भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की नसीहत का कोई असर नहीं पड़ा है. उल्टा उन्होंने शुक्रवार को जेटली पर ही परोक्ष रूप से हमला बोल दिया. स्वामी ने कहा, 'लोग बिना मांगे मुझे अनुशासित रहने और चुप रहने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन वे यह नहीं समझ रहे हैं कि यदि मैं अनुशासन का सम्मान नहीं करूं तो खून-खराबा हो जाएगा.' स्वामी ने इसके बाद भी वित्त मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जेटली ने उनके बारे में क्या कहा उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, वे केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से बात करते हैं.

स्वामी ने ये बातें जेटली के उस बयान के जवाब में कहीं हैं जिसमें उन्होंने स्वामी का नाम लिए बिना उन्हें नसीहत देते हुए कहा था कि पार्टी के नेताओं को अनुशासन याद रखना चाहिए. वहीं, शुक्रवार को समाचार एजेंसी पीटीआई ने भाजपा के कुछ सूत्रों के हवाले से बताया कि पार्टी आलाकमान स्वामी के बयानों से नाराज है, लेकिन, पार्टी उनपर कोई कार्रवाई करने से पहले कुछ दिन और इंतजार करना चाहती है.

पीटीआई के अनुसार, संघ ने भी साफ़ कर दिया है कि वह स्वामी की इन हरकतों के लिए उनका समर्थन नहीं करेगा. माना जाता है कि स्वामी को संघ का मजबूत समर्थन हासिल है और उसी के कहने पर भाजपा आलाकमान ने उन्हें राज्यसभा भेजा था.

ओडिशा में केंद्रीय मंत्रियों पर बीजेडी कार्यकर्ताओं ने हमला बोला

ओडिशा के बारगढ़ में शुक्रवार को मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाने पहुंचे भाजपा के दो मंत्रियों पर बीजू जनता दल (बीजेडी) के कार्यकर्ताओं ने हमला बोल दिया. पीटीआई के मुताबिक केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और साध्वी निरंजन ज्योति बारगढ़ में भाजपा की 'विकास पर्व रैली' में शिरकत करने पहुंचे थे. इन दोनों को इस रैली के जरिये लोगों को केंद्र सरकार की दो साल की उपलब्धियां बतानी थीं. भाजपा पूरे उड़ीसा में ऐसी कई रैलियां आयोजित कर रही है.

बताया जाता है कि दोनों केंद्रीय मंत्रियों के इस रैली में पहुंचते ही स्थानीय बीजेडी विधायक देवेश आचार्य अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ रैली स्थल पहुंच गए. इन लोगों ने पहले भाजपा नेताओं को नारेबाजी करते हुए काले झंडे दिखाए. जब पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की तो इन्होने मंत्रियों की गाड़ी पर पथराव शुरू कर दिया जिसमें वे बाल-बाल बच गए.

मामला और ज्यादा बढ़ने से पहले ही पुलिस ने मंत्री जी की गाड़ी को सुरक्षित बाहर निकलवा दिया. वहीं, इस मामले में पुलिस ने विधायक देवेश आचार्य सहित 100 बीजेडी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है. भाजपा ने इसे मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के इशारे पर किया गया हमला बताया है. विधायक देवेश आचार्य बीजेडी से राज्‍यसभा सांसद और पूर्व मंत्री प्रसन्‍ना आचार्य के बेटे हैं.

गृह मंत्रालय ने लोकपाल सहित दिल्ली सरकार के 14 विधेयक लौटाए

गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार द्वारा विधानसभा में पारित किए गए 14 विधेयकों को लौटा दिया है. मंत्रालय का कहना है कि इन विधेयकों को पारित करने में आप सरकार ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया था. मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि दिल्ली संघ शासित प्रदेश है, इस नाते अगर यहां की सरकार कानून बनाना चाहती है तो पहले उसे वह बिल गृह मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजना होगा. इसके बाद ही विधानसभा में बिल पेश किया जाएगा. यहां से पारित होने के बाद यह विधेयक उपराज्यपाल के पास जाएगा और फिर केंद्र सरकार से होते हुए राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

अधिकारी का कहना है कि आप सरकार ने इन विधेयकों को विधानसभा से पारित कराने से पहले केंद्र की मंजूरी नहीं ली थी जिस कारण इन विधेयकों को राज्य सरकार को वापस भेज दिया गया है. खबरों के मुताबिक, लौटाए गए विधेयकों में जनलोकपाल और आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को अयोग्यता से बचाने के लिए संसदीय सचिव के पद को ‘लाभ का पद’ के दायरे से बाहर करने वाला विधेयक भी शामिल है.

इस मामले में केजरीवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, ‘मोदी जी आप से फिर हाथ जोड़कर निवेदन है - थोड़ा बड़ा दिल कीजिए, दिल्ली की हार को भुला दीजिए और इस तरह से दिल्ली के लोगों से बदला मत लीजिए.’