दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में असोसिएट प्रोफेसर अमित सेनगुप्ता ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनका कहना है कि उन्होंने यह फैसला संस्थान के कामकाज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्यों के हस्तक्षेप करने की वजह से लिया है. पूर्व पत्रकार अमित सेनगुप्ता ने यह इस्तीफ़ा आईआईएमसी प्रशासन के उस निर्णय के बाद दिया जिसके तहत उनका तबादला दिल्ली से उड़ीसा के ढेंकानाल में कर दिया गया था. सेनगुप्ता का आरोप है कि प्रशासन का यह निर्णय राजनीति से प्रेरित है और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के द्वारा थोपा गया है जो कि आईआईएमसी को फंड मोहैय्या कराता है.

सेनगुप्ता के मुताबिक उन्होंने हाल ही के जेएनयू विवाद और रोहित वेमुला मामले में कुछ टिप्पणियां की थी जिस कारण से उनके साथ ऐसा किया गया है. उनका कहना है, 'सरकार ने मुझे रोहित का समर्थन करने की वजह से निशाना बनाया है, यह निर्णय आरएसएस के प्रभाव में आकर लिया गया है जोकि मेरी स्वतंत्र सोच पर हमला है. लेकिन, मैं हार नहीं मानूंगा, मैं हमेशा रोहित के लिए आवाज उठाता रहूंगा.'

वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सेनगुप्ता के आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है. मंत्रालय के एक अधिकारी अनुराग मिश्रा के मुताबिक सेनगुप्ता के तबादले का निर्णय किसी के प्रभाव में आकर नहीं लिया गया है, यह निर्णय कार्यकारी परिषद ने लिया था जिसका उन्हें पालन करना चाहिए.'

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव 4 अप्रैल से, नतीजे 19 मई को

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पांच राज्यों - असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुदुच्चेरी और केरल - में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि पांचों राज्यों में 4 अप्रैल से 16 मई के बीच मतदान कराया जाएगा जबकि सभी राज्यों में मतगणना 19 मई को होगी. उनके अनुसार असम में दो चरणों में 4 और 11 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि केरल, तमिलनाडु और पुदुच्चेरी में 16 मई को मतदान कराया जाएगा. पश्चिम बंगाल में कुल छह चरणों में मतदान होगा. यहां पहले चरण का मतदान 4 अप्रैल को और अंतिम यानी छठे चरण 5 मई को होगा.

दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होंगे

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और फिल्म निर्माता मनोज कुमार को प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया है कि मनोज कुमार को 47वें दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है. दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारत में सिनेमा से जुड़ा सर्वोच्च सम्मान माना जाता है. 78 वर्षीय मनोज कुमार को इस सम्मान के रूप में एक सोने का कमल, 10 लाख रुपये नकद और एक शॉल भेंट की जाएगी. 1960 में फिल्म कांच की गुड़िया से बतौर अभिनेता अपने फ़िल्मी करियर की शुरूआत करने वाले मनोज कुमार को विशेष रूप से उनकी देशभक्तिपरक फिल्मों के लिए जाना जाता है. उन्होंने शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान और क्रांति जैसी सुपरहिट फ़िल्में दीं थीं. अपनी फिल्म उपकार के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके मनोज कुमार को 1992 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है.

चुनाव आते ही तमिलनाडु में राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई पर राजनीति शुरू

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को देखते हुए एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई को लेकर राजनीति शुरू हो गयी है. राज्य की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके और उसके विरोधी डीएमके दोनों ने ही केंद्र से मांग की है कि राजीव गांधी हत्याकांड में सज़ा पाए सात लोगों की सजा कम कर दी जाए. तमिलनाडु सरकार ने गृहमंत्रालय को एक चिट्ठी लिखकर कहा है, 'सातों सज़ायाफ़्ता क़ैदियों की याचिका पर गंभीरता से विचार करने के बाद तमिलनाडु सरकार ने फ़ैसला लिया है कि उनकी सज़ा कम कर दी जाए क्योंकि वे जेल में 24 साल काट चुके हैं.'

यह खबर सार्वजनिक होते ही डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने भी केंद्र सरकार से मांग की है कि वह तमिलनाडु सरकार की चिट्ठी के बाद दोषियों की रिहाई के लिए ज़रूर क़दम उठाए. बता दें कि 2014 में तमिलनाडु सरकार ने राजीव गांधी की हत्या के दोषियों को छोड़ने का फैसला किया था. तब केंद्र की यूपीए सरकार यह मामला सुप्रीम कोर्ट ले गई थी. कोर्ट ने यह कहते हुए जयललिता सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी कि जिन मामलों की जांच में केंद्रीय एजेंसियां जुड़ी हों या जिनमें दोषियों को केंद्रीय कानून के तहत सज़ा हुई हो, उनमें सजा माफी का अधिकार केंद्र सरकार का है, राज्य सरकार का नहीं.