जेएनयू में नौ फरवरी को राष्ट्रविरोधी कार्यक्रम आयोजित करने के मामले में जेएनयू की पांच सदस्यीय जांच समिति ने अपना निर्णय सुना दिया है. समिति ने इस मामले में छात्र नेता कन्हैया कुमार को अनुशासनहीनता का दोषी मानते हुए उन पर दस हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया है. वहीं, इस मामले के दूसरे आरोपी छात्र उमर ख़ालिद को बीस हजार के जुर्माने के साथ विश्वविद्यालय से एक सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया गया है.

इसके अलावा जेएनयू प्रशासन ने इस मामले के तीसरे बड़े आरोपी अनिर्बान भट्टाचार्य को 15 जुलाई तक के लिए निलंबित किया है. साथ ही समिति ने यह भी कहा है कि भट्टाचार्य 25 जुलाई से अगले पांच साल तक जेएनयू के किसी भी पाठ्यक्रम में दाखिला नहीं ले पाएंगे.

जांच समिति ने अन्य आरोपी छात्र ऐश्वर्या अधिकारी, रामा नागा, अनंत, आशुतोष कुमार और गार्गी पर बीस-बीस हज़ार का जुर्माना लगाया है. साथ ही आशुतोष कुमार को एक साल के लिए छात्रावास से भी निकाल दिया गया है. खबरों के मुताबिक जांच समिति ने एबीवीपी सदस्य और छात्रसंघ के सचिव सौरभ शर्मा को नौ फरवरी को हुए कार्यक्रम के दौरान यातायात रोकने का दोषी मानते हुए उन पर भी बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है.

अदालत ने 2006 के मालेगांव धमाके के सभी आठ आरोपियों को बरी किया

महाराष्ट्र के मालेगांव में 2006 में हुए धमाकों के सभी आठ आरोपियों को मुंबई की एक अदालत ने बरी कर दिया है. इस मामले में ज़मानत पा चुके सात आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को ख़ारिज करने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी. इस अर्जी पर सोमवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई हैं इसलिए अब इन लोगों के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. हालांकि, एनआईए ने इन लोगों की रिहाई का विरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि इन लोगों क रिहाई से इस मामले की जांच प्रभावित हो सकती है.

आठ सितंबर 2006 को मालेगांव की हमीदिया मस्जिद के नज़दीक हुए चार धमाकों में 37 लोग मारे गए थे और 100 से ज़्यादा घायल हुए थे. सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले में 13 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से नौ लोगों को ही गिफ्तार किया जा सका था. एनआईए ने इन सभी आरोपियों को सिमी से जुड़ा हुआ बताया था. आरोपी व्यक्तियों में से एक की पहले ही मौत हो चुकी है.

भारत सरकार ने उइगर नेता डोल्कन इसा का वीजा रद्द किया

भारत सरकार ने उइगर नेता डोल्कन इसा को दिया गया ई-वीजा रद्द कर दिया है. सोमवार को गृह मंत्रालय ने मीडिया को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इसा का वीजा रद्द कर गया है, क्योंकि उनके खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर चुका है. मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों को पहले इस बात की जानकारी नहीं थी कि इसा के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है. इस बात का पता चलते ही उन्होंने 23 अप्रैल को जारी गया ई- वीजा रद्द कर दिया.

बता दें, जर्मनी में रह रहे डोल्कन इसा को धर्मशाला में 28 अप्रैल से होने वाली एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए वीजा दिया गया था. इसके बाद चीन ने भारत के इस निर्णय पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि इसा एक चीनी आतंकी है और भारत को उसे वीजा नहीं देना चाहिए था. दरअसल, इसा वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्लूयूसी) के नेता हैं. डब्लूयूसी चीन से बाहर रहने वाले उइगर मुसलमानों का एक समूह है. डोल्कन इसा और इस समूह के कई अन्य नेताओं पर चीन के शिंजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों को भड़काने और आतंकी घटनाओं में शामिल होने का आरोप है.