सुप्रीम कोर्ट ने केरल के दो मछुआरों की हत्या के मामले में गिरफ्तार इतालवी मरीन सल्वातोर गिरोने को कुछ शर्तों के साथ इटली वापस जाने की इजाजत दे दी है. गिरोने ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर स्वदेश जाने की इजाजत मांगी थी. याचिका में उसने कहा था कि जब तक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय भारत और इटली के अधिकार क्षेत्र पर फैसला नहीं कर लेता तब तक उसे अपने मुल्क वापस जाने की इजाजत दी जाए. मामले के एक अन्य आरोपित मैसिमिलानो लातोरे को स्वास्थ्य कारणों से पहले ही इटली भेजा जा चुका है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गिरोने की याचिका पर फैसला देने से पहले इतालवी राजदूत से एक हलफनामा लिया. इसमें उन्होंने कहा है कि यदि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय भारत के पक्ष में फैसला देता है तो वे दोनों ही मरीन को एक महीने के भीतर भारत वापस भेजेंगे.

गिरोने और लातोरे पर चार साल पहले 15 फरवरी, 2012 को केरल के समुद्र तट के पास दो भारतीय मछुआरों की हत्या करने का आरोप लगा था. दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था. हालांकि उनका कहना था कि उन्होंने मछुआरों को समुद्री डाकू समझकर गोली चलाई थी. मामले ने भारत और इटली के बीच राजनयिक संकट का रूप भी ले लिया था. इटली ने दावा किया था कि घटना भारत की समुद्री सीमा में नहीं हुई, इसलिए वह मुकदमा नहीं चला सकता. भारत ने दावे को खारिज कर दिया था. फिलहाल दोनों मुल्क अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय में समुद्री सीमा के मसले पर मुकदमा लड़ रहे हैं.

मांझी के काफिले पर हमला

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के काफिले पर हमला हुआ है. यह घटना गया जिले के डुमरिया कस्बे में हुई. उग्र भीड़ ने एक वाहन में आग भी लगा दी. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को मौके पर हवाई फायर करने पड़े. मांझी हमले में बाल-बाल बच गए. खबरों के मुताबिक, 71 साल के मांझी इलाके में लोकजनशक्ति पार्टी के एक नेता सुदेश पासवान के परिजनों से भेंट करने गए थे. नक्सलियों ने बुधवार को पासवान की हत्या कर दी थी. पासवान की पत्नी पंचायत चुनाव लड़ रही हैं और वे उनके प्रचार में व्यस्त थे. इसी दौरान उन्हें गोली मारी गई.

बिहार में कानून व्यवस्था का मसला पिछले कई दिनों से चर्चा में हैं. मांझी के काफिले पर हमले के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार विपक्ष के निशाने पर आ सकते हैं. 2014 में लोकसभा चुनाव में जदयू के खराब प्रदर्शन के बाद बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पद छोड़ दिया था और मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था. हालांकि बीते साल मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए टकराव में नीतीश और मांझी के रिश्तों में खटास आ गई. मांझी को जदयू से निकाल दिया गया और उन्होंने हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नाम से नई पार्टी बना ली.