श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग ने ‘विश्व संस्कृति महोत्सव’ पर जुर्माने की राशि जमा की | सोमवार, 06 जून 2016

आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग (एओएल) फाउंडेशन ने ‘पर्यावरण क्षतिपूर्ति’ के रूप में उसपर लगाए गए जुर्माने की 4.75 करोड़ रुपये की रकम जमा करा दी है. इससे पहले इस मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) पर कई सुनवाई हुई थीं और एनजीटी ने पिछले हफ्ते ही फाउंडेशन को यह रकम जमा करवाने के निर्देश दिए थे.

एओएल फाउंडेशन की तरफ से जारी एक स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘हमने तीन जून को 4.75 करोड़ रुपये की रकम एक डिमांड ड्राफ्ट के जरिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के खाते में जमा करवा दी है.’ उधर डीडीए के प्रिंसिपल कमिश्नर जेपी अग्रवाल ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस पैसे का उपयोग यमुना किनारे पर्यावरण विकास के लिए किया जाएगा.

बीते मार्च में एओएल फाउंडेशन ने यमुना के किनारे तीन दिवसीय विश्व संस्कृति महोत्सव का आयोजन किया था. इस आयोजन पर कई पर्यावरण संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था. इनका कहना था कि यमुना की तलहटी पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है और कार्यक्रम से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा.

इस मामले पर विवाद बढ़ने के बाद एनजीटी ने इसमें दखल दिया था और फाउंडेशन को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया था. ट्रिब्यूनल ने उसी समय एओएल फाउंडेशन पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया था. इसके बाद फाउंडेशन ने कार्यक्रम शुरू होने के पहले जुर्माना राशि में से 25 लाख रुपये जमा करवा दिए थे और बाकी पैसा जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था. अप्रैल की शुरुआत में फाउंडेशन ने एनजीटी में एक याचिका दायर कर कहा था कि वह 4.75 करोड़ रुपये की राशि का सीधे भुगतान नहीं करेगा और वह बैंक गारंटी (बैंक मध्यस्थ रहेगा) के जरिए इस रकम से यमुना के किनारे बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करना चाहता है. 31 मई को एनजीटी ने यह याचिका ठुकराते हुए फाउंडेशन को बाकी रकम तीन जून तक जमा करने का आदेश दिया था.

प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी कामयाबी, एमटीसीआर भारत को सदस्य बनाने पर सहमत हुआ | मंगलवार, 07 जून 2016

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भारत को बड़ी सफलता मिली है. अब भारत के लिए मिसाइल तकनीक के प्रसार पर नजर रखने वाले देशों के समूह मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का सदस्य बनने का रास्ता साफ हो गया है. इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर हैं और एमटीसीआर में भारत के प्रवेश को उनकी कूटनीतिक जीत कहा जा रहा है.

भारत ने 34 देशों वाले समूह एमटीसीआर की सदस्यता के लिए आवेदन दिया था. सोमवार को भारत की सदस्यता पर आपत्ति जताने का आखिरी दिन था और किसी भी सदस्य देश ने इसपर आपत्ति नहीं जताई.

एमटीसीआर के चार सदस्य देशों के राजनयिकों ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि भारत के खिलाफ आपत्ति दर्ज न होने की वजह से अब 'साइलेंट प्रोसीजर' या मूक प्रक्रिया के तहत भारत को स्वतः ही समूह में प्रवेश मिल जाएगा. एमटीसीआर में प्रवेश के बाद भारत उच्च स्तर की मिसाइल तकनीक और उच्च क्षमता वाले ड्रोन खरीद सकेगा साथ ही कुछ नियमों के तहत इनका निर्यात भी कर सकेगा.

एमटीसीआर की स्थापना 1987 में मानव रहित सामूहिक विनाश के हथियारों की प्रणाली का प्रसार रोकने के लिए हुई थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च तकनीक के प्रसार को नियंत्रण में रखने की चार प्रमुख व्यवस्थाएं हैं जिनमें परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों का समूह एनएसजी भी शामिल है. भारत ने पिछले महीने एनएसजी में शामिल होने के लिए भी आवेदन दिया है. एनएसजी नौ जून को वियना में और 24 जून को सोल में होने वाली बैठकों में उसके आवेदन पर विचार करेगा.

बिहार सचिवालय से ‘चारा घोटाले’ से जुड़ी फाइलें गुम हुईं | बुधवार, 08 जून 2016

पटना स्थित सचिवालय में पशुपालन और मत्स्यपालन विभाग से कुछ महत्वपूर्ण फाइलें गुम हो गई हैं. समाचार एजेंसी एएनआई ने एक सूत्र के हवाले से कहा है कि ये फाइलें 1990 के दशक में सुर्खियों में आए चारा घोटाले से संबंधित हैं. फाइलों की गुमशुदगी पर पुराना सचिवालय पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई है.

इस बीच भाजपा नेता नितिन नवीन ने नीतीश कुमार सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है, ‘नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि वे किस तरह लालू यादव को बचा रहे हैं. ये गुम हुई फाइलें लालू यादव से संबंधित थीं.’

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले में सरकारी खजाने को तकरीबन 9.4 अरब रुपये की चपत लगाई गई थी. बिहार में कई सालों तक पशुपालन विभाग ने चारे और अन्य मदों के तहत अलग-अलग जिलों में फर्जी बिल के आधार पर कोषागार से पैसा निकाला था. इसे ही चारा घोटाला कहा जाता है.

1990 से 1997 तक लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे. कहा जाता है उनकी और बिहार के कई राजनेताओं की मिलीभगत से चारा घोटाले को अंजाम दिया गया था. लालू प्रसाद यादव पर इस मामले में अभी-भी केस चल रहा है.

भगवान स्वामीनारायण की मूर्ति को संघ की पोशाक पहनाने पर विवाद | गुरुवार, 09 जून 2016

गुजरात के एक स्कूल में भगवान स्वामीनारायण की मूर्ति को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पोशाक पहनाने पर विवाद हो गया है. कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

सूरत जिले के लस्काना गांव के स्वामीनारायण मिशन स्कूल में भगवान स्वामीनारायण की मूर्ति को आरएसस की पोशाक - खाकी पैंट, सफेद शर्ट और काली टोपी पहनाई गई है. मूर्ति के हाथ में तिरंगा भी है. यह स्कूल स्वामीनारायण संप्रदाय का है, जिसका संचालन स्वामीनारायण गुरुकुल विद्यालय द्वारा किया जाता है. आरएसस ने हाल ही में अपने सदस्यों के लिए इस स्कूल में शिविर लगाया था. रविवार को उस शिविर का आखिरी दिन था और कहा जा रहा है कि उसी दिन भगवान स्वामीनारायण को यह पोशाक पहनाई गई.

स्वामीनारायण मंदिर के संचालक स्वामी विश्वप्रकाशजी ने जानकारी दी है कि यह पोशाक स्थानीय भक्तों ने भेंट की थी. उनके मुताबिक, 'हमारे यहां भगवान की मूर्ति को अलग-अलग पोशाकें पहनाने की परंपरा है.' उन्होंने स्पष्ट किया है मूर्ति को संघ की पोशाक पहनाने के पीछे कोई एजेंडा नहीं है.

कांग्रेस के नेता शंकर सिंह बाघेला ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है, 'आप भगवान को संघ की पोशाक पहनाकर क्या साबित करना चाहते हैं? जिन्होंने यह किया है मुझे उन पर दया आती है. आज भगवान की मूर्ति को आरएसएस की पोशाक पहनाई गई है, कल बीजेपी की पहना दी जाएगी.' वहीं गुजरात भाजपा अध्यक्ष विजय रूपानी ने भी इस मामले पर आश्चर्य जताया है. उनका कहना है कि जो भी किया गया वह ठीक नहीं है.

'उड़ता पंजाब' के निर्माता फिल्म से एक दृश्य काटने पर राजी हुए | शुक्रवार, 10 जून 2016

मुंबई उच्च न्यायालय के जोर देने पर उड़ता पंजाब के निर्माता फिल्म का एक दृश्य काटने के लिए तैयार हो गए है. इस दृश्य में फिल्म के मुख्य किरदार को भीड़ के सामने पेशाब करते दिखाया गया है. सेंसर बोर्ड ने उड़ता पंजाब के निर्माताओं को जिन 89 दृश्यों को काटने का आदेश दिया था उनमें यह दृश्य भी शामिल था. सेंसर बोर्ड ने जिन अन्य दृश्यों पर आपत्ति जताई थी मुंबई उच्च न्यायालय उनपर सोमवार को फैसला सुनाएगा.

दो जजों की पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सेंसर बोर्ड को लताड़ भी लगाई. अदालत ने इस दौरान कहा है - सेेंसर बोर्ड को अपना रवैया बदलने की जरूरत है. दर्शकों को यह तय करने दीजिए कि फिल्म अच्छी है या बुरी. चाहे टीवी हो या सिनेमा, इसे लोगों को सौंप दीजिए और उन्हें तय करने दीजिए कि क्या देखना है और कब टीवी बंद कर देनी है.

उड़ता पंजाब को सेंसर किए जाने के विरोध में फिल्म के निर्माताओं - फैंटम फिल्म्स और बालाजी मोशन पिक्चर्स ने कोर्ट में याचिका डाली है.

इस फिल्म की कहानी पंजाब में युवाओं के बीच फैली ड्रग्स की समस्या पर आधारित है. पिछले दिनों सेंसर बोर्ड द्वारा इसके नाम सहित कई दृश्यों पर आपत्ति जताने के बाद से इस मसले पर भारी विवाद चल रहा है. उड़ता पंजाब 17 जून को रिलीज होनी है.

डॉ नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में सनातन संस्था का कार्यकर्ता गिरफ्तार | शनिवार, 11 जून 2016

डॉ नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में सीबीआई ने शुक्रवार की रात सनातन संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ता वीरेंद्र तावड़े को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी से पहले तावड़े से उसके बेलापुर स्थित कार्यालय पर पूछताछ की गई थी.

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुंबई मिरर को बताया है कि तावड़े पर हत्या और हत्या के षडयंत्र का मुकदमा चलेगा. तावड़े पर आरोप है कि वह दाभोलकर की हत्या से पहले और बाद में मामले के मुख्य संदिग्ध सारंग आकोलकर के संपर्क में था. तावड़े उन आरोपितों के संपर्क में भी था जिन्होंने दाभोलकर की हत्या की थी.

डॉ नरेंद्र दाभोलकर महाराष्ट्र में अपने अंधविश्वास विरोधी अभियान के लिए मशहूर थे. पुणे में 20 अगस्त 2013 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.