शोरगुल का ट्रेलर उस सियासी शोरगुल से भरा हुआ है जिससे हम रोज रूबरू होते हैं. अखबार, टीवी और रेडियो पर एक लंबे समय से हम यही बातें सुनते आ रहे हैं. ट्रेलर में भी ये बातें गाय, असहिष्णुता और धर्म से शुरू होती हैं तो भारत छोड़कर जाने और भारतमाता की जय बोलने तक जाती हैं. यानी कि एक झलक में वह सब नजर आ जाता है जो इस दौर में चल रहा है.

ट्रेलर में जिम्मी शेरगिल हिंदू और नरेंद्र झा मुस्लिम नेता बने एक-दूसरे पर आग बरसाते दिखाई देते हैं. वे बिलकुल भी अटपटे नहीं लगते क्योंकि हम असल जिन्दगी में जिन्हें देख रहे हैं वे इनसे कहीं ज्यादा नाटकीय लगते हैं. बीच में आशुतोष राणा व्यंग्यात्मक लहजे में विधायक से धर्म के आगे इंसानियत का महत्व पूछते दिखाई देते हैं. ट्रेलर में सारे पात्र ध्यान खींचते हैं और इनमें से कुछ हमारे आस-पास के किसी न किसी राजनीतिक किरदार की याद दिलाते हैं, सिर्फ राणा को छोड़कर. ट्रेलर में इस पात्र को देखते हुए कहीं न कहीं आपको असल जिंदगी में ऐसे किसी व्यक्ति की जरुरत महसूस होने लगती है.

ट्रेलर में इस पात्र को देखते हुए कहीं न कहीं आपको असल जिंदगी में ऐसे किसी व्यक्ति की जरुरत महसूस होने लगती है.

उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट दिया गया है. ट्रेलर में भीड़ दिखती है, हो-हल्ला सुनाई देता है. राजनीति के दो दिग्गजों की खींचतान के दृश्यों के बीच दो जोड़े रोमांस करते भी दिखाई देते हैं. संभव है फिल्म में हिंसा और प्रेम के अतिरेक के कुछ दृश्य भी हों. सेंसर बोर्ड के मौजूदा रुख को देखते हुए लगता है कि फिल्म जिस तरह के विषय पर है सिर्फ उसी वजह से भी उसे यह सर्टिफिकेट दिया जा सकता है.

ट्रेलर की झलकियों से पता चलता है कि कैसे प्रेम को धर्म और राजनीति में उलझा दिया जाता है. शायद निर्देशक कहना चाहता हो कि दो अलग धर्मों के लोगों का प्रेम राजनीति के लिए एक अवसर होता है. हो सकता है इस उत्पात में प्रेम और मानवता के पिस जाने की कहानी कही गई हो. ट्रेलर देखकर कुछ-कुछ यही लगता है.

ट्रेलर में हितेन तेजवानी, नरेंद्र झा, अनिरुद्ध दवे भी नजर आते हैं. ये सारे ही चेहरे टीवी पर पहचाने जा चुके हैं और इनका एक अलग प्रशंसक वर्ग है जिसके लिए इन्हें सिल्वर स्क्रीन पर देखना एक अच्छा अनुभव साबित हो सकता है. जिम्मी शेरगिल, आशुतोष राणा और मुख्यमंत्री बने संजय सूरी भी ट्रेलर में वजन पैदा करते हैं. आशंका यह है कि यह नई निर्देशक जोड़ी अपने चुने हुए विषय के साथ इंसाफ कर पाएगी या नहीं. अगर ऐसा हुआ तो यह अभिनय के इतने बेहतरीन समन्वय को बेकार कर सकता है.

कुल मिलाकर एक मिनट 51 सेकंड का यह ट्रेलर आज की झलक दे जाता है लेकिन, फिल्म सच को सही तरीके से कहने में कितना सफल हो पाएगी यह 24 जून को ही पता चलेगा.

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