बांग्लादेश भारत के विवादित इस्लामिक वक्ता जाकिर नाईक के भड़काऊ भाषणों पर प्रतिबंध लगा सकता है. बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुजमां खान ने कहा, ‘वे हमारी सुरक्षा जांच के दायरे में हैं...हमारी सुरक्षा एजेंसियां उनकी गतिविधियों की छानबीन कर रही हैं क्योंकि उनके भाषण भड़काऊ जान पड़ते हैं .’ खान ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी बांग्लादेश में नाईक के वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रहे हैं.

खबरों के मुताबिक, बांग्लादेश के सूचना प्रसारण मंत्री हसनुल हक इनु ने कहा है कि नाईक के विवादित भाषणों को देखते हुए सरकार उनके चैनल ‘पीस टीवी बांग्ला’ पर भी प्रतिबंध लगाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है. इनु ने कहा, ‘सरकार को इस बारे में फैसला करने में थोड़ा वक्त लगेगा. लेकिन, मैं आपको बता दूं कि हमें उनके भाषणों में भड़काऊ सामग्री होने की शिकायतें मिल रही हैं.’

एक जुलाई को ढाका के एक रेस्टोरेंट में हुए आतंकी हमले में 22 लोग मारे गए थे. इनमें एक भारतीय सहित 17 विदेशी नागरिक शामिल थे. खबरों के मुताबिक, इस हमले में शामिल एक आतंकी रोहन इम्तियाज जाकिर नाईक के भाषणों से प्रभावित था. बांग्लादेश के अखबार डेली स्टार के अनुसार, रोहन ने अपनी फेसबुक पर नाईक के इस बयान का इस्तेमाल किया था कि ‘सभी मुसलमानों को आतंकी होना चाहिए.’ इस घटना के बाद भारत ने भी नाईक के भाषणों और गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है. महाराष्ट्र पुलिस को इस बारे में जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है.

ब्रिटेन में ब्रेक्जिट पर दोबारा जनमत संग्रह कराने की मांग खारिज

ब्रिटेन की सरकार ने यूरोपीय संघ (ईयू) की सदस्यता छोड़ने के मुद्दे पर दोबारा जनमत संग्रह कराने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है. इस याचिका पर 41 लाख ब्रितानी नागरिकों ने हस्ताक्षर किये थे. ब्रिटेन में सरकार को दी गई यह अब तक की सबसे ज्यादा हस्ताक्षरों वाली याचिका थी. इस याचिका की प्रक्रिया यूरोपियन संघ की सदस्यता के मुद्दे पर हुए जनमंत संग्रह से पहले ही शुरू हो गई थी. एक ब्रेक्जिट समर्थक की इस याचिका में कहा गया था कि यदि सदस्यता के मुद्दे पर हुए जनमत संग्रह में 75 फीसदी से कम लोग वोट डालते हैं या फिर उस पर फैसला 60 फीसदी से कम मतों से होता है तो उसे रद्द कर दिया जाना चाहिए.

समाचार पत्र इंडिपेंडेंट के अनुसार, विदेश कार्यालय ने कहा है कि यूरोपीय संघ जनमत संग्रह अधिनियम में जनमत संग्रह के लिए होने वाले मतदान को लेकर कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है.

ईयू से अलग होने पर हुए जनमत संग्रह में शामिल 3.3 करोड़ लोगों के फैसले का सम्मान करने की बात करते हुए विदेश कार्यालय ने कहा, ‘जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि जो भी फैसला होगा उसका सम्मान किया जाएगा इसलिए अब हमें ईयू से अलग होने की प्रक्रिया के लिए तैयार होना चाहिए.’

रूस से निपटने के लिए नाटो देश पूर्वी पोलैंड में सेना तैनात करने पर सहमत

नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) में शामिल देशों ने पहली बार बाल्टिक देशों के साथ पूर्वी पोलैंड में सेना तैनात करने और गश्त बढ़ाने पर सहमति जताई है. नाटो का यह फैसला सोवियत खेमे में शामिल रहे देशों को लेकर रूस की आक्रामकता को देखते हुए आया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इसका मकसद रूस द्वारा पूर्वी यूरोप में क्रीमिया पर कब्जा करने जैसी किसी कार्रवाई को रोकना है.

शुक्रवार को नाटो में शामिल 28 देशों की पोलैंड की राजधानी वारसा में हुई बैठक में पूर्वोत्तर यूरोप में चार बटालियन को तैनात करने का फैसला किया गया. इसके तहत तीन से चार हजार सैनिक को वहां बारी-बारी से तैनात किया जाएगा. इस फैसले की जानकारी देते हुए नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, ‘ये बटालियन काफी मजबूत होगी. इनमें कई देशों की सेनाएं होंगी. इससे स्पष्ट होगा कि किसी एक सहयोगी पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाएगा.’

हालांकि, नाटो ने इसके साथ रूस के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने और विश्वास बहाली के उपायों को दोबारा शुरू करने पर भी जोर दिया है. 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लेने और पूर्वी यूक्रेन में रूसी भाषी विद्रोहियों को समर्थन देने के बाद से रूस बातचीत के प्रस्तावों को ठुकराता रहा है.