अमेरिका के इंडियाना प्रांत में रिपब्लिकन पार्टी के प्राइमरी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी जीत मिली है. वहीं, इस प्राइमरी में हार के बाद रिपब्लिकन दावेदारों में दूसरे नंबर पर चल रहे ट्रेड क्रूज ने राष्ट्रपति उम्मीदवारी की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया है. उनके इस निर्णय के बाद डोनाल्ड ट्रंप का आगामी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उमीदवार बनना तय माना जा रहा है क्योंकि, अब अन्य कोई भी रिपब्लिकन उम्मीदवार इतना मजबूत नहीं दिखता कि वह ट्रंप को चुनौती दे सके.

प्राइमरी चुनाव में मिले प्रतिनिधियों के समर्थन को देखें, तो ट्रंप अभी तक 1047 प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल कर चुके हैं. अब उन्हें आगे के प्राइमरी चुनावों में शेष बचे 520 प्रतिनिधियों में से मात्र 190 का ही समर्थन हासिल करना है. बता दें कि रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवारी हासिल करने के लिए सभी प्राइमरी चुनावों में कुल 1237 प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल करना होता.

वहीं, दूसरी ओर इंडियाना प्रांत में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में हिलेरी क्लिंटन को बर्नी सैंडर्स से हार का सामना करना पड़ा है. हालांकि, वे अभी भी अपनी पार्टी की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ में सबसे आगे चल रही हैं. उन्हें अभी तक 2202 प्रतिनिधियों का समर्थन मिल चुका है जबकि उम्मीदवारी हासिल करने के लिए उन्हें कुल 2383 प्रतिनिधियों के समर्थन की जरूरत है. वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी में दूसरे नंबर पर चल रहे बर्नी सैंडर्स को 1400 प्रतिनिधियों का समर्थन मिल चुका है और वे अभी भी इस रेस में बने हुए हैं.

दुनियाभर के साढ़े सात करोड़ बच्चे अभी भी शिक्षा से दूर : यूनिसेफ

संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूनिसेफ़ के मुताबिक़ दुनियाभर के तकरीबन 7.5 करोड़ बच्चों को इस समय पढ़ाई के लिए मदद की सख़्त ज़रूरत है. हाल ही में आई यूनिसेफ़ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सीरिया में पांच साल से चल रहे गृहयुद्ध के कारण छह हज़ार स्कूल बंद हो गए हैं. वहीं पूर्वी यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के कारण हर पांच में से एक स्कूल क्षतिग्रस्त हो गया है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दुनियाभर में तीन से अठारह वर्ष की उम्र वाले करीब 46 करोड़ बच्चों में हर चार में एक बच्चा ऐसे देश में रहता है, जहां मानवाधिकारों पर संकट बना हुआ है. हालांकि, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की में 23 मई को होने वाले वर्ल्ड ह्यूमैनिटेरियन समिट में शिक्षा के लिए एक नए आपातकालीन फंड की शुरुआत की जाएगी. यूनिसेफ़ को उम्मीद है कि इस फंड से करीब डेढ़ करोड़ बच्चों को आपातकाल की स्थिति में भी शिक्षा मिल पाएगी.

सीआईए प्रमुख ने कहा, 9/11 हमले में सऊदी अरब का हाथ नहीं था

अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के प्रमुख जॉन ब्रेनन ने न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले में सऊदी अरब का हाथ होने से इनकार किया है. उन्होंने अमेरिकी न्यूज़ चैनल एनबीसी को दिए साक्षात्कार में कहा, 'हमारे पास ऐसे कोई सबूत नहीं हैं जिनसे साबित हो सके कि 2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने के लिए सऊदी अरब ने अलकायदा की मदद की थी.' उनका यह भी कहना था कि संसद में कुछ सदस्य इस हमले में सऊदी का हाथ होने की जो आशंका जाहिर कर रहे हैं वह निराधार है.

दरअसल, 9/11 हमले को लेकर अमेरिकी संसद की एक समिति ने सदन में 28 पन्नों की अपनी एक जांच रिपोर्ट पेश की है जिसमें आरोप लगाया गया है कि इस हमले में सऊदी सरकार का भी हाथ था. यह समिति संसद में एक बिल भी पास कराना चाहती है जिसके पास होते ही अमेरिकी अदालतों को सऊदी अरब को इस हमले में दोषी ठहराने की अनुमति मिल जाएगी. हाल ही में सऊदी यात्रा पर आए ओबामा से सऊदी सरकार ने इस बिल को लेकर नाराजगी भी जाहिर की थी. इसके बाद ओबामा प्रशासन इस कोशिश में है कि यह बिल संसद में पास न हो पाए.