‘भारतीय अर्थव्यवस्था ब्रेक्जिट के परिणामों को सहने के लिए पूरी तरह तैयार है. केंद्र सरकार का लक्ष्य इसके प्रभाव को न्यूनतम बनाना है.’

— अरुण जेटली, वित्त मंत्री

वित्त मंत्री जेटली का यह बयान ब्रिटेन में जनमत संग्रह के परिणाम के बाद आया. यह नतीजा यूरोपियन यूनियन से अलग होने के पक्ष में आया है. उन्होंने कहा, ‘मैं अक्सर कहता हूं कि वैश्वीकृत दुनिया में अस्थिरता और अनिश्चितता नए नियम हैं. जाहिर है कि इस फैसले से अनिश्चितता बढ़ेगी क्योंकि ब्रिटेन, यूरोप और बाकी दुनिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसके बारे में अभी कुछ निश्चित तौर पर कह पाना संभव नहीं है.’ उधर आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने भी कहा है कि आरबीआई किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है. ब्रिटेन में 52 फीसदी लोगों ने ईयू से अलग होने के पक्ष में मतदान किया. इसके बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने पद छोड़ने की घोषणा कर दी. इसका असर दुनिया के सभी शेयर बाजारों में देखा गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में 604.51 अंकों और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ्टी में 181 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

‘अपनी सरकार की विफलता छिपाने के लिए वे (केजरीवाल) रोज नए मुद्दे उछालते हैं.’

— कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा नेता

विजयवर्गीय का यह बयान दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने को लेकर ब्रिटेन की तर्ज पर जनमत संग्रह कराने की केजरीवाल की घोषणा पर आया. उन्होंने कहा, ‘एक जनमत संग्रह तो इस बात का भी होना चाहिए कि उन्होंने चुनाव से पहले जनता से जो वादे किए थे वे पूरे हुए हैं या नहीं.’ उधर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी केजरीवाल पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि केजरीवाल जब से दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं प्रशासनिक काम छोड़कर बाकी सारे काम कर रहे हैं. ब्रिटेन में जनमत संग्रह का परिणाम आने के बाद केजरीवाल ने ट्वीट किया था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे पर जनता की राय जानने के लिए जल्द ही ऐसा जनमत संग्रह कराया जाएगा. आप सरकार लगातार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करती रही है. पिछले महीने इसको लेकर एक विधेयक का मसौदा भी जारी किया गया था.


‘भारत में सामाजिक आंकड़ों को जुटाने की व्यवस्था में सब कुछ ठीक नहीं है.’

— हामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति अंसारी ने यह बात पटना में सामाजिक सांख्यिकी पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में कही. उन्होंने कहा, ‘भारत जैसे विकासशील देश को अपनी आबादी के बारे में सटीक सामाजिक-आर्थिक सूचनाओं की जरूरत होती है ताकि इनके आधार पर बेहतर नीतियां बनाई जा सकें.’ उन्होंने आंकड़ों की गुणवत्ता के सवाल के साथ-साथ आंकड़ों को जुटाने में सरकारी विभागों के बीच दोहराव, राष्ट्रीय आंकड़ों तक पहुंच के सुलभ न होने और सरकारी मशीनरी की ओर से एकत्रित आंकड़ों से गोपनीयता के उल्लंघन जैसी चिंताओं को सामने रखा. फ्रांस के अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी की टिप्पणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में असमानता के स्तर को लेकर निष्कर्ष निकालने के मामले में सामाजिक आंकड़े सक्षम साबित नहीं होते. सम्मेलन का आयोजन एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर किया गया था.


‘संसद के मानसून सत्र में नया उपभोक्ता संरक्षण कानून लाया जाएगा. इसके आधार पर गुमराह करने वाले विज्ञापनों से जुड़ी चर्चित हस्तियों और अन्य लोगों पर कार्रवाई की जा सकेगी’

— रामविलास पासवान, केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री

केंद्रीय मंत्री पासवान ने यह बात भ्रामक विज्ञापन करने वाली चर्चित हस्तियों की जवाबदेही तय करने को लेकर कही. उन्होंने कहा, ‘नए कानून के तहत चर्चित हस्तियों को किसी उत्पाद के विज्ञापन की गुणवत्ता के लिए जवाबदेह माना जाएगा.’ इससे पहले व्यापारियों की संस्था ‘अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ’ (सीएआईटी) ने केंद्रीय मंत्री पासवान को पत्र लिखकर भ्रामक विज्ञापन करने वालों को कानून के दायरे में लाने और उनकी जवाबदेही तय करने की मांग की थी. सीएआईटी ने अपने पत्र में ब्रांड एंबेसडर के लिए विशेष दिशा-निर्देश बनाने की मांग की थी. एक संसदीय समिति भी चर्चित हस्तियों को भ्रामक विज्ञापनों के लिए जवाबदेह बनाने की सिफारिश कर चुकी है. समिति ने पहली बार भ्रामक प्रचार करने पर 10 लाख रुपये जुर्माना या दो साल की सजा या सजा व जुर्माना दोनों लगाने, जबकि दूसरी बार भ्रामक विज्ञापन करते पाए जाने पर 50 लाख रुपये जुर्माना या पांच साल की सजा देने का प्रावधान शामिल करने की सिफारिश की थी.


‘फीस में बढ़ोतरी के बावजूद भारत को पहले जितना 70 फीसदी एच-1बी वीजा मिलता रहेगा.’

— रिचर्ड वर्मा, भारत में अमेरिका के राजदूत

अमेरिकी राजदूत वर्मा ने यह बात अमेरिका की ओर से वीजा फीस बढ़ाए जाने के मुद्दे पर कही. उन्होंने कहा कि भारत को एच-1बी और एल-1 वीजा में पहले जितना हिस्सा मिलता रहेगा. हैदराबाद में ‘द फ्यूचर इज नाउः फ्रॉम सीओपी21 टू रियलिटी’ विषय पर आयोजित सेमिनार के दौरान हुई बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हम फीस बढ़ोतरी की चिंताओं को समझ रहे हैं. मेरा मानना है कि यह जारी रहने वाली चर्चा है.’ वर्मा ने कहा कि लोगों को यह समझना होगा कि यह अमेरिका में यात्रा और व्यापारिक उद्यम का महत्वपूर्ण हिस्सा है. पिछले साल दिसंबर में अमेरिका ने अपने वीजा कानूनों में संशोधन कर वीजा शुल्क को बढ़ा दिया था. इसके बाद भारतीय कंपनियों पर प्रति एच-1बी वीजा कम से कम 4000 हजार डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है.