अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके अरुण शौरी ने एक फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है. शौरी ने नरेंद्र मोदी को अहंकारी और आत्ममुग्ध बताते हुए उनपर एक व्यक्ति के प्रभुत्व वाली ‘राष्ट्रपति प्रणाली की सरकार’ चलाने का आरोप लगाया है. न्यूज चैनल इंडिया टुडे से बातचीत में शौरी ने कहा कि मोदी सरकार में सभी फैसले कुछ ख़ास लोग ही लेते हैं और वे भी मोदी द्वारा ही चुने गए हैं. ऐसे में यह सरकार केवल एक व्यक्ति केन्द्रित सरकार बन कर रह गई है जो लोकतंत्र के लिए बुरा है.

इस समय भाजपा में हाशिये पर जा चुके शौरी ने आरोप लगाया कि मोदी केवल खुद से प्‍यार करते हैं, वे लोगों को पेपर नैपकिन की तरह इस्‍तेमाल कर फेंक देते हैं. उन्होंने मोदी सरकार के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश और हाल ही में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाना असंवैधानिक फैसला था और इससे भाजपा की नीतियां सवालों के घेरे में आई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मोदी की पाकिस्तान और अन्य पड़ोसियों को लेकर विदेश नीति भी समझ से परे है जो न तो संवैधानिक और न ही तार्किक लगती है.

हालांकि, शौरी ने दो साल की मोदी सरकार को बेदाग़ छवि की सरकार बताया है. लेकिन, उन्होंने भाजपा की राज्य सरकारों के भ्रष्टाचार पर मोदी के रुख की आलोचना भी की है. उनके मुताबिक मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाला और छत्तीसगढ़ में पीडीएस घोटाला और ललित मोदी प्रकरण पर केंद्र ने जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की.

उत्तराखंड में हरीश रावत को बहुमत साबित करने का मौका मिला

आखिरकार, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को बहुमत साबित करने का मौका मिल गया है. शुक्रवार को इस मामले में केंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरीश रावत को आगामी 10 मई को बहुमत साबित करने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों की निगरानी में होगी और इसमें कांग्रेस के नौ बागी विधायक हिस्सा नहीं ले सकेंगे. पीटीआई के अनुसार, सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट से कहा कि वह कोर्ट की निगरानी में बहुमत परीक्षण कराए जाने के लिए तैयार है जिसके बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया. इससे पहले तीन मई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को बहुमत परीक्षण कराए जाने का सुझाव देते हुए उससे पूछा था कि कोर्ट की निगरानी में बहुमत परीक्षण क्यों नहीं करवाया जा सकता?

महाराष्ट्र में गोमांस आयात करने और खाने पर से प्रतिबंध हटा

महाराष्ट्र के लोग अब गोमांस खा सकते हैं. शुक्रवार को इस मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य में गोवंश हत्या पर प्रतिबंध जारी रहेगा लेकिन दूसरे राज्यों से बीफ़ आयात करने, अपने पास रखने और खाने पर से पाबंदी हटाई जाती है. मुंबई निवासी आरिफ़ कपाड़िया और मशहूर वकील हरीश जगतियानी ने सरकार द्वारा लाए गए कानून के उन प्रावधानों को अदालत में चुनौती दी थी जिनके तहत राज्य में बीफ़ रखना और खाना एक अपराध था.

कपाड़िया और जगतियानी का कहना था कि इस तरह का प्रतिबंध सरासर ग़लत और मुंबई के बहु-सांस्कृतिक ढांचे के ख़िलाफ़ है, क्योंकि यहां हर धर्म और समाज के लोग रहते है जिनमें से कई गोमांस खाना चाहते हैं. बता दें कि पिछले साल फ़रवरी में राज्य सरकार ने महाराष्ट्र पशु संरक्षण (संशोधन) क़ानून राज्य में लागू किया था. 1976 में बने इस मूल क़ानून में पहले केवल गाय काटने पर ही प्रतिबंध था लेकिन, सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए राज्य में गोमांस खाने और अपने पास रखने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था.