पिछले कुछ सालों से चिलचिलाती धूप में बंजर जमीन पर आसमान को निहारते किसानों की तस्वीर दिखना एक आम बात हो गई है. लेकिन, इस बार के मानसून में किसानों की यह तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती है. दरअसल, दो साल की बेरुखी के बाद इस साल बादलों के जमकर बरसने के आसार हैं. देश में मौसम की भविष्यवाणी करने वाली निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी स्काईमेट का मानना तो यही है. सोमवार को इस बार के मौसम की भविष्यवाणी करते हुए स्काईमेट ने कहा है कि इस सीजन में देश में मॉनसूनी बारिश औसत से ज्यादा होने की संभावना है.

स्काइमेट के मुताबिक इस बार की मानसूनी बारिश दीर्घावधि औसत (एलपीए) की 105 फीसदी रहने की संभावना सबसे ज्यादा है. एलपीए 1951 से लेकर 2000 तक जून से सितंबर के दौरान हुई बारिश का औसत है जिसकी मात्रा 887 मिमी है.

स्काईमेट के मुताबिक सामान्य के मुकाबले 110 फीसदी से ज्यादा बारिश होने से देश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है लेकिन इसकी संभावना मात्र 20 फीसदी ही है

स्काईमेट के अनुसार इस साल देश में औसत से 5-10 फीसदी ज्यादा बारिश होने की संभावना तो 35 फीसदी है जबकि इस साल सूखे की संभावना सिर्फ पांच फीसदी ही है. संस्था के अनुसार 30 फीसदी संभावना इस बात की भी है कि मानसून की मात्रा सामान्य ही रहे और 10 फीसदी संभावना बारिश के सूखे और सामान्य स्थिति के बीच यानी सामान्य से कम रहने की है. वैसे स्काईनेट के मुताबिक सामान्य के मुकाबले 110 फीसदी से ज्यादा बारिश होने से देश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है लेकिन इसकी संभावना मात्र 20 फीसदी ही है. यानी कि मोटे तौर पर कहें तो इस साल 85 फीसदी संभावना बारिश के सामान्य या उससे ज्यादा रहने की है.

स्काईमेट ने हर महीने होने वाली बारिश का अंदाजा भी लगाया है. इसके अनुसार जून में सामान्य की 90 प्रतिशत, जुलाई में 105 और सितंबर में 115 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है. संस्था के विशेषज्ञों ने इसका कारण भी बताया है. उनके अनुसार, इस बार मई के आखिर तक मॉनसून के केरल के दक्षिणी तट तक पहुंचते ही अल नीनो का असर घटेगा जिस कारण भारत के पश्चिमी तट और मध्य भागों में पिछले सालों के मुकाबले काफी अच्छी बारिश होगी. अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने की घटना को कहा जाता है जिससे एशियाई क्षेत्र में कम बारिश की स्थिति पैदा होती है.

सरकार को औसत से ज्यादा मॉनसूनी बारिश से अर्थव्यवस्था में उछाल की उम्मीद है, क्योंकि इससे किसानों की स्थिति बेहतर होगी और कई कन्जयूमर गुड्स की मांग बढ़ेगी

स्काईमेट की इस भविष्यवाणी ने सूखे की मार से त्रस्त किसानों के साथ-साथ सरकार का भी चेहरा खिला दिया है. केंद्र सरकार ने इस घोषणा के बाद मॉनसून के सामान्य रहने का अनुमान जताते हुए राज्यों को निर्देश दिया कि वे जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन में फसल का रकबा और उत्पादन बढ़ाने की योजना पर काम शुरू करें और खरीफ की बुवाई के लिए बीज, खाद और अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें.

सरकार को औसत से ज्यादा मॉनसूनी बारिश से अर्थव्यवस्था में उछाल की उम्मीद है, क्योंकि इससे किसानों की स्थिति बेहतर होगी और कई कन्जयूमर गुड्स की मांग बढ़ेगी. भले ही देश की 2 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में खेती का योगदान महज 14 प्रतिशत हो, लेकिन खेती पर देश की दो-तिहाई आबादी निर्भर करती है और अच्छे मानसून से इनकी आर्थिक स्थिति तो सुदृढ होगी ही साथ ही खाद्य उत्पादों की कीमतें भी नियंत्रण में रहेंगी.

पिछले साल स्काईमेट का सामान्य से अधिक बारिश का अनुमान सही साबित नहीं हो पाया था इस वजह से महाराष्ट्र सरकार ने इस बार क्लाउड सीडिंग (बादलों का बीजारोपण) करने की योजना बनाई है

हालांकि, स्काईमेट की इस भविष्यवाणी पर आंख मूंद कर भरोसा भी नहीं किया जा सकता. पिछले साल उसने सामान्य के मुकाबले 102 फीसदी बारिश होने की संभावना जताई थी. उसने भारतीय मौसम विभाग के अनुमानों को पूरी तरह से खारिज करते हुए यहां तक कह दिया था कि 'बुरी से बुरी परिस्थितियों में भी हमारा मानना है कि मॉनसून सामान्य से केवल दो फीसदी कम यानी 98 फीसदी रहेगा.' लेकिन, स्काईमेट के इन दावों के विपरीत पिछले साल बारिश सामान्य से करीब 14 फीसदी कम हुई थी. हालांकि, तब भारतीय मौसम विभाग का अनुमान लगभग सटीक साबित हुआ था.

यही वजह है कि विभिन्न सरकारों और संस्थाओं ने सूखे की स्थितियों से निपटने की व्यवस्थाएं भी बनाना शुरू कर दिया है. अगर महाराष्ट्र को ही लें तो वहां राज्य सरकार ने इस बार क्लाउड सीडिंग (बादलों का बीजारोपण) करने की योजना बनाई है. क्लाउड सीडिंग के तहत कृत्रिम तौर पर जल की बूंदों का निर्माण किया जाता है.

हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने यह प्रयोग पिछले साल भी किया था, लेकिन तब यह योजना बहुत ज्यादा कामयाब नहीं हुई थी. अधिकारी इसकी वजह बताते हुए कहते हैं कि उस समय मॉनसून का आखिरी दौर था और बादलों में नमी न के बराबर थी, इसी कारण पिछले साल यह प्रयोग ज्यादा सफल नहीं हुआ था. लेकिन, सरकार ने इस बार मॉनसून की शुरुआत में ही क्लाउड सीडिंग शुरू करने का फैसला लिया है.


इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के दौरान भारतीय मौसम विभाग ने भी इस साल मॉनसून का पूर्वानुमान जारी किया है. मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस साल जून से सितंबर के दरम्यान बरसात का औसत एलपीए का 106 फीसदी रहेगा. हालांकि, मौसम विभाग ने इसमें पांच फीसदी कमी या अधिकता की गुंजाइश भी रखी है. मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में पुणे के इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी के पूर्वानुमान का भी जिक्र किया है. इस संस्थान ने पांच फीसदी की कमी या अधिकता के साथ इस साल की बारिश के एलपीए के 111 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है.