पुलगांव स्थित आयुध डिपो में लगी आग ने गुड़गांव स्थित एयरफोर्स आयुध डिपो के इर्दगिर्द बसे लोगों को चिंता में डाल दिया है. उन्हें भय सताने लगा है कि पुलगांव जैसी त्रासदी गुड़गांव में हुई तो क्या होगा. खासकर आयुध डिपो के चारों तरफ 900 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में बसे लोग ज्यादा फिक्रमंद हैं. मंगलवार को पुलगांव स्थित सेना के सबसे बड़े आयुध भंडार में भीषण आग लग गई. इसमें सेना के दो अफसरों और एक जवान समेत 16 लोगों की मौत हो गई. महाराष्ट्र में वर्धा जिले में स्थित यह आयुध भंडार एशिया के सबसे बड़े हथियार भंडारों में से एक है.

गुड़गांव शहरी विकास प्राधिकरण के घनी आबादी वाले इलाके, जिनमें सेक्टर 14, 17, 18, 22, 23 शामिल हैं, और पुराने गुड़गांव के कई हिस्से आयुध डिपो के नजदीक बसे हैं. बहुत से सरकारी और मारुति सुजुकी सहित कई निजी कंपनियों के दफ्तर भी इसके आसपास ही हैं. डिपो के इर्दगिर्द प्रतिबंधित क्षेत्र में बीते दो दशकों में नेताओं और नौकरशाहों की शह पर ढेर सारे अवैध निर्माण किए गए, नतीजतन इस इलाके में आज तकरीबन डेढ़ लाख की आबादी रहती है.

द हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ समय पहले एमसीजी गुड़गांव के एक सर्वे में पाया गया था कि डिपो के इर्दगिर्द 2,325 एकड़ के क्षेत्र में 14,154 निर्माण किए जा चुके हैं. राज्य सरकार ने हाल ही में प्रतिबंधित क्षेत्र को घटाकर 300 मीटर कर दिया था. हालांकि उसके इस फैसले के विरोध में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है.

भारतीय सेना के लिए गुड़गांव का आयुध भंडार रणनीतिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण है. केंद्र में होने के कारण युद्ध की हालत में यहां से मोर्चों पर हथियार आसानी से भेजे जा सकते हैं. 

भारतीय सेना के लिए गुड़गांव का आयुध भंडार रणनीतिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण है. केंद्र में होने के कारण युद्ध की हालत में यहां से मोर्चों पर हथियार आसानी से भेजे जा सकते हैं. कारगिल युद्ध के दौरान विदेशों से हथियार मंगाए गए थे जिन्हें हवाई यातायात की सुविधा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट से गुड़गांव ही लाकर रखा गया.

लेकिन फिलहाल गुड़गांव के निवासियों को आयुध डिपो के रणनीतिक महत्व से अधिक अपनी चिंता सताने लगी है. अखबार से बातचीत में डिपो के करीब रहने वाले छत्रपाल यादव ने बताया कि उन्होंने 10 साल पहले जमीन खरीदी थी और उस समय किसी ने नहीं बताया कि यह जमीन अवैध है.

हालांकि गुड़गांव में रहे सेना के पूर्व अधिकारी ऐसी आशंकाओं को खारिज करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सेवानिवृत्त मेजर जनरल अशोक श्योरांव का कहना है कि पुलगांव असाधारण क्षति है लेकिन ऐसा कुछ भी गुड़गांव में नहीं हो सकता. उनके मुताबिक यहां हथियारों के रखरखाव के लिए आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जाता है और सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम हैं.