हाल ही में गुजरात के एक कॉलेज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यताओं से जुड़े दस्तावेज जारी किए हैं. इनपर दर्ज जन्मतिथि और उनके अन्य सरकारी दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि में अंतर है और कल से कांग्रेस इसपर सवाल उठा रही है. सोशल मीडिया पर यह खबर कल से ही चर्चा में है. आज भी इस मसले पर कई टिप्पणियां आई हैं. एक टिप्पणी के अनुसार जन्मतिथि की जानकारी में अंतर इस बात का प्रमाण है कि भाजपा ‘पार्टी विद डिफरेंस’ है. यह कहते हुए कुछ लोगों ने केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की जन्मतिथि पर हो चुके विवाद का भी जिक्र किया है.

अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर नोबेल शांति पुरस्कार ठुकराने की बात कहकर चर्चा में आ गए हैं. एक अखबार से बात करते हुए श्री श्री ने कहा है कि उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा था लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया क्योंकि वे काम करने में यकीन रखते हैं, उसके लिए सम्मानित होने में नहीं. सोशल मीडिया पर उनका यह बयान खूब चर्चा में है. लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा है कि नोबल कमेटी का ध्यान आकर्षित करने के लिए श्री श्री ने यह तरीका अपनाया है लेकिन अब कमेटी इस बात को ध्यान में रखे कि इस पुरस्कार में उनकी कोई रुचि नहीं है.
सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी को वाई सिक्योरिटी देने का फैसला लिया है. नीता अंबानी की सुरक्षा में अब सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के 20 जवान तैनात होंगे. इस बहाने सोशल मीडिया पर नीता अंबानी चर्चा में हैं. यहां पर कुछ लोगों ने नीता अंबानी को सुरक्षा मिलने का विरोध किया है. एक टिप्पणी के अनुसार अंबानी सुरक्षा का खर्चा खुद उठा सकते हैं तो सरकार ये जहमत क्यों उठा रही है.
नरेंद्र मोदी की दो जन्मतिथि होने पर हैरानी किस बात की. 29 अगस्त,1949 को वो पैदा हुए होंगे और 17 सितंबर,1950 को उन्होंने भक्तों के लिए अवतार लिया होगा!
मोदी की डिग्री में जन्मतिथि गलत है, इसलिए डिग्री गलत है, इस लॉजिक से पासपोर्ट में कुछ गलती हो जाए तो आपकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी.
संदीप अध्वार्यु | @CartoonistSan
#कार्टून #अगस्ता वेस्टलैंड
#cartoon @timesofindia #AugustaWestland pic.twitter.com/g86ybgFYts
— Sandeep Adhwaryu (@CartoonistSan) May 1, 2016
दोहरे चरित्र वाली बीजेपी के दोहरे मापदण्ड वाले साहेब की दोहरी जन्मतिथि है.
बुद्ध आदित्य रॉय |@budhadityaroy
मुझे लगता है कि श्री श्री ने नोबेल पुरस्कार लेने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया क्योंकि वो सिर्फ एक पुरस्कार दे रहे थे जबकि उन्हें श्री श्री नोबल नोबेल रविशंकर जैसी उपाधि चाहिए थी.
नोबेल कमेटी को यह बात दिमाग में रखनी चाहिए कि श्री श्री रविशंकर को इस पुरस्कार में कोई रुचि नहीं है.
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