सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के पुनर्वास प्रशिक्षण के लिए चलाई जा रही योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगा है. इसकी जांच के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक कमेटी का गठन किया है. जांच के दायरे में तकरीबन 250 प्रशिक्षण संस्थान हैं. मंत्रालय की ही एक आंतरिक वित्तीय इकाई ने इनके खिलाफ शिकायत की थी.

रक्षा मंत्रालय सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों के पुनर्वास प्रशिक्षण पर सालाना तकरीबन 20 करोड़ रुपए खर्च करता है. यह प्रशिक्षण मान्यता प्राप्त अलग-अलग संस्थानों द्वारा दिया जाता है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय की एकीकृत वित्तीय इकाई ने अपनी जमीनी पड़ताल के बाद शिकायत की कि दिल्ली और गाजियाबाद में स्थित ऐसे कई संस्थानों का पता ही नहीं चल सका. जिनका पता चला उनमें से कइयों के पास आवश्यक आधारभूत ढांचा या संबद्धता नहीं है. वित्तीय इकाई ने आरंभिक जांच में पाया कि कई संस्थानों के बारे में सार्वजनिक स्तर पर कोई जानकारी ही नहीं है. न उनकी कोई वेबसाइट है न ई मेल पता. रक्षा मंत्रालय ने ऐसे संस्थानों की जांच के लिए पिछले महीने एक कमेटी का गठन किया है.

सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के पुनर्वास प्रशिक्षण की योजना की जिम्मेदारी महानिदेशक (पुनर्वास) की होती है. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2011 से 2014 के बीच में सेवानिवृत्त सैनिकों के पुनर्वास संबंधी प्रशिक्षण पर 70.36 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं. 2015-16 के दौरान इस काम के लिए 53 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) प्रभुदयाल मीणा का कहना है कि मंत्रालय की एकीकृत वित्तीय इकाई से शिकायत आने के बाद मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है. उनके मुताबिक ऐसे प्रशिक्षण संस्थानों का निरीक्षण जारी है और अभी कोई निष्कर्ष देना जल्दबाजी होगी.

पुनर्वास प्रशिक्षण योजना के तहत पूर्व सैनिकों को मॉडयूलर मैनेजमैंट, डेयरी फार्मिंग और गाड़ियों की मरम्मत जैसे काम सिखाए जाते हैं

पुनर्वास प्रशिक्षण योजना के तहत पूर्व सैनिकों को मॉडयूलर मैनेजमैंट, डेयरी फार्मिंग और गाड़ियों की मरम्मत जैसे काम सिखाए जाते हैं. योजना में वित्तीय अनियमितताओं का मसला पहली बार एकीकृत वित्तीय इकाई के प्रमुख सवितुर प्रसाद ने उठाया था. 11 मार्च, 2016 को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा था कि प्रशिक्षण योजना की रकम एकीकृत वित्तीय इकाई की अनुमति के बिना खर्च की जा रही है. उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों के चयन में तय दिशानिर्देशों के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया था. योजना के तहत केवल उन्हीं संस्थानों के चयन के निर्देश थे जिन्हें केंद्र, राज्य या पीएसयू द्वारा स्वीकृत किया गया हो. प्रसाद का आरोप था कि नियमों का उल्लंघन कर प्राइवेट सोसाइटी, ट्रस्ट और प्राइवेट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूटों का चयन किया जा रहा है. उन्होंने अपने पत्र में सिफारिश की थी कि जिन संस्थानों ने फर्जीवाड़ा किया है तो उनसे पैसे की वसूली की जाए और पिछले पांच या छह सालों में खर्च हुए 98.86 करोड़ रुपए की रकम कैसे खर्च हुई, इसकी जांच की जाए.

प्रसाद के पत्र के बाद एडिशनल कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस एकांउट्स अतुल सक्सेना ने प्रशिक्षण संस्थानों के चयन पर सवाल उठाया था. 11 अप्रैल 2016 को लिखे अपने एक पत्र में उन्होंने सवाल किया कि महानिदेशक (पुनर्वास) द्वारा हर मामले में अनुमति पत्र जारी क्यों नहीं किए गए.