ईरान ने एक बार फिर अमेरिका को कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि वह अपना मिसाइल कार्यक्रम बंद करने को लेकर किसी से कोई समझौता या बातचीत नहीं करेगा. उसका कहना है कि उसका यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसलिए वह इस मुद्दे पर किसी का हस्तक्षेप नहीं चाहता. ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही है. जरीफ ने आगे कहा कि अमेरिका अच्छे से जानता है कि ईरान की मिसाइलें आज चर्चा का विषय नहीं हैं. उनके मुताबिक अगर अमेरिका हथियारों को लेकर वाकई गंभीर है, तो वह पहले इजरायल और सऊदी अरब को बेचे जाने वाले उन हथियारों की बिक्री पर रोक लगाए जिनका इस्तेमाल करके यमन और फिलिस्तीन के नागरिकों को मारा जा रहा है.

इससे पहले गुरुवार को अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा था कि अमेरिका ईरान के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए नए कदम उठाने को तैयार है. दरअसल, अमेरिका ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा मानता है और वह इसे लेकर कई बार यूएन से शिकायत भी कर चुका है. जबकि ईरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों और इजरायल के खतरे से बचने के लिए है.

यूक्रेन में तीन भारतीय छात्रों पर हुए हमले में दो की मौत

रविवार को यूक्रेन में तीन भारतीय छात्रों पर हुए हमले में दो की मौत हो गई है. सोमवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि यूक्रेन की उझगोरोड़ मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले तीन छात्रों पर हुए हमले में छात्र प्रणव शांडिल्य और अंकुर सिंह की मौत हो गई है जबकि गंभीर रूप से घायल तीसरे छात्र इन्द्रजीत चौहान का इलाज चल रहा है.

मंत्रालय के अनुसार स्थानीय पुलिस ने इन्द्रजीत के बयान के आधार पर तीन हमलावरों को उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वे यूक्रेन की सीमा पार करने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस ने हमलावरों से तीनों भारतीय छात्रों के पासपोर्ट और हमले में इस्तेमाल हुआ चाक़ू बरामद कर लिया है. अधिकारियों के मुताबिक प्रणव शांडिल्य उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर, अंकुर सिंह गाज़ियाबाद और इन्द्रजीत चौहान आगरा के रहने वाले हैं. विदेश मंत्रालय के अनुसार यूक्रेन के भारतीय दूतावास ने पीड़ितों के शवों को भारत लाने की तैयारी शुरू कर दी है.

यमन मे हूती विद्रोही युद्धविराम का पालन करने को राजी हुए

यमन में सरकार और विद्रोही दोनों संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम का पालन करने को राजी हो गए हैं. जहां यमन की सरकार के सहयोगी और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने पहले ही इस युद्ध विराम को मानने की घोषणा कर दी थी. वहीं, रविवार को ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी सोमवार से शुरू हो रहे युद्धविराम को सम्मान देने की बात कही है. यमन में यूएन के विशेष राजदूत इस्माइल ओल्द शेख अहमद ने दोनों गुटों के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस वक्त यह समझौता बेहद जरूरी है क्योंकि यमन और अधिक जिंदगियों का नुकसान सहन नहीं कर सकता है. बता दें कि यूएन इससे पहले भी कई बार यमन में युद्धविराम लागू करने और समझौता कराने की असफल कोशिश कर चुका है. यमन में पिछले करीब दो साल से जारी हिंसा में अब तक छह हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और करीब 20 लाख नागरिक विस्थापित हुए हैं.