राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने जेडीयू सांसद अनिल कुमार साहनी के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. साहनी पर आरोप है कि उन्होंने बिना हवाई यात्रा किए राज्यसभा से टिकट के लाखों रुपये वसूले हैं. संसद के यात्रा संबंधी नियमों के तहत प्रत्येक सांसद को हर साल देश में 34 हवाई यात्राएं करने का पैसा दिया जाता है. इन यात्राओं के टिकट दिखाने पर इनका भुगतान सांसदों को कर दिया जाता है. खबरों के अनुसार सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि साहनी ने कुछ ट्रेवल एजेंटों और एयर इंडिया के अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी बोर्डिंग पास और एयर टिकट बनवाए. इसके बाद उन्होंने इन टिकटों के बदले 24 लाख रुपए अपने बैंक खाते में डलवा लिए.

वहीं, अनिल साहनी ने इन सभी आरोपों से इनकार करते हुए इसे केंद्र के द्वारा रची गई साजिश बताया है. उनका कहना है कि उन्हें नकली बिल रैकेट का शिकार बनाया जा रहा है. सांसद ने यह भी कहा है कि अगर उनके खाते में एक भी पैसा आया होगा तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे. उधर, जांच एजेंसी ने साहनी का सहयोग करने के आरोप में एयर इंडिया के कुछ अधिकारियों और दिल्ली की ट्रेवल एजेंसी 'एयर क्रूज ट्रेवल्स' के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है

माल्या का पासपोर्ट निलंबित, ईडी ने गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की

भारतीय विदेश मंत्रालय ने उद्योगपति विजय माल्या का पासपोर्ट चार सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है. मंत्रालय ने ऐसा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अनुशंसा पर किया है. ईडी ने 13 अप्रैल को मंत्रालय से कहा था कि उसने आईडीबीआई बैंक के 900 करोड़ रुपये नहीं लौटाने से जुड़े मामले में माल्या को तीन सम्मन भेजे थे और इसके बाद भी हाजिर न होने पर विजय माल्या का पासपोर्ट निलंबित कर दिया जाए. शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने माल्या से यह भी पूछा है कि किस आधार पर उनका पासपोर्ट जब्त न किया जाए? मंत्रालय के मुताबिक अगर माल्या एक हफ्ते में इसका जवाब नहीं देते हैं तो फिर उनके पासपोर्ट को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. वहीं पासपोर्ट के निलंबित होने के बाद शुक्रवार को ईडी ने मुंबई की एक विशेष अदालत से माल्या के ख़िलाफ़ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की है.

भारत और फ्रांस के बीच राफेल डील साठ हजार करोड़ में फाइनल हुई

भारत और फ्रांस के बीच काफी समय से अटकी राफेल डील फाइनल हो गई है. इस नए समझौते के तहत भारत फ़्रांस को 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 780 करोड़ यूरो (करीब 60 हजार करोड़ रुपये) का भुगतान करेगा. एनडीटीवी ने कुछ सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस समझौते के दस्तावेजों पर तीन हफ़्तों में दस्तख़त किए जाएंगे और भारत को इन विमानों की पहली खेप मिलने में करीब 18 महीनों का समय लगेगा.

अब तक इस डील के न हो पाने की मुख्य वजह विमानों की कीमत थी. फ्रांस ने 36 लड़ाकू विमानों के लिए 1100 करोड़ यूरो की मांग की थी जिस वजह से इस पर सहमति नहीं बन पा रही थी. लेकिन, पिछले साल अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस डील पर सहमति बनवाने में सफल रहे थे. इसके बाद इस साल जनवरी में इससे जुड़े एमओयू पर भी हस्ताक्षर हो गए थे.