पनामा स्थित मशहूर लॉ फर्म मोसाक फोंसेका के लीक हुए एक करोड़ से भी ज्यादा दस्तावेज दुनिया भर में भूचाल ले आए हैं. टैक्स बचाने के लिए स्वर्ग कहे जाने वाले पनामा से निकले इन दस्तावेजों से दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों का नाम जुड़ रहा है. इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से लेकर फुटबाल स्टार लियोनेल मेसी तक तमाम बड़े नाम शामिल हैं.

पनामा पेपर्स के नाम से चर्चित हो रहे इस प्रकरण की लपेट में भारत की भी 500 से ज्यादा शख्सियतें आती दिख रही हैं. इनमें सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से लेकर डीएलएफ के मालिक केपी सिंह तक कई लोग हैं. यानी यह प्रकरण बड़ी बहस और मुश्किल सवालों का सबब बन सकता है.

मोसाक फोनसेका का नाम ऐसी कंपनी के रूप में मशहूर है जो दुनिया भर में फैले अपने अमीर क्लाइंटों के लिए विदेशों में थोक के भाव कंपनियां बनाने में माहिर है.

मोसाक फोंसेका का नाम ऐसी कंपनी के रूप में मशहूर है जो दुनिया भर में फैले अपने अमीर क्लाइंटों के लिए विदेशों में थोक के भाव कंपनियां बनाने में माहिर है. टैक्स बचाने के मकसद से बनाई गई इन कंपनियों को शेल या शेडो कंपनी भी कहा जाता है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक पड़ताल के मुताबिक लीक हुए दस्तावेज उन लोगों के बारे में बताते हैं जिन्होंने मोसाक फोनसेका को भुगतान किया और इसके एवज में दुनिया की उन जगहों पर अपनी कंपनियां बनवाईं जिन्हें टैक्स बचाने के लिए स्वर्ग कहा जाता है और जहां ऐसे ग्राहकों का नाम गोपनीय रखा जाता है.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उसने आठ महीने लंबी अपनी पड़ताल में 36 हजार से भी ज्यादा फाइलें खंगाली हैं. इस दौरान उसे कई बड़े नाम मिले हैं जिन्होंने मोसाक फोंसेका का सेवाएं लीं. इनमें फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या बच्चन, डीएलएफ के मालिक केपी सिंह और उनके परिवार के नौ सदस्य, अपोलो टायर्स और इंडिया बुल्स के प्रमोटर और उद्योगपति गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी भी शामिल हैं. इस सूची में दो राजनेता भी हैं. पश्चिम बंगाल के शिशिर बाजोरिया और लोकसत्ता पार्टी की दिल्ली इकाई के पूर्व मुखिया अनुराग केजरीवाल. उद्योगपति बाजोरिया दो साल पहले सीपीएम छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे.

2003 से पहले भारतीयों को देश के बाहर कंपनी बनाने की इजाजत नहीं थी. पड़ताल के मुताबिक ज्यादातर मामलों में यह काम इससे बहुत पहले हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक पनामा पेपर्स की पड़ताल से उन कई सौदों की भी जानकारी मिलती है जिनके बारे में अब तक किसी को पता नहीं था. इनमें से कुछ सौदों में तो सरकार भी शामिल है.

2003 से पहले भारतीयों को देश के बाहर कंपनी बनाने की इजाजत नहीं थी. पड़ताल के मुताबिक ज्यादातर मामलों में यह काम इससे बहुत पहले हुआ है.

इंटरनेशनल कंसॉर्टियम ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स के मुताबिक इनमें से कई सौदे कानून के हिसाब से गलत नहीं हैं, लेकिन जिनका नाम इनसे जुड़ रहा है उनके लिए ये कई तरह के नुकसान का सबब हो सकते हैं. यह स्वाभाविक भी है क्योंकि इनमें से ज्यादातर लोग सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं.

व्लादिमीर पुतिन, शी जिनपिंग, नवाज शरीफ, जैकी चैन, लियोनेल मेसी और अमिताभ बच्चन जैसे नामों के लिहाज से देखें तो कहा जा सकता है कि विशालता के मामले में पनामा पेपर्स लीक मामला 2010 के विकीलीक्स प्रकरण से भी आगे निकलता लग रहा है. विकीलीक्स प्रकरण के तहत अफगानिस्तान और इराक में लड़ाई से जुड़ी अमेरिकी सेना की पांच लाख गोपनीय फाइलें और दो लाख 50 हजार डिप्लोमेटिक केबल्स लीक हो गए थे.

उधर, मोसाक फोंसेका ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह लीक एक अपराध है. उसने इसे पनामा पर हमला भी बताया है. कंपनी के संस्थापकों में शामिल रैमन फोंसेका के मुताबिक कुछ देशों को यह बात रास नहीं आती कि कंपनियों को आकर्षित करने में मामले में मोसाक फोंसेका उन्हें कड़ी टक्कर देती है. पनामा सरकार का भी इस पर बयान आया है. उसका कहना है कि कोई कानूनी कदम उठाए जाने की स्थिति में वह फोंसेका को हर जरूरी सहायता देगी.