एक विशेष अदालत ने आज गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड मामले में फैसला सुना दिया है. 2002 में गोधराकांड के बाद हुए दंगों के दौरान इस सोसायटी में कांग्रेस के सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी.

गुलबर्ग हत्याकांड में 66 लोग आरोपित थे इनमें से अदालत ने 24 को दोषी करार दिया है. 11 लोगों को हत्या और 13 को अन्य अपराधों के लिए दोषी करार दिया गया है. पांच आरोपितों की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है.

बरी होने वाले प्रमुख लोगों में भाजपा के स्थानीय नेता और पार्षद बिपिन पटेल भी शामिल हैं. बिपिन असर्व नाम के उसी इलाके में रहा करते थे जहां गुलबर्ग सोसायटी है. कांग्रेस के एक पूर्व पार्षद मेघसिंह चौधरी भी मामले में आरोपित थे लेकिन अदालत ने उन्हें दोषी नहीं पाया है. इस मामले में एक पुलिस इंस्पेक्टर केजी एर्डा भी आरोपित थे और उन्हें भी अदालत ने बरी कर दिया है. वहीं विश्व हिंदू परिषद के सदस्य अतुल वैद्य को इस हत्याकांड में दोषी करार दिया गया है. सभी दोषियों को छह जून को सजा सुनाई जाएगी.

इस हत्याकांड में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं. एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने मोदी और 62 अन्य लोगों पर इस हत्याकांड की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ पुलिस एफआईआर दर्ज करवाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी. हालांकि 2007 में यह याचिका रद्द कर दी गई.

सुप्रीम कोर्ट ने गोधराकांड के बाद भड़के दंगों की कुल नौ घटनाओं की जांच के लिए एसआईटी नियुक्त की थी. इनमें गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड भी शामिल था. अगस्त, 2010 में उसने एसआईटी को अनुमति दी थी कि वह नरेंद्र मोदी और जाकिया जाफरी की याचिका में शामिल अन्य लोगों की दंगों में भूमिका की जांच करे. इस मामले में 2012 में एसआईटी ने नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दे दी थी.

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जाकिया जाफरी ने कहा है कि उन्हें अभी आधा इंसाफ ही मिला है और वे बाकी लोगों को रिहा किए जाने के विशेष अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी.

सीवान पत्रकार हत्याकांड के मुख्य आरोपित और शहाबुद्दीन के करीबी ने आत्मसमर्पण किया

पत्रकार राजदेव रंजन सिंह की हत्या के मुख्य आरोपित लड्डन मियां ने सीवान के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. लड्डन मियां को राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य और इस समय जेल में बंद पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का करीबी माना जाता है.

पिछले दिनों इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था. राजदेव की हत्या में इन लोगों की सीधी भूमिका थी और बिहार पुलिस के मुताबिक इन सभी ने बताया था लड्डन मियां के कहने पर उन्होंने हत्या की थी. बिहार पुलिस ने अपनी शुरुआती जांच के आधार पर यह भी कहा था कि इसके पीछे शहाबुद्दीन का हाथ होने की संभावना है.

राजदेव की हत्या के 15 दिन पहले ही लड्डन जेल से रिहा हुआ था. बिहार पुलिस के मुताबिक हत्या के दो घंटे बाद ही वह और उसका परिवार सीवान से बाहर चले गए थे.

राजदेव रंजन सीवान में हिंदुस्तान अखबार के ब्यूरो प्रमुख थे. बीस साल से पत्रकारिता कर रहे राजदेव ने जिले से जुड़े कई अपराधों पर रिपोर्टिंग की थी और जिनमें शहाबुद्दीन या उसके लोगों का नाम भी आया था. 13 मई को सीवान रेलवे स्टेशन के नजदीक राजदेव को पांच गोलियां मारी गई थीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी.