केंद्रीय मंत्रिपरिषद में विस्तार के बाद मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार ने मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव कर दिया है. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, स्मृति ईरानी से मानव संसाधन विकास मंत्रालय वापस लेकर आज ही कैबिनेट मंत्री बने प्रकाश जावड़ेकर को दे दिया गया है. स्मृति ईरानी को इसकी जगह कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली से सूचना व प्रसारण मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी वापस लेकर वैंकैया नायडू को सौंपी गई है जिनके पुराने, संसदीय कार्य मंत्रालय का कार्यभार अब रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार संभालेंगे. आज ही राज्यमंत्री बने एसएस अहलूवालिया को संसदीय कार्य मंत्रालय में अनंत कुमार का सहयोगी बनाया गया है. चौधरी बीरेंद्र सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर के मंत्रालयों की आपस में अदला-बदली हुई है. अब बीरेंद्र सिंह इस्पात और तोमर ग्रामीण विकास मंत्रालय देखेंगे.

मंत्रिमंडल की इस फेरबदल में सदानंद गौड़ा के स्थान पर रविशंकर प्रसाद को देश का नया कानून मंत्री बनाया गया है और दूरसंचार मंत्रालय की जिम्मेदारी अब पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को दे दी गई है. सदानंद गौड़ा अब सांख्यिकी एवं कार्याक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय देखेंगे.

मंगलवार को मंत्रिपरिषद में शामिल हुए विजय गोयल को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है. सर्बानंद सोनोवाल के असम का मुख्यमंत्री बनने के बाद से खेल मंत्री का पद खाली था. विजय गोयल वाजपेयी सरकार में खेल एवं युवा मामलों के राज्य मंत्री रह चुके हैं.

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमजे अकबर को नया विदेश राज्यमंत्री और अपना दल की अनुप्रिया पटेल को स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाया है. रामदास अठावले को सामाजिक न्याय मंत्रालय और सीआर चौधरी को उपभोक्ता मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है.

मंगलवार के विस्तार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या संख्या 78 हो गई है.

एएससीआई ने बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि’ के कई विज्ञापनों को भ्रामक बताया

एक महीने के भीतर यह दूसरा मौका है जब योग गुरू बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के उत्पादों के विज्ञापनों पर सवाल उठा है. 'एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया' (एएससीआई) ने पतंजलि के कई उत्पादों के विज्ञापनों को भ्रामक और प्रतिस्पर्धी उत्पादों पर आक्षेप करने वाला बताया है. खबरों के मुताबिक, एएससीआई की उपभोक्ता शिकायत परिषद (सीसीसी) ने ‘दंत कांति’ टूथपेस्ट के विज्ञापन को भ्रामक जबकि ‘कच्ची घानी’ सरसो का तेल, फलों के रस और पशु चारे ‘दुग्धामृत’ के विज्ञापनों को अस्पष्ट बताया है.

देश में विज्ञापनों की निगरानी करने वाली संस्था एएससीआई ने ‘दंत कांति’ के विज्ञापन में पायरिया, मसूड़ों में सूजन और खून आना, दांतों का पीलापन, पानी लगने व मुंह की बदबू जैसी समस्या को दूर करने के दावे को आधारहीन व गुमराह करने वाला बताया है. एएससीआई ने अन्य कंपनियों जैसे हिंदुस्तान यूनीलीवर, प्रॉक्टर एंड गैम्बेल, केलॉग इंडिया, लॉरेल इंडिया और कॉलगेट-पामोलिव के विज्ञापनों को भी भ्रामक बताते हुए उनसे जुड़ी शिकायतों को भी सही माना है. उदाहरण के लिए ‘रेक्सोना रोल ऑन’ के विज्ञापन में सुगंध के टिकाऊपन और ‘न्यू गार्नियर व्हाइट कंपलीट डबल एक्शन फेसवॉश’ के विज्ञापन में तुरंत गोरापन देने जैसे दावों को एएससीआई ने बेबुनियाद बताया है.

विभिन्न शिकायतों पर दिये गए एएससीआई के ये निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले हफ्ते ही उसने खानपान की सामग्री से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए देश के सर्वोच्च खाद्य नियामक फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेटर ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के साथ एक समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं.

कैबिनेट ने बॉम्बे, मद्रास हाईकोर्ट के नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने बॉम्बे और मद्रास हाईकोर्ट के नाम बदलने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इससे दोनों न्यायालयों के नाम बदलकर उनके शहरों - मुंबई और चेन्नई - के नाम के मुताबिक हो जाएंगे. 1995 में बंबई और 1996 में मद्रास का नाम बदलकर मुंबई और चेन्नई रखा गया था. इसके बाद से यहां के हाईकोर्ट का नाम बदलने की मांग लगातार होती रही है. कैबिनेट की बैठक के बाद दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जानकारी दी कि बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता हाईकोर्ट के नामों में बदलाव करने वाले प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. लेकिन, बाद में जारी आधिकारिक रिलीज में कलकत्ता हाईकोर्ट का नाम शामिल नहीं था.

खबरों के मुताबिक, चूंकि भारत में हाईकोर्ट का नाम बदलने के लिए कोई अलग से कानून नहीं है, इसलिए इंडियन हाईकोर्ट एक्ट-1861 के तहत बने इन दोनों हाईकोर्ट का नाम बदलने के लिए कानून मंत्रालय जल्द ही संसद में एक विधेयक लाएगा.