‘इसमें कोई शक नहीं कि अडानी को प्रधानमंत्री नरेंद मोदी की उदारता का लाभ मिला है.’

— जयराम रमेश, पूर्व पर्यावरण मंत्री

जयराम रमेश का यह बयान छत्तीसगढ़ में खदान आवंटन को लेकर उद्योगपति गौतम अडानी के आरोपों के जवाब में आया. इससे पहले अडानी ने कहा था कि जयराम रमेश के पर्यावरण मंत्री रहते हुए ही विवादित कोयला खनन परियोजना को मंजूरी मिली थी, जिसका मालिकाना हक राजस्थान सरकार के पास है और उनके समूह के पास केवल खनन करने का ठेका है. इसके जवाब में रमेश ने कहा, ‘यह मुद्दा ही नहीं है कि राजस्थान सरकार ने खनन का ठेका अडानी समूह को दिया था बल्कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार का आदेश मुख्य मुद्दा है जिसमें उसने वनाधिकार कानून के तहत वन भूमि पर स्थानीय आदिवासियों के अधिकार को खारिज कर दिया था.’

‘केंद्र सरकार को विकास दर के आंकड़ों पर सफाई देनी चाहिए.’

— यशवंत सिन्हा, पूर्व विदेश मंत्री

यशवंत सिन्हा ने यह बात मोदी सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियों की आलोचना करते हुए कही. उन्होंने कहा, ‘घरेलू आलोचना को एकबार नजरअंदाज भी कर दिया जाए तो सरकार को अच्छे मित्र अमेरिका की शिकायत पर तो सफाई देनी ही चाहिए.’ सिन्हा ने कहा कि आंकड़ों में 1,40,000 करोड़ रुपये की विसंगति की वजह से भारत की विकास दर ज्यादा हो सकती है और इस विसंगति को दूर करने पर विकास दर में तेजी से गिरावट आएगी. पिछले हफ्ते अमेरिका ने भारत के 7.5 फीसदी विकास दर के दावे पर संदेह जताया था. अमेरिकी विदेश विभाग के आर्थिक और व्यापार ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यह बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया आंकड़ा हो सकता है.


‘कुछ लोग हमारे पड़ोसी की शह पर गड़बड़ फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.’

— वेंकैया नायडू, सूचना और प्रसारण मंत्री

नायडू ने यह बात कश्मीर में मारे गए आतंकी बुरहान वानी के समर्थन में फैली हिंसा को लेकर कही. पाकिस्तान पर कश्मीर के लोगों को भड़काने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत पाकिस्तान के साथ काम करना चाह रहा है और दोस्ती बनाए रखना चाहेगा. लेकिन, अगर पाकिस्तान लगातार ऐसा करता रहेगा तो भारत को अपनी नीति के बारे में सोचना पड़ेगा. पाकिस्तान को ऐसे हथकंडों को छोड़ देना चाहिए.’ पिछले हफ्ते सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर बुरहान वानी मारा गया था. इसके के बाद कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा, सोपियां और कुलगाम में हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं.


‘दक्षिणी सूडान में शांति समझौते में बाधा बनने वालों पर सुरक्षा परिषद प्रतिबंध लगाए.’

— बान की मून, संयुक्त राष्ट्र महासचिव

बान की मून ने यह बात दक्षिण सूडान में भड़की हिंसा को लेकर कही. दक्षिणी सूडान की राजधानी जुबा के नजदीक संघर्ष के ताजा मामलों को देखते हुए मून ने कहा, ‘जब सरकार अपने लोगों की मदद नहीं कर रही है और संघर्ष में शामिल पक्ष लड़ाई के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं तो ऐसे में कार्रवाई करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी बन जाती है.’ सोमवार को दक्षिणी सूडान में राष्ट्रपति सलवाकीद और उपराष्ट्रपति रीक माचर के समर्थक सैनिकों के बीच संघर्ष बढ़ने की खबरें आई हैं. इससे सूडान में दोबारा गृह युद्ध जैसे हालत बनने की आशंका पैदा हो गई है. चार दिन पहले भड़की हिंसा में अब तक ढाई सौ से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.