अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ़) ने अपनी साल 2015 की रिपोर्ट में कहा है कि भारत में असहिष्णुता बढ़ी है और धार्मिक आज़ादी के अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2015 में हिंदू संगठनों द्वारा अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि हुई है. इसके अनुसार 2015 में ईसाइयों के साथ हिंसा के 365 मामले सामने आए हैं, जबकि साल 2014 में यह संख्या 120 थी. रिपोर्ट में ईसाई समुदाय के हवाले से कहा गया है कि इन घटनाओं के लिए हिंदू संगठन ज़िम्मेदार हैं और इन संगठनों को भाजपा सरकार और पार्टी के नेताओं का समर्थन भी हासिल है.

रिपोर्ट में कुछ भाजपा नेताओं का नाम भी लिया गया है. इसके अनुसार कई भाजपा सांसद और संघ नेताओं ने मुसलमानों की जनसंख्या का डर दिखाकर देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की है. यहां तक कि भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ और साक्षी महाराज ने मुसलमानों की जनसंख्या को रोकने के लिए क़ानून बनाने तक की मांग की है.

इन घटनाओं को देखते हुए यूएससीआईआरएफ़ ने अमेरिकी सरकार को सलाह दी है कि वह भारत के साथ सहिष्णुता के मुद्दे पर बातचीत करे. बता दें कि यूएससीआईआरएफ़ एक स्वतंत्र आयोग है जिसकी नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और संसद के द्वारा की जाती है. यह आयोग दुनियाभर में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों पर नज़र रखता है. बीते मार्च में मोदी सरकार ने इस आयोग को वीजा देने से इनकार कर दिया था.

जर्मनी की खुफिया एजेंसी देश की 90 मस्जिदों पर नजर रख रही है

जर्मनी सरकार ने आईएस से जुड़े कट्टरपंथियों की पहचान और उनकी धरपकड़ के लिए देश की मस्जिदों पर नजर रखनी शुरू कर दी है. जर्मनी की खुफिया एजेंसी बीएफवी के अनुसार, वह इस समय देश में लगभग 90 मस्जिदों की निगरानी कर रही है. बीएफवी के प्रमुख हैंस-जॉर्ज मसीन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जर्मनी में ऐसी कई मस्जिदें हैं जहां स्वघोषित इमाम और स्वघोषित अमीर अपने शागिर्दों को इकट्ठा कर नफरतपूर्ण भाषण देते हैं और जिहाद का झंडा बुलंद करते हैं. उनके अनुसार, 'हमें इन लोगों के आईएस से सांठ-गांठ होने का पता लगा है और इसीलिए हमने एहतियात के तौर पर देश की करीब 90 मस्जिदों पर नजर रखने का निर्णय किया है.' हालांकि मसीन ने स्पष्ट किया कि बीएफवी देश के सभी मुसलमानों की निगरानी नहीं कर रही है और केवल धार्मिक कट्टपंथियों पर उसकी नजर है.

अमेरिका ने कहा, एफ़-16 विमानों के लिए पाक को पूरी कीमत चुकानी होगी

अमेरिका ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका देते हुए कहा है कि उसे आठ एफ़-16 विमानों को खरीदने के लिए इस डील की पूरी कीमत अपनी जेब से चुकानी होगी. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि संसद ने इस डील को मंजूरी दे दी है, लेकिन उसने ओबामा सरकार को इसके लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने से मना किया है. किर्बी के मुताबिक संसद की इन आपत्तियों के मद्देनजर हमने पाकिस्तान से इस डील के पूरे पैसे भरने को कहा है.

बता दें, पिछले हफ्ते इस डील को लेकर कुछ अमेरिकी सांसदों ने कहा था कि वे ओबामा प्रशासन को टैक्स चुकाने वाले अमेरिकियों के पैसे से पाकिस्तान की मदद नहीं करने देंगे. उनका कहना था कि पाकिस्तान भविष्य में इन विमानों का इस्तेमाल भारत सहित अन्य पड़ोसियों के खिलाफ भी कर सकता है. दरअसल, कुल 70 करोड़ डॉलर की इस डील में पाकिस्तान को अपनी जेब से केवल 27 करोड़ डॉलर ही देने थे. बाकी बचे 43 करोड़ डॉलर ओबामा सरकार अपने पास से दे रही थी.