‘इस पूरी कहानी का लब्लोलुआब यह है कि रिपोर्ट में छेड़छाड़ भी सच को नहीं छिपा सकती.’

— पी चिदंबरम, पूर्व गृहमंत्री

चिदंबरम का यह बयान इशरत जहां केस से जुड़ी फाइलें गुम होने के मामले में आई जांच रिपोर्ट पर आया. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार हलफनामों से जुड़ी दो फाइलों को लेकर ‘फर्जी विवाद’ खड़ा कर रही है. चिदंबरम ने कहा कि इशरत जहां और अन्य तीन लोगों का एनकाउंटर सही था या फर्जी था, यह असल मुद्दा है और यह सच अदालत से ही बाहर आ पाएगा, जिसकी सुनवाई जुलाई 2013 से रुकी हुई है. बुधवार को गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव बीके प्रसाद की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय जांच आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट गृहसचिव राजीव महर्षि को सौंपी थी. इसमें कहा गया है कि पांच में से चार दस्तावेज अभी गायब हैं. हालांकि, एक अखबार ने अपनी खबर में कहा है कि प्रसाद ने गवाहों को सवाल और उनके जवाब पहले से रटवा दिए थे. गृह मंत्रालय से गुम दस्तावेजों को इशरत जहां एनकाउंटर में पेश दूसरे हलफनामे के बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है. इसमें पहले हलफनामे के उलट कहा गया था कि इशरत जहां के आतंकी संगठन लश्कर से जुड़े होने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं. इशरत जहां मुठभेड़ का मुद्दा फरवरी में दोबारा चर्चा में आ गया था. तब 2008 के मुंबई आतंकी हमले में दोषी करार पाकिस्तानी-अमेरिकी नागरिक और लश्कर-ए-तैय्यबा के सदस्य डेविड हेडली ने मुंबई कोर्ट को बताया था कि इशरत जहां एक आतंकी संगठन से जुड़ी थी.

‘कंपनियों और बड़े लोगों की ओर से सबसे ज्यादा बिजली चोरी होती है.’

— पीयूष गोयल, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री

ऊर्जा मंत्री गोयल ने यह बात गोवा में राज्यों के बिजली मंत्रियों की एक बैठक में कही. बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, ‘लाइनमैन और विभाग के अधिकारियों को रिश्वत दी जाती है. इसमें नेता भी शामिल हो सकते हैं.’ गुजरात का उदाहरण देते हुए गोयल ने कहा कि बिजली चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने से कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होता. उन्होंने कहा, ‘इस बारे में मुझे कोई शक नहीं है कि हम अगले दो-तीन वर्षों में सभी घरों तक 24 घंटे सस्ती व प्रदूषणमुक्त बिजली पहुंचाने में सफल होंगे.’ केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने बिजली चोरी रोकने के लिए ‘गांधीगीरी’ की तर्ज पर ‘ऊर्जागीरी’ अभियान चलाने की भी योजना बनाई है. भारत में बिजली चोरी बड़ी समस्या है. देश में औसत तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान (एटीएंडसी) 28-29 फीसदी रहता है जो उत्तर प्रदेश और झारखंड में 30 और 32 फीसदी तक पहुंच जाता है. इसमें बिजली आपूर्ति में होने वाला नुकसान और चोरी शामिल होती है. खबरों के मुताबिक अकेले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सालाना 1000 से 1300 करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है.


‘डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत के आधार पर तेल के दाम तय करने की नीति बदलनी चाहिए.’

— जे जयललिता, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री

जयललिता का यह बयान डीजल और पेट्रोल की कीमत में हालिया बढ़ोतरी पर आया. बढ़ी कीमत को वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2014 से अब तक कई किस्तों में पेट्रोल की कीमत 11.77 रुपये और डीजल की कीमत 13.57 रुपये बढ़ा दी है. एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता ने कहा, ‘उत्पाद शुल्क बढ़ाते हुए कच्चे तेल के दाम में आई गिरावट को जनता तक न पहुंचने देने की नीति सही नहीं है.’ उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल का दाम बढ़ने से जरूरी वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी जिससे कम आमदनी वाले लोग प्रभावित होंगे. जयललिता की यह मांग ऐसे समय में आयी है जब केंद्र सरकार राज्यसभा में अटके वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को पारित कराने में उनसे मदद मिलने की उम्मीद संजोए हुए है. ऐसे में अगर जयललिता तेल दाम तय करने की नीति में बदलाव की मांग को लेकर गंभीर होती हैं तो जीएसटी बिल पारित होने में बाधा आ सकती है. यह भी है कि जीएसटी प्रावधानों के लागू होने पर राजस्व नुकसान की आशंका की वजह से तमिलनाडु पहले से ही इसके पक्ष में नहीं है.


‘केजरीवाल जो कहते हैं उस पर मुश्किल से खरे उतरते हैं.’

— उदित राज, भाजपा सांसद

उदित राज का यह बयान केजरीवाल की आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को लेकर आया. उन्होंने कहा, ‘केजरीवाल ने चुनाव के समय कई चीजों का वादा किया था. इनमें सस्ती बिजली, सस्ता पानी और अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने की बातें शामिल थीं. लेकिन, एक भी पूरी नहीं हो पाई हैं इसलिए वे जनता का ध्येयान भटकाने के लिए भाजपा पर आरोप लगाने का खेल खेलते हैं.’ केजरीवाल की कथनी और करनी में अंतर का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘अलका लांबा जी को सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ रही है.’ चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा को पार्टी लाइन से हटकर बयान देने की वजह से आप ने प्रवक्ता पद से हटा दिया है. परिवहन मंत्री गोपाल राय के पद छोड़ने को लेकर उन्होंने कहा था कि प्रीमियम बस सेवा योजना में भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें पद से हटाया गया है, जबकि आम आदमी पार्टी और खुद गोपाय राय यह कहते रहे हैं कि वे सेहत की वजह से पद से हटे हैं.


‘सारे हो हल्ले के बीच मैं सोचता हूं कि यूरोप के साथ रहने में हमारा हित है.’

— मेहमत सिमसेक, तुर्की के उप प्रधानमंत्री

सिमसेक का यह बयान ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन (ईयू) से अलग होने की संभावना को लेकर आया. अंकारा में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘अपने नजरिए से हम यूरोप को प्रेरणा, कानून के शासन को मजबूत करने वाले संदर्भ बिंदु और लोकतंत्र के मानकों को विस्तार देने वाले स्रोत के रूप में देखते हैं. मैं नहीं समझता कि आसपास के क्षेत्रों में ईयू को तुर्की से बेहतर कोई विकल्प मिल सकेगा.’ सिमसेक ने कहा कि यूरोप को हमें समझने की कोशिश करनी चाहिए. तुर्की के साथ यूरोप के रिश्तों में उस वक्त खटास आ गई थी जब यूरोप ने शरणार्थियों की समस्या से निपटने के लिए तुर्की पर मानवाधिकारों के आधार पर आतंकरोधी कानूनों को शिथिल करने की मांग रखी थी. यूरोप के इस दबाव के बाद तुर्की राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोऑन का बयान आया था कि ‘हम अपने रास्ते पर और आप अपने रास्ते पर.’ मानवाधिकार समूहों की ओर से यह बात उठती रही है कि तुर्की आतंकरोधी कानूनों का इस्तेमाल असहमतियों को दबाने में करता है. इसके जवाब में तुर्की का कहना है कि ये कानून कुर्दिश और इस्लामिक स्टेट के आतंकियों से लड़ने के लिए बेहद जरूरी हैं.