अमिताभ बच्चन के लिए यह साल अभी तक सही जा रहा था. पद्मविभूषण से लेकर सर्वेश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने तक बॉलीवुड के इस महानायक के साथ जुड़ती उपलब्धियों की सूची लंबी होती जा रही थी. लेकिन पनामा पेपर्स प्रकरण ने इस सिलसिले को थामकर उसे उल्टी दिशा में मोड़ दिया है. पनामा से चलने वाली एक मशहूर लॉ फर्म मोसाक फोंसेका के एक करोड़ से भी ज्यादा दस्तावेजों के लीक होने के बाद दुनिया की तमाम नामचीन हस्तियों की तरह अमिताभ बच्चन को भी कई असहज करने वाले सवालों का सामना करना पड़ रहा है.

कुछ ही दिन पहले अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखी एक टिप्पणी में कहा था कि निर्दोष होने के बावजूद उन्हें बोफोर्स घोटाले की पीड़ा से उबरने में 25 साल लग गए. एक स्वीडिश जांच संस्था ने इस मामले में उन्हें 2012 में क्लीन चिट दे दी थी. बच्चन का कहना था कि इसके बाद जब उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्हें समझ नहीं आया कि क्या कहा जाए. उनके शब्द थे, 'क्या वे 25 वर्ष की पीड़ा को मिटा सकते हैं? क्या वे बदनामी के बदनुमा रंगों को मिटा सकते हैं?’

कुछ ही दिन पहले अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखी एक टिप्पणी में कहा था कि निर्दोष होने के बावजूद उन्हें बोफोर्स घोटाले की पीड़ा से उबरने में 25 साल लग गए.

पनामा पेपर्स प्रकरण के बाद भी अमिताभ के सामने कुछ वैसे ही पीड़ादायक सवाल खड़े होते दिख रहे हैं. यह स्वाभाविक भी है. मोसाक फोंसेका के लीक हुए दस्तावेज बता रहे हैं कि 1995 में एबीसीएल लांच करने से पहले बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन कम से कम चार विदेशी कंपनियों से निदेशक के तौर पर जुड़े हुए थे. नवंबर 1993 में बनी ये चारों कंपनियां टैक्स बचाने के लिए स्वर्ग कहे जाने वाले देशों में थीं. इनमें से एक सी बल्क शिपिंग कंपनी लिमिटेड ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में थी और बाकी बहामास में, जिनके नाम थे - लेडी शिपिंग लिमिटेड, ट्रेजर शिपिंग लिमिटेड और ट्रैंप शिपिंग लिमिटेड. दिलचस्प बात यह है कि इन तीन कंपनियों की अधिकृत पूंजी पांच से 50 हजार डॉलर के दायरे में ही थी लेकिन ये करोड़ों रु के समुद्री जहाजों का कारोबार करती थीं.

अमिताभ बच्चन इन कंपनियों के प्रबंध निदेशक भी थे. दूसरे निदेशकों में कॉरपोरेट और वित्तीय सेवाएं देने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे. इन चारों कंपनियों के संस्थापक निदेशकों के नाम उमेश सहाय और डेविड मिखाएल पेट थे जो अमेरिका के न्यूजर्सी स्थित सिटी मैनेजमेंट लिमिटेड नामक एक कंपनी से जुड़े थे. हर कंपनी के बोर्ड की पहली बैठक में ही अमिताभ बच्चन को निदेशक नियुक्त कर दिया गया था.

15 दिसंबर 1994 को बहामास स्थित ट्रैंप शिपिंग लिमिटेड ने जेद्दाह की एक कंपनी डाइको के साथ एक निवेश समझौते पर दस्तखत किए. मोसाक फोंसेका के एक दस्तावेज के मुताबिक डाइको ने ट्रैंप को कुल मिलाकर 17.5 लाख डालर की रकम दी थी. ट्रैंप शिपिंग लि. के पास पांच हजार डॉलर की अधिकृत पूंजी थी. दस्तावेज बताते हैं कि 1997 में अमिताभ बच्चन ने कंपनी के दूसरे निदेशकों के साथ बोर्ड से इस्तीफा दे दिया. मोसाक फोंसेका ने विकल्प के तौर पर कंपनी को दूसरे निदेशक उपलब्ध करवाए. दस्तावेज ये भी बताते हैं कि उसी साल नवंबर में कंपनी ने एमवी मैट्ज ट्रैंप नाम का एक जहाज 20 लाख डॉलर में बेचा था.

अगर अमिताभ बच्चन को लगता था कि भारत में व्यापार करना मुश्किल है तो वे उस समय अमेरिका जैसे किसी देश में भी तो यह काम कर सकते थे जिसके वे ग्रीन कार्ड होल्डर रह चुके हैं

मशहूर अदाकारा और अमिताभ बच्चन की बहू ऐश्वर्या राय बच्चन भी इस मामले में घिरती दिख रही हैं. दस्तावेज बताते हैं कि ऐश्वर्या, उनके पिता कृष्णा राय, उनकी मां वृंदा राय और भाई आदित्य राय मई 2005 में ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्स में स्थित एक कंपनी एमिक पार्टनर्स लिमिटेड के निदेशक बनाए गए थे. जून 2005 में बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास करके ऐश्वर्या का दर्जा बदलकर शेयरहोल्डर कर दिया. उसी साल जुलाई में मोसाक फोंसेका के स्टाफ की अंदरूनी मेलों में यह जानकारी दर्ज है कि कंपनी के एक हिस्सेदार ने रिकॉर्डों में अपना नाम ऐश्वर्या राय से बदलकर ए राय करने का अनुरोध किया है. 2008 यानी ऐश्वर्या की शादी के एक साल बाद यह कंपनी बंद कर दी गई.

इस मामले में अब अमिताभ बच्चन पर जो सवाल उठाये जा सकते हैं उनमें से पहला तो यही है कि उन्होंने ऐसी जगह से व्यापार करने का फैसला क्यों किया जिन्हें टैक्स बचाने वालों का स्वर्ग कहा जाता है. अगर उन्हें लगता था कि भारत में व्यापार करना मुश्किल है तो वे उस समय अमेरिका जैसे किसी देश में भी तो यह काम कर सकते थे जिसके वे ग्रीन कार्ड होल्डर रह चुके हैं. इसके अलावा एक सवाल यह भी है कि बहुत कम पूंजी वाली उनकी कंपनियों से लोग इतने बड़े-बड़े सौदे क्यों कर रहे थे, वह भी तब जब उऩकी कंपनियां बेहद नई थीं और अमिताभ बच्चन भी आज की तरह इतने बड़े ग्लोबल आइकॉन नहीं थे. इसके अलावा ऐश्वर्या राय द्वारा अपने नाम छुपाने के भी कुछ निहितार्थ तो निकाले ही जा सकते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक अमिताभ बच्चन या उनके परिवार से किसी ने अब तक इस मामले के संबंध में ईमेल्स के जरिये भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया है. उधर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस पूरे खुलासे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. भारतीय उद्योग परिसंघ के एक आयोजन में जेटली ने कहा कि सरकार द्वारा विदेशों में मौजूद अघोषित संपत्ति की घोषणा का मौका दिए जाने के बावजूद जिसने इसका फायदा नहीं उठाया उसे यह जोखिम बहुत महंगा पड़ने वाला है.