केंद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को अल्पसंख्यक संस्थान न मानने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी अपील को वापस लेने का फैसला किया है. पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के समय यह अपील की गई थी. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एएमयू प्रशासन ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के मुताबिक केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर उसे अपने इस फैसले की जानकारी दी है. 1967 में आए सुप्रीम कोर्ट के ही एक फैसले का हवाला देकर इस हलफनामे में कहा गया है कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है क्योंकि इसे अंग्रेजी राज में सरकार ने स्थापित किया था न कि अल्पसंख्यक समुदाय ने. रोहतगी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश को बेअसर करने के लिए 1981 में एएमयू एक्ट को बदला गया था जिसे 2005 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया.

अभी तीन सदस्यीय बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. लेकिन, खबर यह भी है कि इसे संविधान पीठ को सौंपा जा सकता है. फिलहाल कोर्ट ने एएमयू प्रशासन से इस पर अपना पक्ष रखने को कहा है.

विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक के कार्यालय के बाहर पुलिस तैनात

इस्लामिक वक्ता जाकिर नाइक की संस्था 'इस्लामिक रिसर्च सेंटर' के दक्षिण मुंबई स्थित कार्यालय के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ऐसा हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए एहतियात के तौर पर किया गया है. अधिकारी ने इस बात से इंकार किया कि इसके लिए पुलिस को केंद्र या राज्य सरकार से कोई निर्देश मिला है.

खबरों के मुताबिक, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को नाइक के भाषण जुटाने और इस पर एक जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है. सूचना और प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने भी नाइक के भाषणों को ‘अत्यधिक आपत्तिजनक’ करार देते हुए कहा है कि गृह मंत्रालय इनकी पड़ताल करने के बाद इन पर उचित कार्रवाई करेगा.

एक जुलाई को ढाका के रेस्टोरेंट में हुए आतंकी हमले में 22 लोग मारे गए थे. वहां के अखबार डेली स्टार ने कहा गया था कि आतंकी हमले में शामिल रोहन इम्तियाज जाकिर नाइक के ‘वक्तव्यों’ से प्रेरित था. विवादित भाषणों की वजह से जाकिर नाइक पर ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया ने प्रतिबंध लगा रखा है.

फ्रांस ने कावेरी इंजन परियोजना को दोबारा खड़ा करने में मदद का प्रस्ताव रखा

फ्रांस ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के लिए इंजन तैयार करने में विफल रही कावेरी इंजन परियोजना को दोबारा खड़ा करने में भारत की मदद की पेशकश की है. फ्रांस ने भारत के सामने यह प्रस्ताव राफेल लड़ाकू विमानों के खरीद समझौते में मौजूद 'ऑफसेट क्लॉज' की वजह से रखा है. हाल ही में वायु सेना में शामिल किये गये तेजस में अमेरिकी इंजन लगा हुआ है.

रॉफेल सौदे की अनुमानित लागत 7.89 अरब यूरो या करीब 59 हजार करोड़ रुपये है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, फ्रांस से उड़ान भरने योग्य 36 रॉफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की फाइल अपने अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखे जाने की संभावना है. रॉफेल विमानों के इस सौदे में 50 फीसदी का एक ‘ऑफसेट क्लाज’ शामिल है. इसके तहत सौदे की कीमत का 30 फीसदी हिस्सा भारत में मिलिट्री एयरोस्पेस रिसर्च में जबकि 20 फीसदी हिस्सा राफेल विमानों के कलपुर्जे बनाने के संयत्र में निवेश किया जाएगा.

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, ऑफसेट प्रतिबद्धता के तहत फ्रांस के साथ स्टील्थ (रडार की पहुंच से बचने की तकनीक), रडार और मिसाइल वेक्टरिंग तकनीक देने पर शुरुआती सहमति पहले ही बन चुकी है.