदेशी पहचान को ज्यादा से ज्यादा छिपाना पड़ता है. लेकिन नाडिया की विदेशी पहचान उनकी ताकत बन गई थी. एक भारतीय नारी को हंटर से इंसाफ करते देखना भारतीय पुरुषों के लिए ज़्यादा मुश्किल होता. शायद इसीलिए आज तक हंटरवालियां खलनायिका ही बन कर आ रही हैं. तब लोगों के लिए यह देखना भी संतोषजनक था कि एक गोरी मेम भारतीयों के अधिकारों के लिए लड़ रही है.

श्याम बेनेगल ने ने एक बार कहा था कि नाडिया न होती तो अमिताभ बच्चन भी न होते. शायद सलीम जावेद की प्रेरणा में नाडिया का भी स्थान हो

विदेशी होने और मारधाड़ वाली फिल्मों में काम करने की वजह से भारतीय फिल्म पत्रकारिता और इतिहासकारों ने नाडिया को वो जगह नहीं दी जिसकी वे हकदार थीं. इतिहासकारों ने उन्हें अपने समय का अमिताभ बच्चन नहीं बल्कि मिथुन चक्रवर्ती ही माना. नाडिया के पोते और मशहूर डांस डायरेक्टर शियामक डावर ने एक बार उन्हें याद करते हुए बताया था कि कैसे कभी एंजेलिना जोली ने शाहरुख खान से कहा था कि नाडिया पर अगर कोई फिल्म बने तो वे उसमें मुख्य भूमिका निभाना चाहेंगी.

इतिहासकारों ने तो नाडिया को भुलाया लेकिन इतिहास ने खुद को दोहराया. जेबीएच के पोते रियाद विंसी वाडिया ने नाडिया पर एक डाक्यूमेंट्री बनायी. यह ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी सहित कई देशों में दिखाई गई. ऑस्ट्रेलिया ने नाडिया को भारतीय फिल्मों की पहली एक्शन स्टार कहा और उनकी फिल्मों का एक फेस्टिवल भी आयोजित किया.

नाडिया ऑस्ट्रेलिया से भारत आई थीं. देश में भुला दिए जाने और विदेश में याद किये जाने के बाद वे एक बार फिर वापस भारत आ रही हैं. विशाल भारद्वाज की आने वाली फिल्म ‘रंगून’ में कंगना रनौट हंटरवाली के किरदार में दिखेंगी. हाल ही में रिलीज हुए ट्रेलर में बहुत हद तक यह पात्र नाडिया से प्रेरित नजर आ रहा है.