बांग्लादेश में हुए आतंकी हमलों से एक भारतीय नागरिक का भी नाम जुड़ रहा है. कहा जा रहा है कि इन हमलों में इस भारतीय की भी अप्रत्यक्ष भूमिका हो सकती है. यह नाम है इस्लामिक धर्म गुरु डॉक्टर जाकिर नाईक का. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार ढाका में बीस लोगों को मौत के घाट उतारने वाले आतंकियों में से कुछ जाकिर नाइक से प्रभावित थे. इन आरोपों को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि जाकिर नाइक पर पहले भी लोगों को भड़काने और धर्म के नाम पर गुमराह करने जैसे आरोप लगते रहे हैं.

मुंबई में रहने वाले 50 वर्षीय जाकिर नाइक के पिता एक मनोचिकित्सक थे और बड़े भाई एक डॉक्टर. एक साक्षात्कार में जाकिर बताते हैं कि उनकी अम्मी उन्हें क्रिस्चियन बर्नार्ड जैसा बड़ा डॉक्टर बनते देखना चाहती थी. साउथ अफ़्रीकी मूल के डॉक्टर क्रिस्चियन बर्नार्ड ही थे जिन्होंने दुनिया का पहला सफल हार्ट-ट्रांसप्लांट किया था. जाकिर नाइक डॉक्टर तो बने लेकिन डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही उनके आदर्श डॉक्टर बर्नार्ड की जगह एक अन्य साउथ अफ़्रीकी बन गए - इस्लामी उपदेशक शेख अहमद दीदात.

कई लोगों को उनकी यही खूबी सबसे ज्यादा आकर्षित करती है कि वे अपने तर्कों को सिर्फ कुरआन या हदीस ही नहीं बल्कि बाइबिल से लेकर वेद, पुराण, गीता और उपनिषद तक के उदाहरण देकर सही साबित करते हैं.

अहमद दीदात से मिलने के बाद जाकिर ने उनके कई भाषण और तर्क सुनें और अंततः उन्हीं की राह पर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया. 1991 में जाकिर नाईक ने ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ नाम की एक संस्था शुरू की. इस संस्था के बैनर तले उन्होंने इस्लाम और कुरआन पर लोगों से चर्चा करना शुरू किया. 15-20 लोगों के साथ शुरू हुआ इस्लाम पर सवाल-जवाब का यह सिलसिला इतनी तेजी से बढ़ा कि देखते ही देखते जाकिर नाईक के श्रोताओं की संख्या हजारों में जा पहुंची.

इसके बाद नाइक कई मंचों से भी लोगों को संबोधित करने लगे और उनके श्रोता हजारों से लाखों में हो गए. आज उनके श्रोताओं की संख्या करोड़ों में है और इसका मुख्य कारण है ‘पीस टीवी’ जिसे जाकिर नाइक ने साल 2006 में शुरू किया था. यह चैनल दुबई से चलाया जाता है.

जाकिर नाइक की तरफ लाखों लोगों के इतनी तेजी से आकर्षित होने का मुख्य कारण यह है कि वे हर सवाल का जवाब धार्मिक ग्रंथों के हवाले से देते हैं. सिर्फ मुस्लिम धर्म ग्रंथ ही नहीं बल्कि तमाम अन्य धर्मों के दर्जनों ग्रंथ भी जाकिर नाईक ने कंठस्थ कर लिए हैं. वे किसी भी सवाल के जवाब में इन ग्रंथों का हवाला देते हुए उससे संबंधित पेज और पैरा नंबर तक बता डालते हैं.

कई लोगों को उनकी यही खूबी सबसे ज्यादा आकर्षित करती है कि वे अपने तर्कों को सिर्फ कुरआन या हदीस ही नहीं बल्कि बाइबिल से लेकर वेद, पुराण, गीता और उपनिषद तक के उदाहरण देकर सही साबित करते हैं. लेकिन दिलचस्प यह है कि इतना पढ़े-लिखे होकर इतनी पोथियां पढने और रटने के बाद भी जाकिर नाइक अक्सर ऐसे कुतर्क करते हैं कि निर्मल बाबा भी शर्मा कर पानी भरने लग जाएं. वही निर्मल बाबा जो समोसे की चटनी का रंग बदलने से कृपा आने की बात कहते हैं.

ओसामा बिन लादेन के बारे में पूछे जाने पर कुछ साल पहले उनका कहना था कि वे बिन लादेन को आतंकवादी नहीं मानते. बल्कि उन्होंने यह भी कहा था कि जो भी इस्लाम के दुश्मन के खिलाफ लड़ रहा है, मैं उसके साथ हूं.

जाकिर नाइक धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए कभी बीवी को पीटने को जायज़ बताते हैं, कभी समलैगिकों को और इस्लाम त्यागने वालों को सजा-ए-मौत देने की बात करते हैं, कभी कहते हैं कि महिलाएं यदि ताउम्र कुंवारी रहीं तो वे वेश्यावृति की ओर बढ़ जाती हैं और कभी कहते हैं कि सुवर का मीट खाने वाले लोग वाइफ-स्वापिंग करने लगते हैं.

जाकिर नाइक के इन ‘निर्मल बाबा पछाड़’ तर्कों पर विस्तार से चर्चा करने से पहले उनसे जुड़े कुछ ऐसे विवादों के बारे में जानते हैं जिनके चलते उन पर आतंकवादियों को प्रेरित करने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना कल्बे जव्वाद एक साक्षात्कार में कहते हैं, ‘जो व्यक्ति यज़ीद की हिमायत कर रहा हो उससे ज़्यादा दहशतगर्द का हामी कौन हो सकता है. यज़ीद ने इमाम हुसैन को शहीद किया, उसकी हिमायत जाकिर नाइक कर रहे हैं. इसका मतलब है कि वे दहशतगर्दी की हिमायत कर रहे हैं.’

जाकिर नाइक आतंकवाद पर दिए गए अपने कई बयानों के चलते भी विवादों में घिर चुके हैं. ओसामा बिन लादेन के बारे में पूछे जाने पर कुछ साल पहले उनका कहना था कि वे बिन लादेन को आतंकवादी नहीं मानते. बल्कि उन्होंने यह भी कहा था कि ‘जो भी इस्लाम के दुश्मन के खिलाफ लड़ रहा है, मैं उसके साथ हूं. अगर लादेन अमेरिका को आतंकित कर रहा है, जो खुद आतंकवादी है तो मैं उनके साथ हूं.’ इसके साथ ही उनका कहना था कि हर मुसलमान को आतंकवादी होना चाहिए.

जाकिर नाइक के ऐसे ही कई विवादास्पद तर्कों के चलते उन पर समय-समय पर प्रतिबंध भी लगते रहे हैं. दारुल उलूम देवबंद भी उनके खिलाफ फतवा जारी कर चुका है और बरेलवी सुन्नी मुस्लिम, शिया मुस्लिम और सूफी मुस्लिम भी कई बार उनके खिलाफ सरकार से शिकायत कर चुके हैं. उत्तर प्रदेश सरकार कई बार जाकिर नाईक के कार्यक्रमों पर रोक लगा चुकी है और 2012 में यूपीए सरकार ने उनके ‘पीस टीवी’ पर भी प्रतिबंध लगा दिया था. भारत के कुछ हिस्सों में ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों में भी जाकिर नाइक को प्रतिबंधित किया जा चुका है जिनमें ब्रिटेन, कनाडा और मलेशिया प्रमुख हैं.

इंटरनेट पर जाकिर नाइक से जुड़ा एक वीडियो आसानी से मिल जाता है जिसमें उनके एक भाषण की समीक्षा करते हुए बताया गया कि है कैसे उन्होंने 5 मिनट के वीडियो में 25 गलत हवाले दिए.

बात-बात पर धर्मग्रंथों का हवाला देने की जो कला जाकिर नाइक का सबसे बड़ा आकर्षण है, उस पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. कई लोग यह दावा कर चुके हैं कि जाकिर नाईक अक्सर इन ग्रंथों का गलत और झूठा संदर्भ देते हैं. इंटरनेट पर जाकिर नाईक से जुड़ा एक वीडियो आसानी से मिल जाता है जिसमें उनके एक भाषण की समीक्षा करते हुए बताया गया कि है कैसे उन्होंने 5 मिनट के वीडियो में 25 गलत हवाले दिए. ऐसे कई वीडियो और भी हैं जिनमें लोग उनसे उनकी गलत तकरीरों का जवाब मांग रहे हैं और वे इन सवालों से बचते नज़र आ रहे हैं. इसके साथ ही उन पर इस्लाम की गलत व्याख्या के आरोप भी लगते रहे हैं. ऐसे कई मुस्लिम संगठन और धर्मगुरु हैं जो जाकिर नाइक से इत्तेफाक नहीं रखते और उन्हें समाज के लिए खतरा बताते हैं.

जाकिर नाइक की बातों में कई विरोधाभास भी साफ़ नज़र आते हैं. मसलन, ओसामा बिन लादेन को वे इसलिए आतंकवादी नहीं मानते क्योंकि वे उसे व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानते थे. उनका कहना है कि वे बिना रिसर्च के कोई भी टिप्पणी नहीं करते इसलिए वे बिना रिसर्च के ओसामा को आतंकवादी नहीं मानेंगे. जो व्यक्ति दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों पर रिसर्च कर चुका हो और तमाम धर्मग्रंथों को कंठस्थ कर चुका हो वह यदि इतनी सी बात न जान सके कि लादेन आतंकवादी था या नहीं, तो इसे उसके व्यक्तित्व का विरोधाभास ही कहा जाएगा.

ऐसे ही विरोधाभास जाकिर नाइक में तब भी नज़र आते हैं जब वे खुद को एक मेडिकल डॉक्टर और विज्ञान का ज्ञाता बताते हैं लेकिन घोर अवैज्ञानिक तर्क (कुतर्क) देने लगते हैं. विभिन्न सवालों पर दिए गए उनके ऐसे ही कुछ अजीबोगरीब कुतर्कों पर एक नज़र डालते हैं:

सुवर का मीट खाने वाले बीवियों की अदला-बदली करने लगते हैं

इस्लाम में सुवर का मीट खाना क्यों हराम है? इस सवाल के जवाब में जाकिर नाइक सबसे पहले तो अपने हर जवाब की तरह उन ग्रंथों और उनके पेज और पैरा नंबर बताते हैं जहां-जहां सुवर के मीट को ‘हराम’ बताया गया है. इसके बाद वे कहते हैं कि चूंकि सुवर गंदगी खाता है लिहाजा उसका मीट खाने से 70 तरह की बीमारियां हो सकती हैं. साथ ही सुवर खाने के नैतिक और मनोवैज्ञानिक परिणामों के बारे में वे बताते हैं, ‘साइंस आज ये कहती है कि सुवर इस प्रथ्वी का सबसे बेशर्म जानवर है. वो एक अकेला जानवर है जो अपने दोस्तों को बुलाता है, अपनी बीवी के साथ संभोग करने के लिए और देखकर खुश होता है. साइंस कहती है कि जो आप खाते हैं उसका असर आपके बर्ताव में होता है. अमेरिका में अधिकतर लोग सुवर खाते हैं. इसलिए वहां अक्सर डांस पार्टियों के बाद वाइफ-स्वैपिंग’ होती है. यानी बीवियों की अदला-बदली.’

बीवी को मारना जायज है, लेकिन इसके निशान नहीं रहने चाहिए

बीवी को पीटने के सवाल पर कुछ समय पहले एक साक्षात्कार में जाकिर नाईक का कहना था, ‘कुरआन अंतिम विकल्प के तौर पर बीवी पर हाथ उठाने को कहती है. लेकिन हलके से, जैसे कि उसे रुमाल से मार रहे हों. और हां, इस मार के कोई निशान नहीं रहने चाहिए.’

दो औरतों की गवाही और एक मर्द की गवाही बराबर है

जाकिर नाइक कुरआन का हवाला देते हुए कहते हैं कि वित्तीय मामलों में या हत्या के मामलों में मर्दों की गवाही को ही वरीयता दी गई है. वे कहते हैं कि यदि गवाही के लिए दो मर्द न हों तो फिर एक मर्द और दो महिलाएं हो सकती हैं. यानी दो महिलाओं की गवाही और एक मर्द की गवाही समान है. उनके अनुसार वित्तीय मामलों की समझ मर्दों को ही बेहतर होती है और हत्या जैसे मामले में महिलाएं घबरा कर भूल कर सकती हैं. लिहाजा इस तरह के मामलों में दो महिलाओं की गवाही को एक मर्द की गवाही के बराबर माना गया है.

इस्लामिक देशों में न तो किसी अन्य धर्म का प्रचार हो सकता है न ही कोई मंदिर बन सकता है

यह पूछे जाने पर कि जैसे भारत में सभी धर्मों के प्रचार की छूट है वैसे ही इस्लामिक देशों में भी क्या सभी धर्मों के प्रचार-प्रसार की छूट नहीं होनी चाहिए, जाकिर नाइक कहते हैं, ‘मान लीजिये आप एक स्कूल खोलना चाहते हैं. इसके लिए आपको गणित के एक टीचर की जरूरत है. क्या आप ऐसे व्यक्ति को टीचर नियुक्त कर लेंगे जो कहता हो कि दो और दो पांच होता है? आप नहीं करेंगे क्योंकि आप जानते हैं कि गणित में दो और दो सिर्फ चार होता है. ठीक इसी तरह इस्लामिक देश जानते हैं कि धर्म के मामले में सिर्फ इस्लाम ही सही है. बाकी सब गलत है. तो जैसे आप गलत गणित पढ़ाने वाले को कभी टीचर नहीं रखेंगे वैसे ही इस्लामिक देश कभी भी गलत धर्म पढ़ाने वाले को अनुमति नहीं देंगे.’

इस्लाम त्यागने वालों और समलैंगिकों को मौत की सजा हो

जाकिर नाईक बताते हैं कि इस्लाम में धर्म त्यागने वालों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है जो कि बिलकुल सही है. वे कहते हैं कि जैसे राष्ट्र से गद्दारी करने वाले को मौत की सजा देना जायज़ है वैसे ही धर्म से गद्दारी करने वाले को भी मौत की सजा जायज है. समलैंगिकों को मौत की सजा दिए जाने की वकालत भी जाकिर नाइक हदीस, कुरआन और बाइबिल के जिक्र के साथ करते हैं. जाकिर नाईक यह भी चाहते हैं कि भारत के सभी कानून इस्लाम के अनुसार हो जाएं. वे कहते हैं कि शरिया के अनुसार सजाएं होने से भारत में अपराध कम होंगे.

मुस्लिम मर्द बहुविवाह न करें तो लाखों महिलाएं ‘सार्वजनिक संपत्ति’ बन जाएंगी

जाकिर नाइक मानते हैं मुस्लिम मर्दों द्वारा बहुविवाह करना मर्द और औरत, दोनों के हित में है. वे कहते हैं कि मर्द प्राकृतिक रूप से ‘बहुविवाही’ होता है. इसलिए यदि उसकी एक से ज्यादा बीवियां होंगी तो वह अपनी बीवी को धोखा नहीं देगा. वे कहते हैं, ‘यदि हर मर्द की शादी सिर्फ एक महिला से होगी तो अमेरिका में लगभग तीन करोड़ महिलाएं, ब्रिटेन में 40 लाख, जर्मनी में 50 लाख और रूस में 90 लाख महिलाएं कुंवारी ही रह जाएंगी. तब ऐसी महिलाओं के पास सिर्फ दो ही विकल्प बचेंगे, या तो उन्हें किसी शादीशुदा मर्द से शादी करनी होगी या ‘सार्वजनिक संपत्ति’ बनना होगा.’

मंदिर का प्रसाद खाना या मेरी क्रिसमस बोलना हराम है

जाकिर नाइक कहते हैं कि कई मुस्लिम लोग अपने हिन्दू साथियों का मान रखने के लिए मंदिर का प्रसाद ‘बिस्मिल्लाह’ बोलते हुए खा लेते है, लेकिन ऐसा करना गलत है और कुरआन इसकी अनुमति नहीं देती. साथ ही वे कहते हैं मुसलमानों को ‘मेरी क्रिसमस’ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि यह जीसस को भगवान् का बेटा मानने के समान है और किसी मुसलमान के लिए ऐसा करना ‘ईशनिंदा’ है.

महिलाएं ताउम्र कुंवारी रहे तो वेश्यावृत्ति में चली जाएंगी

महिलाओं के कुंवारे रहने का विरोध करते हुए जाकिर नाइक कहते है, ‘मैं एक मेडिकल डॉक्टर हूं इसलिए जानता हूं कि एक महिला कभी भी ताउम्र कुंवारी नहीं रह सकती. यदि वह रहती है तो उसे वैश्यावृति में जाने को मजबूर होना पड़ेगा.’

गोद लिए हुए बच्चे से अजनबी जैसा बर्ताव करना चाहिए

जाकिर नाइक के अनुसार मुस्लिम लोग बच्चे गोद तो ले सकते हैं लेकिन ऐसे बच्चों को इस्लामिक कानून कोई अधिकार नहीं देता. वे यह भी कहते हैं कि ऐसे बच्चों को माता-पिता के रूप में अपना नाम देना भी इस्लाम में गलत है. साथ ही जब ऐसा बच्चा बड़ा हो जाए तो घर की सभी महिलाओं को उससे अजनबी जैसा बर्ताव करना चाहिए और उसकी मौजूदगी में महिलाओं को हिजाब लेना चाहिए.

गैर-मुस्लिम लोग जन्नत नहीं नरक में जाते हैं

जाकिर नाइक से जब यह पूछा गया कि यदि कोई गैर मुस्लिम सारी उम्र दान-पुण्य का कार्य करे, कोई पाप न करे और मानवता की भलाई के लिए अपने प्राण तक त्याग दे तो क्या तब भी वो जन्नत में नहीं जाएगा? इसके जवाब में जाकिर नाइक कहते हैं, ‘मान लीजिये आपको दसवीं क्लास की परीक्षा देनी है. इस परीक्षा में आपके कुल पांच विषय हैं. यदि आप चार विषयों में पूरे सौ अंक हासिल कर लेते हैं और एक विषय में फेल हो जाते हैं तो क्या आप दसवीं क्लास पास कर पाएंगे? ठीक उसी तरह जन्नत जाने के लिए इस्लाम में विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है. जिसे इस्लाम में विश्वास नहीं है, वह चाहे कितनी भी भलाई करे, जन्नत नहीं जा सकता.’

इन तमाम तकरीरों को देते हुए जाकिर नाइक अलग-अलग धर्मग्रंथों का हवाला जरूर देते हैं जिससे कई लोग उनकी बातों को तर्कसंगत मानने लगते हैं और उनके मुरीद भी होते हैं. लेकिन जानकारों की मानें तो यही वह पहलू भी है जिसके चलते उनके जैसे व्यक्ति समाज के लिए बेहद खतरनाक हो जाते हैं. आज के समाज में जहां व्हाट्सएप और फेसबुक पर फैलाए गए झूठे संदेशों को ही इतना विश्वसनीय मान लिया जाता है कि उनके कारण सांप्रदायिक दंगे तक हो जाते हैं, उस समाज में जाकिर नाइक जैसे व्यक्ति जब धर्मग्रंथों के नाम, पेज नंबर और पैराग्राफ नंबर के साथ अपनी कोई भी बात कहते हैं तो स्वाभाविक है कि कई लोगों को प्रभावित कर जाते हैं.

वे सीधे-सीधे आतंकवाद को बढ़ावा न भी देते हों लेकिन ऊपर लिखी उनकी बातों से साफ़ है कि वे धार्मिक-कट्टरपंथ को जरूर बढ़ावा देते हैं. सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू उनके बारे में कहते हैं, ‘मैं नहीं मानता कि जाकिर नाईक एक आतंकवादी है, वह एक धार्मिक कट्टरपंथी है लेकिन यह धार्मिक कट्टरपंथ ही आतंकवाद को जन्म देता है.’