अभिनेता सलमान खान को रियो ओलिंपिक 2016 के लिए भारत की ओर से गुडविल एम्बैसडर चुना गया है. भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने शनिवार को दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय पर इसकी घोषणा की है. इस दौरान आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सलमान ने कहा कि वे देश के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाना चाहते हैं जिससे कि वे ओलंपिक में जाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें. उन्होंने खिलाड़ियों को सन्देश देते हुए कहा, 'जाओ खेलो और देश के लिए कुछ न कुछ लेकर आओ.'

वहीं, इस घोषणा को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है. लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुके पहलवान योगेश्वेर दत्त ने आईओए के इस फैसले पर नाराजगी जताई है. उन्होंने सलमान को एंबेसडर बनाए जाने की जरूरत पर सवाल उठाया है. योगेश्वेर ने कहा, 'एंबेसडर का क्या काम होता है कोई मुझे बता सकता है क्या. क्यूं पागल बना रहे हो देश की जनता को.' बता दें कि ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी बॉलीवुड अभिनेता को खेलों के लिए गुडविल एम्बैसडर चुना गया हो.

तृप्ति देसाई का ऐलान, अब हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश के लिए आंदोलन होगा

महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिलाने के लिए आंदोलन करने वाली भूमाता ब्रिगेड की तृप्ति देसाई अब हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश के लिए आंदोलन करेंगी. तृप्ति ने बीबीसी से कहा है कि हाजी अली दरगाह में 2011 तक महिलाओं को मजार तक जाने की अनुमति थी, लेकिन इसके बाद दरगाह ट्रस्ट ने उनके अंदर जाने पर रोक लगा दी. उनके मुताबिक हाजी अली में महिलाओं को प्रवेश दिलाने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जा चुकी है और इसके लिए वे 28 अप्रैल से अांदोलन भी शुरू करने जा रही हैं. तृप्ति का कहना है कि वे अगले महीने सबरीमाला मंदिर में भी जाने वाली हैं. बता दें कि सबरीमाला मन्दिर में 11 से 50 साल तक उम्र की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. यह मामला भी इस समय कोर्ट में है.

हाईकोर्ट ने मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडे की बीएचयू से बर्खास्तगी रद्द की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडे की बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से की गई बर्खास्तगी रद्द कर दी है. हाईकोर्ट ने संदीप की बर्खास्तगी को नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने संदीप का पक्ष को सुने बिना ही यह फैसला लिया है. संदीप बीएचयू आईआईटी में एक साल के अनुबंध पर विजिटिंग प्रोफेसर थे. लेकिन, बीते 6 जनवरी को बीएचयू के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स ने उनका अनुबंध पूरा होने से सात महीने पहले ही उन्हें निकालने का आदेश पारित कर दिया. बोर्ड के सदस्यों का कहना था कि संदीप की गतिविधियां राष्ट्रविरोधी, नक्सलियों की पक्षधर और साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली हैं. साथ ही उन पर यह आरोप भी लगाया गया कि वे छात्रों को क़ानून तोड़ने के लिए उकसाते हैं. इसके बाद संदीप ने बोर्ड के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी.