दिल्ली के नजदीक दादरी के बिसाहड़ा गांव में धार्मिक उन्माद की सियासत एक बार फिर उबाल लेने लगी है. सोमवार इस गांव में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई थी इसके बावजूद भाजपा और शिवसेना नेताओं ने यहां एक महापंचायत आयोजित करके मोहम्मद अखलाक के परिजनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

पिछले साल यहां गोमांस खाने के संदेह में मोहम्मद अखलाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. तब से यह गांव सांप्रदायिक राजनीति के चलते लगातार चर्चा में है. हाल ही में इस मामले पर मथुरा फॉरेंसिक लैब की एक रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक कथिततौर पर मोहम्मद अखलाक के घर से बरामद मांस गोमांस या इसी वंश से जुड़े किसी पशु का मांस था.

भाजपा नेता संजय राणा के आह्वान पर इस महापंचायत का आयोजन किया गया था. अखलाक की हत्या और हमले के आरोप में पुलिस ने जिन 18 लोगों को गिरफ्तार किया था उनमें संजय का बेटा विशाल भी शामिल था. संजय राणा ने रविवार को कहा था कि मथुरा फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में यह साबित होने के बाद कि अखलाक के फ्रिज में गोमांस ही था, पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी लेकिन इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. भाजपा नेता का कहना था कि शिकायत के बाद भी अखलाक के परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है इसलिए गांववालों ने महापंचायत के आयोजन का फैसला किया है.

इस महापंचायत में संजय राणा ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अखलाक के परिजनों के खिलाफ 20 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो जनता के गुस्से को रोक पाना मुश्किल हो जाएगा.

इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा महत्वपूर्ण पक्ष है कि महापंचायत का आयोजन पुलिस के आदेशों का उल्लंघन करके किया गया था. इससे पहले गौतम बु़द्ध नगर के जिलाधिकारी ने बिसाहड़ा में धारा 144 लगाने का आदेश दिया था. सोमवार की सुबह तक पुलिस कह रही थी कि बिसाहड़ा में पंचायत नहीं होने दी जाएगी क्योंकि ऐसा हुआ तो दादरी में नए सिरे से सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है.

इस आयोजन के बाद पुलिस ने स्पष्टीकरण दिया है कि गांव में शांति बनाए रखने के लिए पंचायत की इजाजत दी गई थी.

गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड के सभी दोषियों को मौत की सजा देने की मांग

2002 के गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड को बर्बर और अमानवीय बताते हुए अभियोजन पक्ष ने सभी 24 दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की है. यह मामला एक विशेष अदालत में चल रहा है जहां सोमवार को दोषियों की सजा पर बहस हुई थी. इस मामले पर अब अगली सुनवाई नौ जून को होगी. अदालत ने गुरुवार को गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड मामले के 66 अभियुक्तों में से 24 को दोषी ठहराया था.

गुजरात में हुए दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी में कांग्रेस के सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी. दंगों के वक्त वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. इस हत्याकांड में उनकी भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं. एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने मोदी और 62 अन्य लोगों पर इस हत्याकांड की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. हालांकि 2007 में यह याचिका रद्द कर दी गई.

सुप्रीम कोर्ट ने गोधराकांड के बाद भड़के दंगों की कुल नौ घटनाओं की जांच के लिए एसआईटी नियुक्त की थी. इनमें गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड भी शामिल था. अगस्त, 2010 में उसने एसआईटी को अनुमति दी थी कि वह नरेंद्र मोदी समेत जाकिया जाफरी की याचिका में शामिल अन्य लोगों की दंगों में भूमिका की जांच करे. इस मामले में 2012 में एसआईटी ने नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दे दी थी.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुशील कुमार की याचिका रद्द की

ओलंपिक खेलों में भारत को दो पदक दिला चुके पहलवान सुशील कुमार रियो ओलंपिक में शामिल नहीं हो पाएंगे. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका को रद्द कर दिया, जिसमें उन्होंने अदालत से निवेदन किया था कि वह भारतीय कुश्ती महासंघ को रियो ओलंपिक खेलों के लिए 74 किलो भारवर्ग में ट्रायल कराने का आदेश दे.

इस भारवर्ग में नरसिंह यादव पहले ही भारत की तरफ से क्वालिफाई कर चुके हैं. सुशील कुमार ने अदालत के जरिए मांग की थी कुश्ती महासंघ को उनके और नरसिंह के बीच मुकाबला करवाना चाहिए और जो बेहतर हो उसे ओलंपिक भेजा जाना चाहिए. सुशील कुमार की इस मांग को खारिज करते हुए जस्टिस मनमोहन ने कहा है कि वे महान पहलवान हैं, लेकिन कुश्ती महासंघ का यह तर्क कि 74 किलो भारवर्ग में नरसिंह यादव उनसे बेहतर प्रतिभागी हैं, सही है और वे इस फैसले गलत नहीं ठहरा सकते. साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि सुशील कुमार खुद भी पिछले ओलंपिक खेलों में बिना ट्रायल के शामिल हुए थे.

भारतीय कुश्ती महासंघ ने दिल्ली उच्च न्यायालय को दिए हलफनामे में 74 किलो भारवर्ग के अंतर्गत नरसिंह यादव को सुशील कुमार से बेहतर उम्मीदवार बताया था. महासंघ ने यह भी कहा था कि सुशील पिछले दो सालों में चयन के लिए हुए ट्रायल में नरसिंह से मुकाबला करने से बचते रहे हैं. कुश्ती महासंघ ने अदालत को दिए हलफनामे में कहा था कि नरसिंह यादव 74 किलो भारवर्ग में 2006 से खेल रहे हैं, जबकि सुशील जनवरी, 2014 तक 66 किग्रा भारवर्ग में खेलते रहे हैं.

सुशील कुमार 66 किलो भारवर्ग में 2008 के बीजिंग ओलंपिक का कांस्य पदक, 2010 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का स्वर्ण और 2012 के लंदन ओलंपिक का रजत पदक जीत चुके हैं.