पंजाब में 2017 विधानसभा चुनावों की तारीख जैसै-जैसे नजदीक आ रही है, सत्ताधारी गठबंधन के दोनों ही दलों शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी ने तीसरी बार सत्ता पाने की कोशिश में अपने वोटबैंक पर निगाह टिका दी है. दोनों ने अपने-अपने आधार को मजबूत करना शुरू कर दिया है.

पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने पंजाब में सफलतापूर्वक अपना आधार तैयार किया है. अकाली दल अपने पुराने पंथिक एजेंडे के साथ सूबे के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावशाली है, जबकि भाजपा हिंदू बहुल शहरी इलाकों में मजबूत है. पंजाब समेत चार राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

जमीन तैयार करने की मुहिम

पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में भाजपा आम तौर पर 23 पर चुनाव लड़ती है और शेष अकाली दल के लिए छोड़ देती है. माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों में भी सीटों के बंटवारे की यही व्यवस्था कायम रहेगी ताकि गठबंधन का आधार मजबूत रहे और वे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की कड़ी चुनौती का सामना कर सकें.

पिछले चंद महीनों में अकाली दल ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनका मकसद सिखों और किसानों का समर्थन हासिल करना रहा है. उधर, भाजपा हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत कर रही है.

पिछले चंद महीनों में अकाली दल ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनका मकसद सिखों और किसानों का समर्थन हासिल करना रहा है 

इसी साल मार्च में अकाली दल-भाजपा सरकार ने सतलुज यमुना नहर भूमि संपत्ति अधिकार स्थानांतरण बिल, 2016 पास कर देश को चौंका दिया था. यह कदम उसने किसानों को अपनी तरफ खींचने के लिए उठाया था. इस बिल में किसानों की उन जमीनों को लौटाने का प्रावधान किया गया था जिन्हें पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे के लिए नहर बनाने के मकसद से अधिगृहीत किया गया था. राज्य सरकार का यह फैसला तब आया जब पंजाब समझौता निरस्‍तीकरण अधिनियम 2004ए (जिसके जरिए पंजाब सरकार ने पड़ोसी राज्यों के साथ जल बंटवारे के सभी समझौते रद्द कर दिए थे) के बारे में सर्वोच्‍च न्‍यायालय में राष्‍ट्रपति की ओर से एक संदर्भ दायर किया गया है जिस पर निर्णय अभी लंबित है. स्थानीय नेताओं ने भी किसानों को उकसाया कि वे नहर के बन चुके हिस्सों को पाट दें.

उसके बाद पंजाब सरकार ने उसी महीने एक और बिल पास किया. इसमें सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब का अपमान करने वाले को उम्रकैद का प्रावधान किया गया था. यह बिल सूबे के गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी की हुई घटनाओं के बाद आया जिनके कारण राज्य सरकार की काफी आलोचना हुई थी.

अकाली दल ने केंद्र पर सिख गुरुद्वारा संशोधन बिल, 2016 पास करने का भी दबाव बनाया. इस बिल में प्रावधान है कि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के चुनावों में केवल अमृतधारी सिख ही वोट कर सकेंगे. इस संशोधन के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी पर शिरोमणि अकाली दल का नियंत्रण सुनिश्चित हो जाएगा. गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को सिखों की मिनी संसद माना जाता है. गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए इनके पास बहुत बड़ी रकम होती है.

गो-रक्षा की मुहिम

वहीं दूसरी और सरकार जूनियर पार्टनर भाजपा ने हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने के लिए गठबंधन में खुद को ताकतवर ढंग से पेश करना शुरू किया है. पार्टी व्यापारियों को रियायत दिलाने को लेकर भी आक्रामक तेवर अपनाए हुए है. हाल ही में भाजपा ने अकाली दल पर गो-रक्षा के लिए वित्तीय कोष बनाने का दबाव बनाया था. इसके बाद राज्य सरकार ने भारत में बनी विदेशी शराब (आईएमएफएल) की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपए और देसी शराब या बीयर की प्रत्येक बोतल पर पांच रुपए के गो-उपकर की व्यवस्था की. इस रकम का इस्तेमाल बेआसरा पशुओं के लिए चारे का इंतजाम करने और नई गोशालाएं बनाने के लिए किया जाएगा.

पंजाब में सालाना 2500 करोड़ रुपए की आईएमएफएल और बीयर बिकती है, यानी आईएमएफएल की तकरीबन 840 लाख और बीयर की 504 लाख बोतलें बिकती हैं. देसी शराब के लिए यह आंकड़ा 18.36 करोड़ बताया जाता है. राज्य सरकार में स्थानीय निकाय मंत्री और भाजपा सदस्य अनिल जोशी का कहना है कि गो उपकर के संबंध में नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जाएगा. सरकार ने शराब के अलावा प्रत्येक चारपहिया वाहन की खरीद पर 1000 और दोपहिया वाहनों पर 500 रुपए उपकर का प्रस्ताव भी दिया है.

जोगा की घटना के बाद पंजाब विधानसभा में गायों की आत्मा की शांति के लिए शोक प्रस्ताव रखने जैसा अप्रत्याशित कदम भी उठाया जा चुका है

यह ऐसे राज्य में हो रहा है जो पहले ही गाय के लिए पांच करोड़ रुपए का गोस्मारक-राष्ट्रीय शहीदी गोस्मारक- बनाने की योजना का गौरव हासिल कर चुका है. यह स्मारक मानसा जिले के जोगा गांव में बनाया जा रहा है जहां 2012 में एक पुरानी मिल के खंडहर में तकरीबन 50 गायों के अस्थि पंजर मिले थे. स्थानीय पंचायत के विरोध के कारण स्मारक निर्माण का काम रुका हुआ है हालांकि सरकार उससे बातचीत कर रही है.

दिलचस्प बात यह है कि जोगा की घटना के बाद पंजाब विधानसभा में गायों की आत्मा की शांति के लिए शोक प्रस्ताव रखने जैसा अप्रत्याशित कदम भी उठाया जा चुका है. सरकार के उस फैसले ने विधानसभा अधिकारियों को मुश्किल में डाल दिया था. वे यह नहीं समझ पा रहे थे कि शोक संदेश को भेजें किसे, क्योंकि परंपरा यह रही है कि शोकसंदेश मृतक के रिश्तेदार को भेजा जाता है.

पंजाब भारत के उन राज्यों में से एक है, जहां गोहत्या पर 10 साल की सजा दी जा सकती है. यहां पंजाब गो सेवा आयोग भी है जिसके चेयरमैन कीमती लाल भगत 22 करोड़ रुपए का बजट आवंटित करने की मांग करते रहे हैं.

2014 लोकसभा चुनावों में नरेंद मोदी की जीत और केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्य मेंं भी पार्टी ने खुद को ताकतवर ढंग से पेश करना शुरु कर दिया है. भाजपा की हाल की असम की जीत और अन्य राज्यों के बढ़िया प्रदर्शनों से गठबंधन को भी बल मिला है।

कांग्रेस को हुए नुकसान ने आगामी चुनाव में अकाली भाजपा गठबंधन की हैट-ट्रिक की उम्मीद बढ़ा दी है. हालांकि उन्हें आम आदमी पार्टी से भिड़ने के लिए भी खुद को तैयार करना पड़ेगा जिसने पहली बार राज्य के चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है.