‘जाति राष्ट्र विरोधी है क्योंकि यह राष्ट्र को बांटती है. हम राष्ट्रवादी होना चाहते हैं, राष्ट्र विरोधी नहीं जिसके लिए ऐसे सारे विभाजनों को खत्म करना जरूरी है.’ 

— अमर्त्य सेन, नोबल पुरस्कार प्राप्त अर्थशास्त्री

सेन ने यह बात लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में डॉ भीमराव अंबेडकर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही. उनका कहना था, ‘भारत में एक बात लगातार विस्तार लेती जा रही है जिसमें उन लोगों को राष्ट्रविरोधी कहा जाने लगता है जो एक खास सोच का समर्थन नहीं करते.’ सेन ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स के छात्र रहे डॉ अंबेडकर को ‘महान सामाजिक क्रांतिकारी’ और ‘बौद्धिकता का पॉवरहाउस’ बताया. उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा के जरिए ही हम दुनिया में कोई बदलाव ला सकते हैं और यही वह सोच है जो एक संगठित राष्ट्र के लिए बाबा साहेब ने हमें दी है. भारतीय संविधान को आकार देने वाले डॉ अंबेडकर 1916 में लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स पढ़ने पहुंचे थे. उन्होंने यहां से अपनी पीएचडी पूरी की थी. .

‘नरेंद्र मोदी सरकार सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. विदेशों में जमा काला धन बहुत जल्द भारत वापस लाया जाएगा.’

— रामविलास पासवान, केंद्रीय खाद्य मंत्री

केंद्रीय मंत्री पासवान ने यह बात झारखंड़ में एक आम सभा में कही. उन्होंने कहा कि बीते दो साल के कार्यकाल में एक भी मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप न लगना मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है. 2014 के आम चुनाव में भ्रष्टाचार और विदेशों में काला धन के मुद्दे पर जमकर राजनीति हुई थी. यूपीए सरकार के कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप और विदेशों में जमा काला धन चुनावी मुद्दे बन गए थे. तब नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी सभा में कहा था कि अगर काला धन वापस आ जाए तो सबके खातों में 15-15 लाख रुपये आ सकते हैं. हालांकि सरकार बनने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लोगों के खाते में 15-15 लाख रुपये पहुंचने की बात को महज चुनावी जुमला बताकर खारिज कर दिया था.


‘हमने 15-16 साल इंतजार किया है. मैं सोचता हूं कि हम निष्कर्ष निकलने की तरफ बढ़ रहे हैं.’

— मनोहर पर्रिकर, रक्षा मंत्री

पर्रिकर का यह बयान 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के सिलसिले में आया. स्वदेशी हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर 40 एयरक्राफ्ट की पहली उड़ान देखने के बाद बेंगलूरू में उन्होंने कहा कि इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने इसे अंतिम मुकाम तक पहुंचने की उम्मीद जताई थी लेकिन, अब बात विमानों की कीमत पर अटकी हुई है. पर्रिकर ने कहा, ‘यह काफी बड़ा सौदा है. इसके लिए हमें सचेत रहना होगा क्योंकि, 0.1 फीसदी की बचत भी करोड़ों रुपये के बराबर होगी. यह काम धैर्य के साथ होगा.’ पिछले साल राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़ी वाणिज्यिक बातचीत टूट गई थी. इसके बाद पीएम मोदी और ओलांद ने मामले में हस्तक्षेप किया था और सरकारों के स्तर पर इस सौदे को आगे बढ़ाने की सहमति बनी थी. चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायु सेना के लिए राफेल विमान बेहद अहम माने जा रहे हैं.


‘यह गलत न्याय है. अदालत ने मेरे साथ अन्याय किया है.’

— जकिया जाफरी, दंगे में मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी

जकिया जाफरी का यह बयान गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार मामले में दोषियों को मिली सजा पर आया. विशेष एसआईटी अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं यह नहीं समझ पा रही हूं कि केवल 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा क्यों मिली जबकि कुछ लोगों को सात साल से लेकर 11 साल तक जेल की सजा ही दी गई. ऐसी संकीर्ण सोच क्यों अपनाई गई जबकि सभी लोग उस हिंसक भीड़ का हिस्सा थे जिसने गुलबर्ग सोसाइटी के भीतर लोगों को मारा था?’ उनका यह भी कहना था कि उनके पति और पूर्व सांसद एहसान जाफरी की जिस क्रूरता के साथ हत्या हुई थी अदालत का फैसला उस अपराध के साथ न्याय नहीं करता. गुजरात में 2012 के दंगों में गुलबर्ग सोसाइटी के भीतर हिंसक भीड़ ने 69 लोगों की हत्या कर दी थी. दूसरी तरफ मामले की जांच करने वाले पूर्व एसआईटी अध्यक्ष आरके राघवन ने इस फैसले का स्वागत किया है.


‘भारत में धार्मिक सहिष्णुता घट रही है और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामले बढ़ रहे हैं.’

— रॉबर्ट पी जॉर्ज, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के पूर्व अध्यक्ष

जॉर्ज ने यह बात वैश्विक मामलों से जुड़ी अमेरिकी संसद की एक उपसमिति की सुनवाई के दौरान कही. उन्होंने कहा, ‘पिछले साल अल्पसंख्यक समुदायों, खास तौर पर ईसाई, मुस्लिम और सिखों के साथ धमकी, उत्पीड़न और हिंसा की बहुतेरी घटनाएं हुईं. इन घटनाओं के पीछे हिंदू राष्ट्रवादी समूहों का हाथ था.’ उन्होंने कहा, ‘सत्ताधारी दल भाजपा के सदस्यों ने खास रणनीति के तहत ऐसे समूहों का समर्थन किया और तनाव भड़काने के लिए धार्मिक विभाजन लाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया.’ सांसदों के सामने उन्होंने भारत में धर्म परिवर्तन, बूचड़खानों को रोकने के लिए कानूनों की सख्ती और गैर-सरकारी संगठनों पर विदेश से धन लेने पर लगाई जा रही पाबंदी के विषय को भी रखा. विधिशात्री जॉर्ज ने पिछले साल भी दलितों को मंदिरों में जाने से रोकने का मुद्दा उठाया था.