आरजेडी के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन ने नीतीश कुमार की सरकार से अपनी जान का खतरा बताया है. भागलपुर जेल में बंद शहाबुद्दीन ने अपनी सुरक्षा के लिए सीवान के स्पेशल कोर्ट में एक याचिका दायर की है. इसमें कहा गया है कि उसे सीवान से भागलपुर जेल में भेजना राज्य सरकार की साजिश का हिस्सा है जो उसे खत्म कर देना चाहती है. याचिका में कहा गया है कि पिछले कुछ समय से शहाबुद्दीन पीठ के दर्द से काफी ज्यादा पीड़ित है लेकिन सरकार उसके इलाज का कोई इंतजाम नहीं कर रही है.

शहाबुद्दीन की ओर से कोर्ट को बताया गया है कि इस मामले में केंद्र सरकार ने उसे दिल्ली के एम्स में इलाज कराने की अनुमति दे दी है लेकिन नीतीश सरकार उसे दिल्ली नहीं भेज रही है. याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि सरकार मुसलमान होने की वजह से शहाबुद्दीन के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है. खबरों के अनुसार शहाबुद्दीन ने सीवान के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्‍या के मामले का जिक्र किए बिना याचिका में दावा किया है कि सरकार उसे एक झूठे केस में फंसाने की कोशिश कर रही है. इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी.

बीते मई माह में सीवान जिले के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्‍या हुई थी. पुलिस ने इस मामले में शहाबुद्दीन के प्रमुख गुर्गे लड्डन मियां को मुख्‍य आरोपी बनाया था. बताया जाता है कि मियां ने इस हत्याकांड को अंजाम देने से पहले कई बार शहाबुद्दीन से जेल में मुलाकात की थी और जेल से ही उसे इसके लिए आदेश मिला था. इस मामले की जांच को शहाबुद्दीन प्रभावित न कर सके इसलिए राज्य सरकार ने उसे सीवान से भागलपुर जेल भेज दिया था.

एनआईए की विशेष अदालत ने प्रज्ञा ठाकुर की जमानत याचिका खारिज की

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने मालेगांव बम धमाके की आरोपित साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की जमानत याचिका खारिज कर दी है. खबरों के अनुसार कोर्ट ने साध्वी के ख‍िलाफ सबूत न होने के एनआईए के दावे को सही नहीं माना. कोर्ट का कहना था कि इस मामले में कई ठोस सबूत हैं, जो प्रथम दृष्टया प्रज्ञा ठाकुर को दोषी ठहराते हैं. उसके अनुसार इस सबूत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि जिस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल बम रखने के लिए हुआ था वह साध्वी के नाम पर पंजीकृत थी.

पिछले महीने 13 मई को एनआईए ने अपनी पूरक चार्जशीट में साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित छह लोगों को क्लीनचिट दे दी थी. एनआईए ने कहा था कि इन लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है. इसके बाद प्रज्ञा सिंह को जमानत मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी.

2008 में हुए मालेगांव बम धमाके में छह लोगों की मौत हुई थी जबकि 101 लोग घायल हो गए थे. महाराष्ट्र एटीएस की जांच में पाया गया था कि धमाके में जिस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल हुआ था वह साध्वी प्रज्ञा सिंह के नाम पर पंजीकृत थी. हालांकि, इस पर प्रज्ञा सिंह का कहना था कि उनकी मोटरसाइकिल को दो साल पहले से रामचंद्र कालसांगरा इस्तेमाल कर रहा था, जो अब तक फरार है.

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच जजों के बंटवारे पर हाईकोर्ट और निचली अदालतों के जज आमने-सामने

हैदराबाद हाईकोर्ट द्वारा निचली अदालत के कई जजों को बर्खास्त करने के विरोध में तेलंगाना में 200 जज 15 दिनों के सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं. रविवार को तेलंगाना जज एसोसिएशन ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर तेलंगाना में नियुक्त किए गए आंध्रप्रदेश के न्यायिक अधिकारियों को वापस बुलाने की मांग की थी. हाईकोर्ट ने इसे अनुशासनहीनता का मामला मानते हुए सोमवार को दो और मंगलवार को नौ जजों को बर्खास्त कर दिया था.

तेलंगाना जज एसोसिएशन के अनुसार, राज्य की निचली अदालतों में नियुक्त 130 न्यायिक अधिकारी आंध्रप्रदेश के रहने वाले हैं और इनकी नियुक्तियों में हाईकोर्ट ने आंध्रप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2014 के नियमों का पालन नहीं किया है. इस कानून के मुताबिक राज्य में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के जजों की नियुक्ति 40 : 60 के अनुपात में की जानी थीं. जज एसोसिएशन के मुताबिक हैदराबाद हाईकोर्ट के 21 में से 18 जज आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं इसलिए भी हाइकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के जजों की तेलंगाना में नियुक्ति को मंजूरी दी होगी. इस मामले में तेलंगाना सरकार का कहना है कि तेलंगाना में अपने जजों और न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त कर आंध्रप्रदेश सरकार उसके नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को परेशान करना चाहती है.

जजों के आवंटन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब अलग हाईकोर्ट की मांग में भी तब्दील होता जा रहा है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव तेलंगाना के लिए अलग हाईकोर्ट की मांग को लेकर दिल्ली में धरना देने की तैयारी कर रहे हैं.