सुप्रीम कोर्ट में कोहिनूर हीरे की वापसी को लेकर दिए अपने बयान से मोदी सरकार एक दिन बाद ही पलट गई है. समाचार वेबसाईट इंडिया टुडे ने केंद्र से जुड़े अधिकारियों के हवाले से कहा है कि भारत सरकार कोहिनूर को वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी.

इससे पहले सोमवार को इस मामले में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के सामने इसकी बिलकुल उलट बात कही थी. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह ब्रिटेन सरकार से कोहिनूर हीरे की वापसी की मांग इसलिए नहीं कर सकती क्योंकि उसे न तो चोरी किया गया था और न ही जबरदस्ती ब्रिटेन ले जाया गया था. सरकार का कहना था कि 1849 में कोहिनूर ईस्ट इंडिया कंपनी को उपहार में मिला था जिसे देने वाले महाराजा दिलीप सिंह थे.

मंगलवार को सरकार की ओर से यह भी साफ़ किया गया है कि कोहिनूर को लेकर कोर्ट की सुनवाई के दौरान सरकार के वकील ने जो कुछ भी कहा था वह एएसआई के तथ्यों पर आधारित है. अधिकारियों के मुताबिक कोर्ट में अब तक सरकार ने अपने विचार रखे ही नहीं हैं.

उड़ीसा में भीषण गर्मी से 50 की मौत, सरकार ने स्कूल-कॉलेज बंद किये

उड़ीसा में भीषण गर्मी और लू के कारण मरने वालों की संख्या 50 पहुंच गई है. सरकार ने बढ़ते तापमान को देखते हुए राज्य के सभी स्कूल-कॉलेजों को 26 अप्रैल तक के लिए बंद कर दिया है. मंगलवार को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया है. साथ ही मुख्यमंत्री ने कई जिलों से पेयजल की कमी को लेकर आ रही खबरों पर ग्रामीण और शहरी विकास मंत्रियों के साथ-साथ प्रधान सचिव को भी तलब किया है. मंगलवार को राज्य के करीब 17 जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर था. सुंदरगढ़ जिले में सबसे अधिक 46 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया.

बंगलुरु में हिंसक प्रदर्शन के बाद, केंद्र ने पीएफ पर अपना फैसला वापस लिया

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के नए नियमों के खिलाफ बेगलुरु में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार ने अपने पैर पीछे खींच लिए हैं. सरकार ने पीएफ का पूरा पैसा निकालने पर पाबंदियां लगाने वाली 10 फरवरी की अपनी अधिसूचना को रद्द कर दिया है. केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि पैसा निकालने की पुरानी व्यवस्था ही बनी रहेगी. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक सरकार ने ट्रेड यूनियन की मांग के मद्देनजर यह फैसला किया है.

10 फरवरी को सरकार ने पीएफ को लेकर अधिसूचना जारी करते हुए कहा था कि अब पीएफ का पूरा पैसा निकालने के लिए लोगों को 58 साल की उम्र तक का इंतजार करना होगा. मंत्रालय का कहना था कि इससे पहले कर्मचारी सिर्फ अपने अंशदान और उस पर मिले ब्‍याज की रकम को ही निकाल सकेगा. यहां तक कि नौकरी छोड़ने या नौकरी से निकाले जाने पर भी कर्मचारी पूरा पैसा नहीं निकाला सकेगा. ये नियम एक मई से लागू होने थे.

पुराने नियमों की बात करें, तो कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ने के दो महीने में अपना पूरा पैसा निकाल सकता है. इसके अलावा कर्मचारी अपनी नौकरी के दौरान भी 55 साल की उम्र में पीएफ का 90 फीसदी हिस्सा निकाल सकता है. वहीं, मंगलवार को सरकार की अधिसूचना के विरोध में बंगलुरु के कपडा उद्योग के श्रमिकों ने हिंसक प्रदर्शन किया. श्रमिकों ने कई वाहनों और एक पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया था. श्रमिकों के इस प्रदर्शन के कारण ही केंद्र को अपनी अधिसूचना रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा.