पनामा स्थित मशहूर लॉ फर्म मोसाक फोंसेका के लीक हुए दस्तावेजों में 500 भारतीयों के नाम सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. केंद्र सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री के आदेश पर टैक्स और विदेशी मुद्रा के लेनदेन से जुड़े विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है, जो कि वित्तीय अपराधों की जांच करने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर इनमें से प्रत्येक मामले की जांच करेगी. वहीं, काले धन मामले की जांच कर रही एसआईटी ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए इसकी जांच शुरू कर दी है.

पनामा की मोसाक फोंसेका दुनिया भर के अपने क्लाइंटों के लिए विदेशों में टैक्स बचाने के मकसद से कंपनियां बनाने में माहिर है. इस कंपनी के लीक हुए दस्तावेज उन लोगों के बारे में बताते हैं जिन्होंने इस कंपनी को पैसे देकर दुनिया के उन देशों में अपनी कंपनियां बनवाईं जिन्हें टैक्स बचाने के लिए स्वर्ग कहा जाता है. इस मामले से जुड़े जिन भारतीयों के नाम सामने आए हैं उनमें अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, डीएलएफ के मालिक केपी सिंह और उद्योगपति गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी भी शामिल हैं.

जेल में बंद शहाबुद्दीन को आरजेडी कार्यकारिणी में शामिल करने पर राजनीति गरमाई

बिहार में रविवार को सत्ताधारी आरजेडी के द्वारा पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन को शामिल करने पर राजनीति गरमा गई है. सोमवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू प्रसाद यादव के इस फैसले पर निशाना साधते हुए कहा, 'शहाबुद्दीन सजायाफ्ता अपराधी हैं, वह न लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं और न ही पंचायत चुनाव. लेकिन, लालू का लाड़ला होने की वजह से उन्हें आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है.' उन्होंने आरजेडी प्रमुख से इस फैसले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है. उधर, आरजेडी नेता राबड़ी देवी ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें पहले अपनी गिरेबां में झांककर देखना चाहिए और अपना घर संभालना चाहिए. इस समय बिहार की सिवान जेल में बंद शहाबुद्दीन हत्या सहित कई आपराधिक मामलों में सजा काट रहे हैं.

दस सिख तीर्थयात्रियों को आतंकी बताकर गोली मारने वाले 47 पुलिसवालों को उम्रकैद

यूपी के पीलीभीत में 25 साल पहले फर्जी एनकाउंटर करने के दोषी 47 पुलिसकर्मियों को लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. 1991 में जब सिख तीर्थ यात्री बिहार के पटना साहिब और महाराष्ट्र के हुजूर साहिब के दर्शन कर वापस लौट रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें पीलीभीत के करीब स्थित जंगलों में ले जाकर गोली मार दी थी. उस समय पुलिस ने इन लोगों को आतंकवादी बताया था. लेकिन, सच्चाई सामने आने के बाद इस मामले में 57 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 10 की बीते सालों में मौत हो चुकी है. इन लोगों पर यह आरोप भी है कि इन्होने पुरस्कार पाने के मकसद से ये हत्याएं की थीं.

अदालत का फैसला आने के बाद इस मामले में पीड़ितों का केस लड़ रहे हरजिंदर सिंह ने कहा कि वे इस फैसले से खुश नहीं हैं क्योंकि वे इन लोगों के लिए फांसी की सजा चाहते थे. वे इस फैसले पर सवाल उठाते हुए यह भी कहते हैं कि इतना बड़ा हत्याकांड बिना एसपी, डीआईजी और आईजी स्तर के अफ़सरों के आदेश के बिना संभव ही नहीं है. लेकिन, सीबीआई ने फिर भी तीनों बड़े अधिकारियों के नाम अभियुक्तों की सूची से बाहर कर दिए. दरअसल, सीबीआई ने इस मामले में इंस्पेक्टर स्तर तक के पुलिसकर्मियों को ही अभियुक्त बनाया है.