कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ एक बिल्डिंग के निर्माण की बकाया राशि का भुगतान न करने के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है. तिरुवनंतपुरम में राजीव गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के नाम से यह बिल्डिंग केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने बनवाई थी.

केपीसीसी ने 2005 में हीथर कंस्ट्रक्शन को यह बिल्डिंग बनाने का ठेका दिया था. इस कंपनी ने 2013 में बिल्डिंग बना दी थी और 2015 में इसका उद्घाटन हुआ था.

हीथर कंस्ट्रक्शन के एक मैनेजिंग पार्टनर राजीव का कहना है कि कांग्रेस की तरफ से आज तक उन्हें बिल्डिंग का बकाया भुगतान नहीं मिला है. उनके मुताबिक वे इस मुद्दे पर केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी और गृहमंत्री रमेश चेन्निथला से कई बार मिले थे और उन्हें हरबार 2.80 करोड़ रुपये की बकाया रकम के भुगतान का आश्वासन दिया गया लेकिन रकम आज तक नहीं मिली.

मीडिया में आई कुछ खबरों के मुताबिक राज्य कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी के चलते कंपनी को उसका बकाया नहीं मिल पाया है.

इससे पहले हीथर कंस्ट्रक्शन ने कांग्रेस अध्यक्ष, ओमन चांडी और रमेश चेन्निथला सहित पार्टी के पांच नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा था. सोनिया गांधी के अलावा जिन लोगों के नाम नोटिस में शामिल थे वे सभी इंस्टिट्यूट की गवर्निंग बॉडी में शामिल थे. यह नोटिस केरल विधानसभा चुनाव के बाद भेजा गया था लेकिन अब तक इसका कोई जवाब नहीं दिया गया. हीथर कंस्ट्रक्शन ने इसके बाद सोनिया गांधी समेत इन नेताओं के नाम पर अपना बकाया भुगतान न करने के लिए एफआईआर दर्ज करवाई है.

बिहार सचिवालय से ‘चारा घोटाले’ से जुड़ी फाइलें गुम हुईं

पटना स्थित सचिवालय में पशुपालन और मत्स्यपालन विभाग से कुछ महत्वपूर्ण फाइलें गुम हो गई हैं. समाचार एजेंसी एएनआई ने एक सूत्र के हवाले से कहा है कि ये फाइलें 1990 के दशक में सुर्खियों में आए चारा घोटाले से संबंधित हैं. फाइलों की गुमशुदगी पर पुराना सचिवालय पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई है.

इस बीच भाजपा नेता नितिन नवीन ने नीतीश कुमार सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है, ‘नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि वे किस तरह लालू यादव को बचा रहे हैं. ये गुम हुई फाइलें लालू यादव से संबंधित थीं.’

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले में सरकारी खजाने को तकरीबन 9.4 अरब रुपये की चपत लगाई गई थी. बिहार में कई सालों तक पशुपालन विभाग ने चारे और अन्य मदों के तहत अलग-अलग जिलों में फर्जी बिल के आधार पर कोषागार से पैसा निकाला था. इसे ही चारा घोटाला कहा जाता है.

1990 से 1997 तक लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे. कहा जाता है उनकी और बिहार के कई राजनेताओं की मिलीभगत से चारा घोटाले को अंजाम दिया गया था. लालू प्रसाद यादव पर इस मामले में अभी-भी केस चल रहा है.