बांग्लादेश के बाद सऊदी अरब में हुए बम धमाकों के तार भी पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं. सऊदी अरब के गृह मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी बयान में कहा गया है कि जेद्दा की मस्जिद के करीब हमला करने वाला आत्मघाती हमलावर अब्दुल्ला गुलजार खान पाकिस्तानी नागरिक था. बयान के मुताबिक 12 साल पहले अपने परिवार के साथ सऊदी अरब आया खान टैक्सी चलाता था. जेद्दा के सुलेमान फकीह अस्पताल की पार्किंग में यह आत्मघाती हमला सोमवार सुबह हुआ था. माना जा रहा है कि हमला अस्पताल के करीब स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास और जेद्दा मस्जिद को निशाना बनाते हुए किया गया था.

सोमवार को सऊदी अरब में कतीफ़ और मदीना शहर की मस्जिदों के करीब भी हमले हुए थे. मदीना में पैगंबर मुहम्मद की मस्जिद के नज़दीक हुए आत्मघाती हमले में चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी. अभी तक इन हमलों की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है.

नेपाल सरकार ने भारतीय जोड़े के एवरेस्ट फ़तह करने के दावे की जांच के आदेश दिए

एक भारतीय पर्वतारोही जोड़े के माउंट एवरेस्ट फ़तह करने के फर्जी फोटो दिखाने की खबरों के बाद नेपाल सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. भारत के पुणे के रहने वाले दिनेश और तारकेश्वरी राठौड़ ने 23 मई को दावा किया था कि वे ऐसे पहले जोड़े हैं माउंट एवरेस्ट फतह किया है. नेपाल पर्यटन विभाग के प्रमुख सुदर्शन प्रसाद ढकाल का कहना है कि विभाग ने तस्वीरों और एवरेस्ट बेस कैंप के सरकारी अधिकारियों से बात करने के बाद इस जोड़े को एवरेस्ट पर जाने का प्रमाण पत्र दे दिया था. उनके अनुसार पिछले दिनों उन्हें इस जोड़े के द्वारा दी गई तस्वीरों के फर्जी होने की शिकायत मिली है जिसके बाद इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

पुणे पुलिस के कांस्टेबल दिनेश और तारकेश्वरी राठौड़ के एवरेस्ट फतह करने की खबर अखबार में आने के बाद इनके कुछ साथी पर्वतारोहियों ने आरोप लगाया था कि इन दोनों ने इसकी जाली तस्वीरें बनवाई हैं. नेपाली मीडिया के अनुसार यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो उन्हें मिला प्रमाण पत्र रद्द कर दिया जाएगा और उनके नेपाल में पर्वतारोहण पर प्रतिबंध भी लगा दिया जाएगा.

नासा का अंतरिक्ष यान जूनो पांच साल बाद बृहस्पति की कक्षा में दाखिल हुआ

सौर-उर्जा से संचालित नासा का अंतरिक्ष यान 'जूनो' प्रक्षेपण के पांच साल बाद बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश कर गया है. नासा के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें गुरुवार को करीब 54 करोड़ मील दूर स्थित इस यान से उसके बृहस्पति की परिक्रमा करने के संकेत मिले हैं. एजेंसी के मुताबिक उसकी यह उपलब्धि सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति की उत्पत्ति और उसके विकास को समझने में बड़ी भूमिका निभाएगी.

बताया जाता है कि जूनो अपने साथ ऐसे नौ वैज्ञानिक उपकरण लेकर गया है जो बृहस्पति की ठोस सतह का अध्ययन करने और उसके शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र को मापने के साथ ही वहां मौजूद जल और अमोनिया की मात्रा का भी विश्लेषण करेंगे. नासा के अनुसार उसका यह अभियान सौरमंडल के बाकी ग्रहों को एकसाथ रखने में बृहस्पति की भूमिका को समझने में भी मदद करेगा. 'जूनो' को पांच अगस्त 2011 को फ्लोरिडा स्थित केप केनेवरेल एयरफोर्स स्टेशन से छोड़ा गया था.