टाइम्स नाउ न्यूज चैनल द्वारा लिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू पर इन दिनों काफी बहस छिड़ी हुई है. इस बहस के बीच यूएई के एक पत्रकार बॉबी नकवी ने प्रधानमंत्री के साथ साक्षात्कार का अपना अनुभव फेसबुक पर साझा किया है. पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के अगले दिन और यूएई दौरे पर नरेंद्र मोदी के जाने से पहले बॉबी ने दिल्ली में उनका इंटरव्यू किया था.

बॉबी ने दावा किया है कि काफी प्रयासों के बाद हुए इस साक्षात्कार से पहले ही उनसे सारे प्रश्नों की सूची मांग ली गई थी. बॉबी के मुताबिक साक्षात्कार से कुछ मिनट पहले ही पीएमओ के अधिकारियों द्वारा उनसे यह भी कहा गया कि वे प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान उनसे केवल एक सवाल ही पूछ सकते हैं. उनसे कहा गया कि मुलाकात के बाद बाहर निकलने पर उन्हें अन्य सवालों के लिखित जवाब दे दिए जायेंगे.

बॉबी नकवी के मुताबिक वे काफी लंबी और बोझिल प्रक्रियाओं से गुजरे थे, लेकिन फिर भी उन्हें मनचाहा साक्षात्कार नहीं मिल पाया. बॉबी ने फेसबुक पर आगे लिखा है कि जब उन्होंने पढ़ा कि प्रधानमंत्री के 'टाइम्स नाउ' को इंटरव्यू देने से पहले चैनल से प्रश्नों की सूची मांगी गई थी तो इस बात पर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ.

सुप्रीम कोर्ट का ट्रांसजेंडर की परिभाषा में संशोधन से इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने किन्नरों को ‘थर्ड जेंडर’ के रूप में मान्यता देने वाले अपने एक आदेश में बदलाव करने से इंकार कर दिया है. 'ट्रांसजेंडर' की परिभाषा पर स्पष्टीकरण की मांग करने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर जस्टिस एके सीकरी और एनवी रमन्ना की बेंच ने कहा कि लेस्बियन, गे और बाइसेक्सुअल ट्रांसजेंडर नहीं हैं, यह बात 15 अप्रैल 2014 के आदेश में स्पष्ट थी. हालांकि, सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता मनिंदर सिंह का कहना था कि उस आदेश से यह बात स्पष्ट नहीं हो पा रही थी.

ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं के वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि केंद्र सरकार दो साल से अस्पष्टता का बहाना बनाकर 2014 का आदेश लागू नहीं कर रही है. बेंच ने अतिरिक्त महाधिवक्ता से कहा कि इस मामले में अब भी किसी तरह के स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं है और इस मामले को खारिज किया जाता है.

15 अप्रैल 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर को महिला या पुरुष से अलग थर्ड जेंडर माना था और उनके आर्थिक-सामाजिक पिछड़ेपन को देखते हुए उन्हें ओबीसी की तरह आरक्षण देने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण के साथ लेस्बियन, गे और बाइसेक्सुअल लोगों को ‘थर्ड जेंडर’ के रूप में मान्यता देने की मांग भी खारिज हो गई है.

मायावती पर टिकट बिक्री का आरोप लगाते हुए एक और वरिष्ठ नेता ने साथ छोड़ा

यूपी चुनाव से पहले बसपा एक नई चुनौती में घिरती नजर आ रही है. एक-एक कर उसके पुराने नेता पार्टी से अलग होते जा रहे हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी छोड़ने के बाद गुरुवार को वरिष्ठ नेता आरके चौधरी ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. बसपा सरकार में मंत्री रहे चौधरी ने कहा, ‘टिकट उन लोगों को मिल रहे हैं जो ज्यादा रकम दे रहे हैं.’ कांसीराम के वफादारों में शामिल रहे चौधरी ने बसपा प्रमुख मायावती पर कांसीराम के विचारों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मायावती द्वारा विधानसभा चुनाव के टिकटों की बिक्री करते देखकर घुटन हो रही है इसलिए वे पार्टी छोड़ रहे हैं.

चौधरी ने कहा कि आने वाले समय में कुछ और लोग भी पार्टी छोड़ सकते हैं. चौधरी को 2001 में आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी लाइन का विरोध करने के चलते बसपा से निकाल दिया गया था. 2013 में लगभग 11 साल बाद वे फिर से बसपा में लौटे थे. चौधरी से पहले पिछले हफ्ते विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी मायावती पर टिकटों की बोली लगाने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.