‘मौजूदा आरक्षण नीति में बदलाव की कोई योजना नहीं है और निजी क्षेत्र में आरक्षण का विचार केवल प्रस्ताव के स्तर पर ही है.’

— राम विलास पासवान, केंद्रीय खाद्य मंत्री

पासवान ने यह बात कुछ महीने पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की आरक्षण की समीक्षा करने वाली टिप्पणी से जुड़े एक सवाल पर कही. सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर कोल्हापुर पहुंचे पासवान ने कहा कि सरकार शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की नीति में कोई बदलाव नहीं करने जा रही. बिहार चुनाव से ऐन पहले आरक्षण पर भागवत की टिप्पणी ने विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा दे दिया था. हालांकि बाद में आरएसएस ने सफाई दी थी और भाजपा ने इस बयान से खुद को अलग कर लिया था. यहां तक कि चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपरोक्ष रूप से सफाई दी थी. लेकिन, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के बीच अच्छी बैठ रखने वाले लालू-नीतीश महागठबंधन ने इसे जमकर उछाला था. माना जाता है कि इस बयान ने भी भाजपा को जीत से दूर करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी.

‘पाकिस्तान से अब कश्मीर पर नहीं, बल्कि पाक अधिकृत कश्मीर पर बात होगी.’

— राजनाथ सिंह, गृहमंत्री

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात केंद्र सरकार के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर पठानकोट में एक आयोजन में कही. पठानकोट एयरबेस आतंकी हमले की जांच को लेकर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को एनआईए को अपने यहां आकर जांच करने का मौका देना चाहिए और यह उसके आतंकवाद विरोधी होने का सबूत होगा. गृहमंत्री ने कहा कि अगर पाकिस्तान भारत को जांच करने का मौका नहीं देता है तो इसका मतलब होगा कि उसने भारत को धोखा दिया है. जनवरी में हुए पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के पीछे भारत पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अजहर मसूद को जिम्मेदार बता रहा है. इसी मामले में मार्च में पाकिस्तान का संयुक्त जांच दल (जेआईटी) पठानकोट एयरबेस का दौरा भी कर चुका है. लेकिन, पाकिस्तान ने भारतीय जांच एजेंसी एनआईए को अपने यहां आकर जांच करने का मौका अब तक नहीं दिया है. पाकिस्तान ने पठानकोट हमले में अपनी भूमिका से भी इंकार किया है. इसी हफ्ते एनआईए प्रमुख शरद कुमार ने भी यह कह कर विवाद पैदा कर दिया था कि पठानकोट एयरबेस हमले में पाकिस्तान सरकार शामिल नहीं है.


‘अगर अखिलेश यादव को अपने चाचा शिवपाल से चाचा-भतीजे का रिश्ता रखना ही है तो यूपी की जनता से कह दें कि उन्हें जनता से कोई मतलब नहीं है.’

— अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए बढ़ती जा रही सियासी सरगर्मियों के बीच भाजपा अध्यक्ष ने यह बात कानपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने यूपी सरकार में कई मंत्रालयों का जिम्मा संभालने वाले शिवपाल यादव पर मथुरा की हिंसक घटना को अंजाम देने वाले मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव को संरक्षण देने का आरोप लगाया. शाह ने कहा, ‘मथुरा में जिस तरह से पुलिस अफसर मारे गए हैं, मैं मुलायम सिंह जी से कहना चाहता हूं कि अगर उनमें जरा सी भी नैतिकता हो तो शिवपाल यादव से तुरंत इस्तीफा ले लें.’ गुरुवार को मथुरा के जवाहर बाग की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भड़की हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों सहित 24 लोगों की मौत हो गई थी. रामवृक्ष यादव और उनके साथियों ने यहां पर पिछले दो साल से कब्जा कर रखा था. जवाहर बाग में जिस पैमाने पर अतिक्रमण था और पुलिस-प्रशासन ने उसे हटाने में जैसी लापरवाही दिखाई, उससे इसे राजनीतिक संरक्षण का मामला भी माना जा रहा है.


‘केवल नियम-कायदों से वन्यजीवों को नहीं बचा पाएंगे.’

— एमएस स्वामीनाथन, कृषि वैज्ञानिक

जाने-माने कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन का यह बयान विश्व पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले आया. उन्होंने कहा, ‘शिक्षा, सामाजिक सहयोग और नियम-कायदों पर एक साथ ध्यान देकर ही वन्यजीव संरक्षण हो पाएगा.’ एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक स्वामीनाथन ने कहा कि भारी कीमत के चलते देश में एक सींग वाले गैंडे और बाघ जैसे जीवों की जान जोखिम में पड़ी हुई है. हर साल पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. 1972 में स्टाकहोम में इसी दिन पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र की कॉन्फ्रेंस हुई थी. इस बार इसकी थीम ‘गो वाइल्ड फॉर लाइफ’ है, जबकि लक्ष्य सभी संकटग्रस्त प्रजातियों में दिलचस्पी जगाना और वन्यजीवों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ को बढ़ावा देना है.


‘जर्मनी की संसद ने जो फैसला किया है उसका कोई महत्व नहीं है. इस मामले में तुर्की अपना रुख नहीं बदलेगा.’

— रेचेप तैयप एर्दोऑन, तुर्की के राष्ट्रपति

एर्दोऑन का यह बयान उनकी अफ्रीका यात्रा के दौरान आया आया. गुरुवार को जर्मनी की संसद ने पहले विश्व युद्ध के दौरान तुर्की के ओटोमन साम्राज्य द्वारा अार्मेनियाई लोगों की हत्या को नरसंहार घोषित करते हुए प्रस्ताव पारित किया है. एर्दोऑन ने कहा कि बुंडेस्टाग (जर्मन संसद का निचला सदन) में मतदान के बाद जर्मनी के अधिकारी किस तरह से तुर्की के नेताओं का सामना करेंगे. इस घटना के बाद तुर्की ने जर्मनी से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है और आगे परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है. उन्होंने यह भी कहा कि अभी जर्मनी के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों पर बात करना बहुत जल्दबाजी होगी. जर्मनी की संसद से यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित हुआ है, जब यूरोपियन यूनियन के साथ तुर्की के संबंध उलझे हुए हैं. आर्मेनियाई लोगों का दावा है कि प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान तुर्की के अनातोलिया वाले हिस्से में क़रीब 15 लाख आर्मेनियाई और अन्य ईसाई अल्पसंख्यकों का कत्ल कर दिया गया. तुर्की इसे नरसंहार मानने से इंकार करता रहा है.