मणिपुर में फर्जी मुठभेड़ों के मामले में सेना और केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दो दशकों में मणिपुर में हुए सभी एनकाउंटरों की जांच के आदेश दे दिए हैं. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में सेना की कार्रवाई के विरोध में दायर की गई एक याचिका की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है. इंफाल की एक सामाजिक संस्था और एनकाउंटरों में मारे गए लोगों के परिवारों द्वारा दायर की गई इस याचिका में करीब 1500 एनकाउंटरों की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने की मांग की गई थी.

कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पिछले दो दशकों में सेना और पुलिस द्वारा किए गए 1528 एनकाउंटरों की स्वतंत्र जांच होना जरूरी है. अदालत ने कहा कि कौन सी एजेंसी यह जांच करेगी, यह बाद में तय किया जाएगा. कोर्ट ने केंद्र से इन सभी मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी है. साथ ही उसने यह आदेश भी दिया है कि मणिपुर में अफ्स्पा लगे होने और वहां अशांति होने के बावजूद अपने अभियानों के दौरान सेना अत्यधिक बल का उपयोग नहीं कर सकती है.

इससे पहले 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व न्यायाधीश संतोष हेगड़े की अध्यक्षता वाली एक समिति को करीब 60 एनकाउंटरों की जांच करने को कहा था. जांच में सभी एनकाउंटर फर्जी पाए गए थे जिसके बाद हेगड़े ने कोर्ट से 1500 एनकाउंटरों की जांच कराए जाने की सिफारिश की थी. उधर, केंद्र सरकार हेगड़े जांच रिपोर्ट को गलत बताती है. उसका कहना है कि ये एनकाउंटर विदेशी ताकतों को रोकने और देश की संप्रभुता की रक्षा करने के लिए की गईं जरूरी मुठभेड़ें थीं.

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी मुठभेड़ में मारा गया, विरोध में हुर्रियत ने कश्मीर बंद बुलाया

जम्मू-कश्मीर में सेना को एक बड़ी कामयाबी मिली है. शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर बुरहान वानी को एनकाउंटर में मार गिराया है. बुरहान के सिर पर 10 लाख का इनाम था और सेना उसे काफी लंबे समय से तलाश कर रही थी. जम्मू-कश्मीर पुलिस के प्रमुख के राजेंद्र ने बताया, 'हिजबुल मुजाहिदीन का पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी एक एनकाउंटर में दो अन्य आतंकियों के साथ मारा गया है.' उनके अनुसार, पुलिस को इनके अनंतनाग जिले के बुमदूरा गांव में छिपे होने की सूचना मिली थी जिसके बाद पुलिस और सेना ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर इन्हें मार गिराया.

21 बर्षीय बुरहान वानी दक्ष‍िण कश्मीर के त्राल के एक स्कूल हेडमास्टर का बेटा था. वह 2010 में हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था. उसका मुख्य काम सोशल मीडिया के जरिए कश्मीर के युवकों को भड़काना और संगठन में भर्ती करना था. इस घटना के विरोध में हुर्रियत नेता सयैद अली शाह गिलानी ने कल जम्मू-कश्मीर बंद का ऐलान किया है.

गुजरात हाईकोर्ट ने हार्दिक पटेल को सशर्त जमानत दी

गुजरात हाईकोर्ट ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को राजद्रोह के मामलों में जमानत दे दी है. कोर्ट ने उन्हें यह जमानत सशर्त दी है जिसके अनुसार उन्हें जेल से छूटने के बाद छह महीने राज्य से बाहर गुजारने पड़ेंगे. हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के बाद भी हार्दिक को अभी जेल में ही रहना होगा. क्योंकि, उन्हें गुजरात के विसनगर में हुई हिंसा के मामले में अभी जमानत नहीं मिली है.

गुजरात में पिछले साल अप्रैल में आरक्षण की मांग को लेकर हार्दिक पटेल की अगुवाई में पाटीदारों ने हिंसक आंदोलन किया था. इसके बाद अक्टूबर में हार्दिक के खिलाफ राजद्रोह के दो मामले दर्ज किए गए थे. इनमें से एक में उन पर पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए और दूसरे में राज्य में हिंसा फैलाने के लिए लोगों को उकसाने का आरोप है. वे पिछले साल अक्टूबर से सूरत की लाजपोर जेल में बंद हैं.