'अगले 15 साल तक प्रधानमंत्री पद के लिए रिक्ति नहीं है.'

— रामविलास पासवान, केंद्रीय खाद्य और जनवितरण मंत्री

पासवान का यह बयान बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर जारी चर्चा के बीच आया है. यह चर्चा तब शुरू हुई जब हाल में नीतीश ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले गैर बीजेपी दलों से एकजुट होने की अपील की. इसके बाद उनके गठबंधन सहयोगी लालू प्रसाद यादव का बयान आया कि अगर नीतीश पीएम पद के उम्मीदवार बने तो वे उनका समर्थन करेंगे. फिर एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने कहा कि 2019 में प्रधानमंत्री पद के लिए नीतीश सबसे योग्य चेहरा हैं. अब पासवान का कहना है कि 15 साल तक प्रधानमंत्री पद खाली नहीं है क्योंकि नरेंद्र मोदी इस पद पर बने रहेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश बिहार में अपनी सरकार की विफलता से लोगों का ध्यान हटाने के लिए शराबबंदी को लेकर राष्ट्रीय अभियान छेड़ने और धर्मनिरपेक्ष दलों को एकजुट करने की बात कर रहे हैं.

'यूपीए के दौरान अगस्ता को कभी काली सूची में नहीं डाला गया.' 

— अरुण जेटली, केंद्रीय वित्त मंत्री

जेटली ने यह बात अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे को लेकर कांग्रेस पर हमला करते हुए कही. उन्होंने कहा कि अगस्ता को कभी काली सूची में नहीं डाला गया तो यह कहना कपोल-कल्पना है कि एनडीए सरकार ने उस पर से प्रतिबंध हटा लिया. इससे पहले यूपीए सरकार में पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा था कि घूसखोरी का मुद्दा सामने आने के बाद उनकी सरकार के समय ही इस कंपनी को काली सूची में डाल दिया गया था. एंटनी ने यह भी कहा कि जब सीबीआई, ईडी आदि एजेंसियां मोदी सरकार के अधीन हैं तो वह कार्रवाई के बजाय बयानबाजी क्यों कर रही है. इटली की एक अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि 2010 में हुए 3600 करोड़ रु के इस सौदे में करीब 330 करोड़ की गूस दी गई.


'मोदी व्यक्तिगत रूप से ईमानदार हैं.'

— अमर सिंह, पूर्व सांसद

अमर सिंह का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनकी डिग्री को लेकर हो रहे हमलों के बीच आया है. मोदी को ईमानदार नेता बताते हुए अमर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाई आज भी क्लर्क हैं और उनकी मां छोटे से घर में रहती हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मोदी से लोगों को बहुत आशाएं थीं, लेकिन वे पूरी नहीं हुई हैं इसलिए हताशा बढ़ी है. अमर सिंह के मुताबिक घर वापसी जैसे कार्यकर्मों से मोदी की बदनामी हुई है.


'हालात बहुत जटिल हैं. वहां जमीनी स्तर पर खतरा है.'

— मार्क टोनी, अमेरिका में विदेश मंत्रालय के उपप्रवक्ता

मार्क की यह प्रतिक्रिया बांग्लादेश के हालात के बारे में पूछे गए एक सवाल पर आई. भारत के इस पड़ोसी देश में हाल के दौरान अल्पसंख्यकों, धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों, बुद्धिजीवियों और विदेशियों पर सुनियोजित हमले हुए हैं. मार्क के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि सरकार इन बर्बर हत्याओं की जांच कराए जिससे अपराधियों को सजा दी जा सके. उनका यह भी कहना था कि इन हत्याओं की विभिन्न संगठनों ने जिम्मेदारी ली है और अमेरिका के पास उनके इन दावों पर यकीन न करने का कोई कारण नहीं है.