'पहले भी मुझे नोबेल शांति पुरस्कार का प्रस्ताव मिला था, लेकिन मैंने उसे खारिज कर दिया.'

— श्री श्री रविशंकर, आध्यात्मिक गुरू

आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर का यह बयान आज सुर्खियों का विषय बना रहा. खबरों के मुताबिक एक अखबार से बात करते हुए उन्होंने पाकिस्तानी छात्रा मलाला यूसुफजई को यह सम्मान दिए जाने की आलोचना भी की. 59 वर्षीय रविशंकर ने नोबेल शांति पुरस्कार का प्रस्ताव खारिज करने की वजह यह बताई कि वे सिर्फ काम करने में विश्वास रखते हैं उसके लिए लिए कोई सम्मान मिलने में नहीं. रविशंकर इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं. कुछ दिन पहले उनका कहना था कि उन्होंने आतंकी संगठन इस्लामी स्टेट (आईएस) से शांति के लिए बातचीत शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन संगठन ने उन्हें झिड़क दिया. हाल में वे दिल्ली में यमुना नदी के किनारे विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन को लेकर भी सुर्खियों में थे. तब कई पर्यावरणविदों ने उन पर यमुना की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था.

'रिलायंस को लेकर इस सरकार की नीति भी वही है जो पिछली सरकार की थी.'

— भोला सिंह, भाजपा सांसद

बिहार के बेगूसराय से सांसद भोला सिंह ने यह बयान अपनी ही पार्टी पर निशाना साधते हुए दिया है. लोकसभा में उन्होंने कहा कि संसद सालों-साल से इसकी गवाह रही है कि रिलायंस को लेकर सरकारों की नीति नहीं बदली है. भोला सिंह का अपनी पार्टी पर यह पहला हमला नहीं है. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भी भाजपा की शर्मनाक हार पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व को निशाना बनाया था. उनका कहना था कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को हार की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.


'मैंने उस तरह से व्यवहार नहीं किया जैसे कांग्रेस के नेता करते हैं.'

— सुखेंदु शेखर राय, तृणमूल सांसद

तृणमूल कांग्रेस के शेखर ने यह बात राज्यसभा से अपने निलंबन के फैसले पर कही. अगस्ता वेस्टलैंड मामले में वे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के तुरंत जवाब की मांग कर रहे थे जबकि रक्षा मंत्री को इस मसले पर बुधवार को जवाब देना है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-वाम गठबंधन का मुकाबला कर रही तृणमूल ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे का मुद्दा उठाते हुए राज्यसभा में भारी हंगामा किया और कांग्रेस पर निशाना साधा. इस दौरान पार्टी सदस्य सुखेंद्र शेखर लगातार मांग करते रहे कि सदन का कामकाज रोककर इस मुद्दे पर चर्चा की जाए. सभापति के बार-बार समझाने के बाद भी जब वे नहीं माने तो उन्हें दिन भर के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया. फैसले से असहमति जताते हुए तृणमूल के अन्य सदस्य भी वाकआउट कर गए.


'सरकार जैन समाज के संत और साधुओं को खुले में शौच करने की छूट दे.' 

— रविंद्र जैन, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के अध्यक्ष

जैन समुदाय से संबंध रखने वाले दिगंबर पंथ के लोगों ने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि जैन संत और साधुओं को खुले में शौच पर लगने वाले प्रतिबंध से छूट मिलनी चाहिए. दिगंबर जैन समाज के साधु कोई वस्त्र धारण नहीं करते और खुले में शौच करते हैं. सरकार को एक ज्ञापन सौंपते हुए इस समुदाय के लोगों का कहना है कि उनके संत और साधु कभी भी शौचालय का प्रयोग नहीं करते. केंद्र सरकार दो अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच को पूरी तरह से बंद करना चाहती है. इसलिए ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत कई जगहों पर खुले में शौच करने वालों के ख़िलाफ़ सख्ती शुरु हो गई है. उधर, मध्यप्रदेश के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव का कहना है कि जैन समुदाय के संतों और साधुओं को इस तरह की छूट देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि इनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है.


'मैंने चप्पल फेंकने वाले को क्षमा कर दिया है.'

— नीतीश कुमार, बिहार के मुख्यमंत्री

नीतीश ने यह बात एक युवक द्वारा उन पर चप्पल फेंके जाने की घटना के बात कही. युवक ने जनता दरबार के दौरान यह हरकत की थी. इसके बाद वहां मौजूद सुरक्षा बलों ने उसे पकड़ लिया. चप्पल फेंकने वाले का भी नाम नीतीश कुमार है और वह जनता दरबार में फरियादी बनकर आया था. बाद में नीतीश ने उस युवक से बात भी की जिसका कहना था कि आग की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए जारी सरकारी फरमान से वह गुस्सा है. बीते दिनों सरकार ने कहा था कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में सुबह नौ बजे से लेकर शाम के छह बजे तक खाना बनाने की इजाजत नहीं है और अगर किसी ने यह नियम तोड़ा तो उसे दो साल की जेल हो सकती है. सरकार ने आग से जुड़े सभी धार्मिक कार्यक्रमों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. बिहार में पिछले दो हफ्तों में छह जिलों में लगी भीषण आग की वजह से करीब 66 लोगों और 1200 जानवरों की मौत हो चुकी है.